अल-अनफाल · 63/75
अनुवाद उच्चारण — अल-अनफाल
وَأَلَّفَ بَيْنَ قُلُوبِهِمْ ۚ لَوْ أَنفَقْتَ مَا فِي الْأَرْضِ جَمِيعًا مَّا أَلَّفْتَ بَيْنَ قُلُوبِهِمْ وَلَٰكِنَّ اللَّهَ أَلَّفَ بَيْنَهُمْ ۚ إِنَّهُ عَزِيزٌ حَكِيمٌ ۝٦٣
Wa allafa baina quloobihim; law anfaqta maa fil ardi jamee`am maaa allafta baina quloobihim wa laakinnallaaha allafa bainahum; innaahoo `Azeezun Hakeem
📖 हिंदी अर्थ
और उसी ने उन मुसलमानों के दिलों में बाहम ऐसी उलफ़त पैदा कर दी कि अगर तुम जो कुछ ज़मीन में है सब का सब खर्च कर डालते तो भी उनके दिलो में ऐसी उलफ़त पैदा न कर सकते मगर ख़ुदा ही था जिसने बाहम उलफत पैदा की बेशक वह ज़बरदस्त हिक़मत वाला है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَلَّفَ: मिलाना, एकत्रित करना, आपस में प्रेम और एकता स्थापित करना।
  • قُلُوبِهِمْ: उनके दिल (अर्थात् मुहाजिरीन और अन्सार के दिल)।
  • عَزِيزٌ: सर्वशक्तिमान, जिसे कोई पराजित न कर सके, प्रभुत्वशाली।
  • حَكِيمٌ: अत्यंत तत्वदर्शी, जो हर कार्य को अपनी गहरी समझ और योजना के अनुसार करता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला ने अपने पैग़म्बर ﷺ पर अपने महान उपकार का ज़िक्र किया है। अल्लाह ने मुहाजिरीन (मक्का से हिजरत करने वालों) और अन्सार (मदीना के सहायकों) के दिलों को आपस में जोड़ दिया। इससे पहले ये दोनों समूह (औस और ख़ज़रज) आपस में सदियों से दुश्मनी रखते थे, खूनी झगड़े और युद्ध उनकी आदत थी। लेकिन अल्लाह ने इस्लाम की बरकत से उनके दिलों में प्रेम और भाईचारा पैदा कर दिया, और वे एक दूसरे के सहारा बन गए।

अल्लाह फ़रमाता है: ऐ नबी! यदि आप धरती में मौजूद सारा धन-दौलत खर्च कर देते तो भी आप इन दिलों को आपस में नहीं जोड़ सकते थे। क्योंकि दिलों का मिलाना धन से नहीं, बल्कि अल्लाह के क़ुदरत (शक्ति) से होता है। यह कार्य केवल अल्लाह ने किया, उसने अपनी असीम शक्ति और रहमत से उनके बीच प्रेम की डोर बाँध दी। निश्चय ही अल्लाह अज़ीज़ है (अपने प्रभुत्व में सर्वशक्तिमान, कोई उसके कार्य में बाधा नहीं डाल सकता) और हकीम है (अपने हर फ़ैसले और व्यवस्था में पूर्ण ज्ञान और समझ रखता है)।

फ़ायदे (लाभ):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि सच्ची एकता और प्रेम का स्रोत केवल अल्लाह का दीन (इस्लाम) है। धन, रिश्ते या दुनियावी मतलब से दिलों में गहरा और स्थायी प्रेम पैदा नहीं हो सकता; यह अल्लाह ही की विशेष कृपा है।
  2. इससे मुसलमानों को सबक मिलता है कि आपसी मनमुटाव और दुश्मनी को मिटाने का सबसे कारगर तरीका अल्लाह की राह में भाईचारा और ईमान है। जब दिल ईमान से जुड़ते हैं, तो दुनिया की कोई ताकत उन्हें अलग नहीं कर सकती।
  3. आयत में अल्लाह की क़ुदरत का प्रमाण है कि वह असंभव लगने वाले काम को भी कर सकता है। इसलिए हमें कठिन परिस्थितियों में अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि वही दिलों के मालिक हैं।
  4. यह उम्मत के लिए एक बड़ी नेमत की याद दिलाती है कि अल्लाह ने उन्हें आपस में भाई बना दिया, इसलिए हमें इस भाईचारे को क़ायम रखने की कोशिश करनी चाहिए और किसी भी चीज़ को इस एकता में दरार नहीं डालने देना चाहिए।


📜 आयत 61-65 — अल-अनफाल

61۞ وَإِن جَنَحُوا لِلسَّلْمِ فَاجْنَحْ لَهَا وَتَوَكَّلْ عَلَى اللَّهِ ۚ إِنَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
और अगर ये कुफ्फार सुलह की तरफ माएल हो तो तुम भी उसकी तरफ माएल हो और ख़ुदा पर भरोसा रखो (क्योंकि) वह बेशक (सब कुछ) सुनता जानता है
62وَإِن يُرِيدُوا أَن يَخْدَعُوكَ فَإِنَّ حَسْبَكَ اللَّهُ ۚ هُوَ الَّذِي أَيَّدَكَ بِنَصْرِهِ وَبِالْمُؤْمِنِينَ
और अगर वह लोग तुम्हें फरेब देना चाहे तो (कुछ परवा नहीं) ख़ुदा तुम्हारे वास्ते यक़ीनी काफी है-(ऐ रसूल) वही तो वह (ख़ुदा) है जिसने अपनी ख़ास मदद और मोमिनीन से तुम्हारी ताईद की
63وَأَلَّفَ بَيْنَ قُلُوبِهِمْ ۚ لَوْ أَنفَقْتَ مَا فِي الْأَرْضِ جَمِيعًا مَّا أَلَّفْتَ بَيْنَ قُلُوبِهِمْ وَلَٰكِنَّ اللَّهَ أَلَّفَ بَيْنَهُمْ ۚ إِنَّهُ عَزِيزٌ حَكِيمٌ
और उसी ने उन मुसलमानों के दिलों में बाहम ऐसी उलफ़त पैदा कर दी कि अगर तुम जो कुछ ज़मीन में है सब का सब खर्च कर डालते तो भी उनके दिलो में ऐसी उलफ़त पैदा न कर सकते मगर ख़ुदा ही था जिसने बाहम उलफत पैदा की बेशक वह ज़बरदस्त हिक़मत वाला है
64يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ حَسْبُكَ اللَّهُ وَمَنِ اتَّبَعَكَ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ
ऐ रसूल तुमको बस ख़ुदा और जो मोमिनीन तुम्हारे ताबेए फरमान (फरमाबरदार) है काफी है
65يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ حَرِّضِ الْمُؤْمِنِينَ عَلَى الْقِتَالِ ۚ إِن يَكُن مِّنكُمْ عِشْرُونَ صَابِرُونَ يَغْلِبُوا مِائَتَيْنِ ۚ وَإِن يَكُن مِّنكُم مِّائَةٌ يَغْلِبُوا أَلْفًا مِّنَ الَّذِينَ كَفَرُوا بِأَنَّهُمْ قَوْمٌ لَّا يَفْقَهُونَ
ऐ रसूल तुम मोमिनीन को जिहाद के वास्ते आमादा करो (वह घबराए नहीं ख़ुदा उनसे वायदा करता है कि) अगर तुम लोगों में के साबित क़दम रहने वाले बीस भी होगें तो वह दो सौ (काफिरों) पर ग़ालिब आ जायेगे और अगर तुम लोगों में से साबित कदम रहने वालों सौ होगें तो हज़ार (काफिरों) पर ग़ालिब आ जाएँगें इस सबब से कि ये लोग ना समझ हैं
अल-अनफालकुरान सूची
75आयत
मदनीRevelation
63आयत

अनुवाद — अल-अनफाल 63

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Tuesday, August 18, 2026

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