अल-अनफाल · 46/75
अनुवाद उच्चारण — अल-अनफाल
وَأَطِيعُوا اللَّهَ وَرَسُولَهُ وَلَا تَنَازَعُوا فَتَفْشَلُوا وَتَذْهَبَ رِيحُكُمْ ۖ وَاصْبِرُوا ۚ إِنَّ اللَّهَ مَعَ الصَّابِرِينَ ۝٤٦
Wa atee`ul laaha wa Rasoolahoo wa laa tanaaza`oo fatafshaloo wa tazhaba reehukum wasbiroo; innal laaha ma`as saabireen
📖 हिंदी अर्थ
और ख़ुदा की और उसके रसूल की इताअत करो और आपस में झगड़ा न करो वरना तुम हिम्मत हारोगे और तुम्हारी हवा उखड़ जाएगी और (जंग की तकलीफ़ को) झेल जाओ (क्योंकि) ख़ुदा तो यक़ीनन सब्र करने वालों का साथी है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَنَازَعُوا (तनाज़ऊ): आपस में मतभेद करना, झगड़ना, विवाद करना।
  • تَفْشَلُوا (तफ़्शलू): कमज़ोर पड़ जाना, बुज़दिल हो जाना, साहस खो देना।
  • رِيحُكُمْ (रीहुकुम): तुम्हारी हवा, अर्थात तुम्हारी ताकत, प्रभाव, राज्य और विजय। अरबी भाषा में कहा जाता है "هَبَّتْ رِيحُ فُلَانٍ" यानी फलाँ की हवा चली, अर्थात उसका काम कामयाब हुआ और उसका दबदबा बढ़ा।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला मुसलमानों को आदेश देता है कि वे हर हालत में अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की आज्ञा का पालन करें—अपने कहने, करने और हर मामले में। उन्हें आपस में मतभेद और झगड़े से बचना चाहिए, क्योंकि जब लोगों के विचार अलग-अलग हो जाते हैं और दिल बँट जाते हैं, तो उनकी एकता टूट जाती है। इसका नतीजा यह होता है कि वे कमज़ोर पड़ जाते हैं, उनका साहस जवाब दे जाता है, और उनकी ताकत, इज़्ज़त और विजय (जिसे अरबी में "रीह" यानी हवा से किनाया किया गया है) जाती रहती है। यानी उनका दबदबा और राज्य खत्म हो जाता है, और दुश्मन उन पर हावी हो जाते हैं।

फिर अल्लाह तआला उन्हें सब्र की ताकीद करता है, खासकर दुश्मन से मुकाबले के वक्त। सब्र का मतलब यह है कि वे डटे रहें, जज़्बात पर काबू रखें, और अल्लाह की राह में मुश्किलों को बर्दाश्त करें। इसके बाद अल्लाह तआला एक बड़ी खुशखबरी देता है कि वह सब्र करने वालों के साथ है—उनकी मदद करता है, उन्हें नुसरत (विजय) देता है और उनकी ताइद (समर्थन) करता है। जिसके साथ अल्लाह हो, वह हर हाल में ग़ालिब और कामयाब रहता है, और उसे कभी निराश नहीं होना पड़ता।

फ़ायदे (सीख):

  1. एकता में बरकत है: इस आयत से हमें सीख मिलती है कि मुसलमानों की ताकत उनकी एकता में है। आपसी मतभेद और झगड़े न केवल उनकी दुनियावी तरक्की को रोकते हैं, बल्कि उनकी दीनी कामयाबी को भी नुकसान पहुँचाते हैं। इसलिए हमें हर मामले में एकता को बनाए रखना चाहिए।
  2. अल्लाह और रसूल की इताअत (आज्ञापालन) ही कामयाबी की कुंजी है: जब हम अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की बताई हुई राह पर चलते हैं, तो अल्लाह हमारी मदद करता है और हमें कभी अकेला नहीं छोड़ता।
  3. सब्र की अज़ीमुश्शान फज़ीलत: सब्र करने वालों के साथ अल्लाह की खास मदद होती है। मुश्किल वक्त में घबराना नहीं चाहिए, बल्कि सब्र और अल्लाह पर भरोसा ही हमें कामयाबी की राह दिखाता है। यह आयत हमें सिखाती है कि जीवन की हर परीक्षा में सब्र ही सबसे बड़ा हथियार है।
  4. मुसलमानों की इज़्ज़त और ताकत अल्लाह के हाथ में है: जब मुसलमान अल्लाह के हुक्मों पर चलते हैं और आपस में एकजुट रहते हैं, तो अल्लाह उन्हें ऐसी ताकत और इज़्ज़त देता है जो दुनिया की कोई ताकत छीन नहीं सकती। यह हमें अपनी ज़िम्मेदारी का एहसास कराता है कि हमें अपने अंदर की कमज़ोरियों को दूर करना है, न कि दुश्मनों से डरना।


📜 आयत 44-48 — अल-अनफाल

44وَإِذْ يُرِيكُمُوهُمْ إِذِ الْتَقَيْتُمْ فِي أَعْيُنِكُمْ قَلِيلًا وَيُقَلِّلُكُمْ فِي أَعْيُنِهِمْ لِيَقْضِيَ اللَّهُ أَمْرًا كَانَ مَفْعُولًا ۗ وَإِلَى اللَّهِ تُرْجَعُ الْأُمُورُ
(ये वह वक्त था) जब तुम लोगों ने मुठभेड़ की तो ख़ुदा ने तुम्हारी ऑखों में कुफ्फ़ार को बहुत कम करके दिखलाया और उनकी ऑखों में तुमको थोड़ा कर दिया ताकि ख़ुदा को जो कुछ करना मंज़ूर था वह पूरा हो जाए और कुल बातों का दारोमदार तो ख़ुदा ही पर है
45يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا لَقِيتُمْ فِئَةً فَاثْبُتُوا وَاذْكُرُوا اللَّهَ كَثِيرًا لَّعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ
ऐ ईमानदारों जब तुम किसी फौज से मुठभेड़ करो तो ख़बरदार अपने क़दम जमाए रहो और ख़ुदा को बहुंत याद करते रहो ताकि तुम फलाह पाओ
46وَأَطِيعُوا اللَّهَ وَرَسُولَهُ وَلَا تَنَازَعُوا فَتَفْشَلُوا وَتَذْهَبَ رِيحُكُمْ ۖ وَاصْبِرُوا ۚ إِنَّ اللَّهَ مَعَ الصَّابِرِينَ
और ख़ुदा की और उसके रसूल की इताअत करो और आपस में झगड़ा न करो वरना तुम हिम्मत हारोगे और तुम्हारी हवा उखड़ जाएगी और (जंग की तकलीफ़ को) झेल जाओ (क्योंकि) ख़ुदा तो यक़ीनन सब्र करने वालों का साथी है
47وَلَا تَكُونُوا كَالَّذِينَ خَرَجُوا مِن دِيَارِهِم بَطَرًا وَرِئَاءَ النَّاسِ وَيَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ اللَّهِ ۚ وَاللَّهُ بِمَا يَعْمَلُونَ مُحِيطٌ
और उन लोगों के ऐसे न हो जाओ जो इतराते हुए और लोगों के दिखलाने के वास्ते अपने घरों से निकल खड़े हुए और लोगों को ख़ुदा की राह से रोकते हैं और जो कुछ भी वह लोग करते हैं ख़ुदा उस पर (हर तरह से) अहाता किए हुए है
48وَإِذْ زَيَّنَ لَهُمُ الشَّيْطَانُ أَعْمَالَهُمْ وَقَالَ لَا غَالِبَ لَكُمُ الْيَوْمَ مِنَ النَّاسِ وَإِنِّي جَارٌ لَّكُمْ ۖ فَلَمَّا تَرَاءَتِ الْفِئَتَانِ نَكَصَ عَلَىٰ عَقِبَيْهِ وَقَالَ إِنِّي بَرِيءٌ مِّنكُمْ إِنِّي أَرَىٰ مَا لَا تَرَوْنَ إِنِّي أَخَافُ اللَّهَ ۚ وَاللَّهُ شَدِيدُ الْعِقَابِ
और जब शैतान ने उनकी कारस्तानियों को उम्दा कर दिखाया और उनके कान में फूंक दिया कि लोगों में आज कोई ऐसा नहीं जो तुम पर ग़ालिब आ सके और मै तुम्हारा मददगार हूं फिर जब दोनों लश्कर मुकाबिल हुए तो अपने उलटे पॉव भाग निकला और कहने लगा कि मै तो तुम से अलग हूं मै वह चीजें देख रहा हूं जो तुम्हें नहीं सूझती मैं तो ख़ुदा से डरता हूं और ख़ुदा बहुत सख्त अज़ाब वाला है
अल-अनफालकुरान सूची
75आयत
मदनीRevelation
46आयत

अनुवाद — अल-अनफाल 46

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Tuesday, August 18, 2026

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