अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَنَازَعُوا (तनाज़ऊ): आपस में मतभेद करना, झगड़ना, विवाद करना।
- تَفْشَلُوا (तफ़्शलू): कमज़ोर पड़ जाना, बुज़दिल हो जाना, साहस खो देना।
- رِيحُكُمْ (रीहुकुम): तुम्हारी हवा, अर्थात तुम्हारी ताकत, प्रभाव, राज्य और विजय। अरबी भाषा में कहा जाता है "هَبَّتْ رِيحُ فُلَانٍ" यानी फलाँ की हवा चली, अर्थात उसका काम कामयाब हुआ और उसका दबदबा बढ़ा।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला मुसलमानों को आदेश देता है कि वे हर हालत में अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की आज्ञा का पालन करें—अपने कहने, करने और हर मामले में। उन्हें आपस में मतभेद और झगड़े से बचना चाहिए, क्योंकि जब लोगों के विचार अलग-अलग हो जाते हैं और दिल बँट जाते हैं, तो उनकी एकता टूट जाती है। इसका नतीजा यह होता है कि वे कमज़ोर पड़ जाते हैं, उनका साहस जवाब दे जाता है, और उनकी ताकत, इज़्ज़त और विजय (जिसे अरबी में "रीह" यानी हवा से किनाया किया गया है) जाती रहती है। यानी उनका दबदबा और राज्य खत्म हो जाता है, और दुश्मन उन पर हावी हो जाते हैं।
फिर अल्लाह तआला उन्हें सब्र की ताकीद करता है, खासकर दुश्मन से मुकाबले के वक्त। सब्र का मतलब यह है कि वे डटे रहें, जज़्बात पर काबू रखें, और अल्लाह की राह में मुश्किलों को बर्दाश्त करें। इसके बाद अल्लाह तआला एक बड़ी खुशखबरी देता है कि वह सब्र करने वालों के साथ है—उनकी मदद करता है, उन्हें नुसरत (विजय) देता है और उनकी ताइद (समर्थन) करता है। जिसके साथ अल्लाह हो, वह हर हाल में ग़ालिब और कामयाब रहता है, और उसे कभी निराश नहीं होना पड़ता।
फ़ायदे (सीख):
- एकता में बरकत है: इस आयत से हमें सीख मिलती है कि मुसलमानों की ताकत उनकी एकता में है। आपसी मतभेद और झगड़े न केवल उनकी दुनियावी तरक्की को रोकते हैं, बल्कि उनकी दीनी कामयाबी को भी नुकसान पहुँचाते हैं। इसलिए हमें हर मामले में एकता को बनाए रखना चाहिए।
- अल्लाह और रसूल की इताअत (आज्ञापालन) ही कामयाबी की कुंजी है: जब हम अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की बताई हुई राह पर चलते हैं, तो अल्लाह हमारी मदद करता है और हमें कभी अकेला नहीं छोड़ता।
- सब्र की अज़ीमुश्शान फज़ीलत: सब्र करने वालों के साथ अल्लाह की खास मदद होती है। मुश्किल वक्त में घबराना नहीं चाहिए, बल्कि सब्र और अल्लाह पर भरोसा ही हमें कामयाबी की राह दिखाता है। यह आयत हमें सिखाती है कि जीवन की हर परीक्षा में सब्र ही सबसे बड़ा हथियार है।
- मुसलमानों की इज़्ज़त और ताकत अल्लाह के हाथ में है: जब मुसलमान अल्लाह के हुक्मों पर चलते हैं और आपस में एकजुट रहते हैं, तो अल्लाह उन्हें ऐसी ताकत और इज़्ज़त देता है जो दुनिया की कोई ताकत छीन नहीं सकती। यह हमें अपनी ज़िम्मेदारी का एहसास कराता है कि हमें अपने अंदर की कमज़ोरियों को दूर करना है, न कि दुश्मनों से डरना।
📜 आयत 44-48 — अल-अनफाल
अनुवाद — अल-अनफाल 46
सूरा अल-अनफाल आयत 46 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ख़ुदा की और उसके रसूल की इताअत करो और…सूरा आयत 46/75 — अल-अनफाल الأنفال (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनफाल सुनें, अल-अनफाल अनुवाद, अल-अनफाल mp3, अल-अनफाल pdf. आयत 44–48. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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