अल-ग़ाशिया · 17/26
अनुवाद उच्चारण — अल-ग़ाशिया
أَفَلَا يَنظُرُونَ إِلَى الْإِبِلِ كَيْفَ خُلِقَتْ ۝١٧
Afalaa yanzuroona ilalibili kaifa khuliqat
📖 हिंदी अर्थ
तो क्या ये लोग ऊँट की तरह ग़ौर नहीं करते कि कैसा अजीब पैदा किया गया है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَفَلَا يَنظُرُونَ – तो क्या वे देखते नहीं?
  • إِلَى الْإِبِلِ – ऊँटों की ओर
  • كَيْفَ خُلِقَتْ – कैसे पैदा किए गए

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में मुनकिरीन-ए-हश्र (आख़िरत के दिन को झुठलाने वालों) से एक सवाल पूछ रहे हैं, जो उनकी अक़्ल और समझ को जगाने के लिए है। वह फ़रमाते हैं: क्या ये लोग ऊँटों की तरफ़ नहीं देखते कि उन्हें किस तरह पैदा किया गया है?

यह एक अजीबो-ग़रीब मख़लूक़ है। अल्लाह ने ऊँट को इतनी बड़ी क़द-काठी वाला बनाया है, फिर भी वह इंसान के लिए पूरी तरह वश में है। वह अपने मालिक की हर इशारे पर चलता है, भारी बोझ उठाता है, लंबे-लंबे सफ़र तय करता है, और रेगिस्तान की कठिन परिस्थितियों में भी इंसान का साथी बनता है। उसकी पैदाइश, उसकी तासीर, उसकी ताबेदारी — यह सब कुछ अल्लाह की क़ुदरत की निशानियाँ हैं।

अगर इंसान ज़रा ग़ौर करे तो समझ सकता है कि जिस अल्लाह ने ऊँट को इतनी हिकमत और तदबीर से पैदा किया, क्या वह मुर्दों को दोबारा ज़िंदा करने पर क़ादिर नहीं? यही सवाल आगे की आयात में आसमान, पहाड़ों और ज़मीन की तरफ़ भी किया गया है — ताकि इंसान अपने रब की क़ुदरत पर ईमान लाए और आख़िरत के दिन को यक़ीन करे।

प्यारे इस्लामी भाइयो और बहनो! यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपने आस-पास की मख़लूक़ात पर ग़ौर करें। ऊँट, आसमान, पहाड़, ज़मीन — हर चीज़ में अल्लाह की बड़ाई और क़ुदरत की निशानियाँ मौजूद हैं। जो इंसान इन निशानियों पर दिल से ग़ौर करे, उसका ईमान मज़बूत होता है और वह अपने रब की तरफ़ झुकता है। अल्लाह तआला हमें हिदायत दे और हमारे दिलों को अपनी मख़लूक़ात पर सोचने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 15-19 — अल-ग़ाशिया

15وَنَمَارِقُ مَصْفُوفَةٌ
और गाँव तकिए क़तार की क़तार लगे होंगे
16وَزَرَابِيُّ مَبْثُوثَةٌ
और नफ़ीस मसनदे बिछी हुई
17أَفَلَا يَنظُرُونَ إِلَى الْإِبِلِ كَيْفَ خُلِقَتْ
तो क्या ये लोग ऊँट की तरह ग़ौर नहीं करते कि कैसा अजीब पैदा किया गया है
18وَإِلَى السَّمَاءِ كَيْفَ رُفِعَتْ
और आसमान की तरफ कि क्या बुलन्द बनाया गया है
19وَإِلَى الْجِبَالِ كَيْفَ نُصِبَتْ
और पहाड़ों की तरफ़ कि किस तरह खड़े किए गए हैं
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अनुवाद — अल-ग़ाशिया 17

सूरा अल-ग़ाशिया आयत 17 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो क्या ये लोग ऊँट की तरह ग़ौर नहीं करते…

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Tuesday, August 18, 2026

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