Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- नक़मू (नक़्म): बुराई मानना, आरोप लगाना, दोष निकालना।
- अल-अज़ीज़: वह शक्तिशाली जिसे कोई हरा न सके, जो सब पर ग़ालिब हो।
- अल-हमीद: वह जो हर हाल में प्रशंसा के योग्य हो, जिसकी तारीफ़ सभी गुणों में की जाए।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला उन ज़ालिमों के ज़ुल्म की असलियत बयान कर रहे हैं जिन्होंने ईमानवालों को आग के गड्ढों में जलाकर भयानक अत्याचार किया। वे कहते हैं कि उन अत्याचारियों ने मोमिनों की कोई बुराई नहीं पाई, न उनसे कोई ग़लती हुई, न उन्होंने कोई जुर्म किया। उनका एकमात्र "अपराध" यह था कि वे अल्लाह पर ईमान लाए — उस अल्लाह पर जो सबसे शक्तिशाली है, जिसकी शक्ति के आगे हर ताकत बेबस है, और जो अपने हर काम, हर बात और हर गुण में प्रशंसा के योग्य है।
यानी ईमानवालों का "जुर्म" सिर्फ़ यह था कि उन्होंने एक अल्लाह की इबादत की, उसे अपना रब और मालिक माना, और उसकी तौहीद पर कायम रहे। इसके अलावा उनके खिलाफ कोई शिकायत नहीं थी। यह उन ज़ालिमों की सबसे बड़ी मूर्खता और हठधर्मिता थी कि उन्होंने सच्चाई और ईमान को ही अपराध बना लिया और उसकी सज़ा में मोमिनों को जला दिया।
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चा ईमान ही सबसे बड़ी नेमत है। दुनिया में जब भी कोई इंसान सिर्फ़ अल्लाह की इबादत और उसके दीन पर चलने की वजह से मुसीबतों में घिरता है, तो यह उसके लिए शर्म की बात नहीं बल्कि फ़ख्र की बात है। क़ुरआन हमें बताता है कि अल्लाह के रास्ते में परेशानियाँ और कुर्बानियाँ ही असली कामयाबी की निशानी हैं। जो लोग ईमान की खातिर मुश्किलें सहते हैं, अल्लाह उन्हें अज़ीज़ (इज़्ज़त देने वाला) और हमीद (प्रशंसा करने वाला) बनकर दुनिया और आख़िरत में सरफ़राज़ करेगा।
इस आयत से हमें यह भी सबक मिलता है कि हमें अपने ईमान पर मज़बूती से क़ायम रहना चाहिए, चाहे दुनिया हमसे नाराज़ हो जाए। क्योंकि अल्लाह ही असली इज़्ज़त और बुलंदी देने वाला है। जब हम अल्लाह के लिए जिएँगे और उसी की राह में कुर्बानियाँ देंगे, तो वह हमें कभी अकेला नहीं छोड़ेगा। यही वह ईमान है जो हमें दुनिया की हर ताकत से बेख़ौफ़ बना देता है, क्योंकि हमें यक़ीन होता है कि हमारा रब सबसे बड़ा है, सबसे ताकतवर है, और वही हमारी मदद करने वाला है।
📜 आयत 6-10 — सूरा अल-बुरूज
अनुवाद — अल-बुरूज 8
सूरा अल-बुरूज आयत 8 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उनको मोमिनीन की यही बात बुरी मालूम हुई कि…सूरा आयत 8/22 — सूरा अल-बुरूज البروج (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बुरूज सुनें, सूरा अल-बुरूज अनुवाद, सूरा अल-बुरूज mp3, सूरा अल-बुरूज pdf. आयत 6–10. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-बुरूज
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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