अल-बुरूज · 8/22
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-बुरूज
وَمَا نَقَمُوا مِنْهُمْ إِلَّا أَن يُؤْمِنُوا بِاللَّهِ الْعَزِيزِ الْحَمِيدِ ۝٨
Wa maa naqamoo minhum illaaa aiyu`minoo billaahil `azeezil Hameed
📖 हिंदी अर्थ
और उनको मोमिनीन की यही बात बुरी मालूम हुई कि वह लोग ख़ुदा पर ईमान लाए थे जो ज़बरदस्त और सज़ावार हम्द है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • नक़मू (नक़्म): बुराई मानना, आरोप लगाना, दोष निकालना।
  • अल-अज़ीज़: वह शक्तिशाली जिसे कोई हरा न सके, जो सब पर ग़ालिब हो।
  • अल-हमीद: वह जो हर हाल में प्रशंसा के योग्य हो, जिसकी तारीफ़ सभी गुणों में की जाए।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला उन ज़ालिमों के ज़ुल्म की असलियत बयान कर रहे हैं जिन्होंने ईमानवालों को आग के गड्ढों में जलाकर भयानक अत्याचार किया। वे कहते हैं कि उन अत्याचारियों ने मोमिनों की कोई बुराई नहीं पाई, न उनसे कोई ग़लती हुई, न उन्होंने कोई जुर्म किया। उनका एकमात्र "अपराध" यह था कि वे अल्लाह पर ईमान लाए — उस अल्लाह पर जो सबसे शक्तिशाली है, जिसकी शक्ति के आगे हर ताकत बेबस है, और जो अपने हर काम, हर बात और हर गुण में प्रशंसा के योग्य है।

यानी ईमानवालों का "जुर्म" सिर्फ़ यह था कि उन्होंने एक अल्लाह की इबादत की, उसे अपना रब और मालिक माना, और उसकी तौहीद पर कायम रहे। इसके अलावा उनके खिलाफ कोई शिकायत नहीं थी। यह उन ज़ालिमों की सबसे बड़ी मूर्खता और हठधर्मिता थी कि उन्होंने सच्चाई और ईमान को ही अपराध बना लिया और उसकी सज़ा में मोमिनों को जला दिया।

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चा ईमान ही सबसे बड़ी नेमत है। दुनिया में जब भी कोई इंसान सिर्फ़ अल्लाह की इबादत और उसके दीन पर चलने की वजह से मुसीबतों में घिरता है, तो यह उसके लिए शर्म की बात नहीं बल्कि फ़ख्र की बात है। क़ुरआन हमें बताता है कि अल्लाह के रास्ते में परेशानियाँ और कुर्बानियाँ ही असली कामयाबी की निशानी हैं। जो लोग ईमान की खातिर मुश्किलें सहते हैं, अल्लाह उन्हें अज़ीज़ (इज़्ज़त देने वाला) और हमीद (प्रशंसा करने वाला) बनकर दुनिया और आख़िरत में सरफ़राज़ करेगा।

इस आयत से हमें यह भी सबक मिलता है कि हमें अपने ईमान पर मज़बूती से क़ायम रहना चाहिए, चाहे दुनिया हमसे नाराज़ हो जाए। क्योंकि अल्लाह ही असली इज़्ज़त और बुलंदी देने वाला है। जब हम अल्लाह के लिए जिएँगे और उसी की राह में कुर्बानियाँ देंगे, तो वह हमें कभी अकेला नहीं छोड़ेगा। यही वह ईमान है जो हमें दुनिया की हर ताकत से बेख़ौफ़ बना देता है, क्योंकि हमें यक़ीन होता है कि हमारा रब सबसे बड़ा है, सबसे ताकतवर है, और वही हमारी मदद करने वाला है।



📜 आयत 6-10 — सूरा अल-बुरूज

6إِذْ هُمْ عَلَيْهَا قُعُودٌ
जिसमें (उन्होंने मुसलमानों के लिए) ईंधन झोंक रखा था
7وَهُمْ عَلَىٰ مَا يَفْعَلُونَ بِالْمُؤْمِنِينَ شُهُودٌ
जब वह उन (ख़न्दक़ों) पर बैठे हुए और जो सुलूक ईमानदारों के साथ करते थे उसको सामने देख रहे थे
8وَمَا نَقَمُوا مِنْهُمْ إِلَّا أَن يُؤْمِنُوا بِاللَّهِ الْعَزِيزِ الْحَمِيدِ
और उनको मोमिनीन की यही बात बुरी मालूम हुई कि वह लोग ख़ुदा पर ईमान लाए थे जो ज़बरदस्त और सज़ावार हम्द है
9الَّذِي لَهُ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ وَاللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ شَهِيدٌ
वह (ख़ुदा) जिसकी सारे आसमान ज़मीन में बादशाहत है और ख़ुदा हर चीज़ से वाक़िफ़ है
10إِنَّ الَّذِينَ فَتَنُوا الْمُؤْمِنِينَ وَالْمُؤْمِنَاتِ ثُمَّ لَمْ يَتُوبُوا فَلَهُمْ عَذَابُ جَهَنَّمَ وَلَهُمْ عَذَابُ الْحَرِيقِ
बेशक जिन लोगों ने ईमानदार मर्दों और औरतों को तकलीफें दीं फिर तौबा न की उनके लिए जहन्नुम का अज़ाब तो है ही (इसके अलावा) जलने का भी अज़ाब होगा
अल-बुरूजकुरान सूची
22आयत
मक्कीअवतरण स्थान
8आयत

अनुवाद — अल-बुरूज 8

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Monday, September 28, 2026

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