अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- بِمُصَيْطِرٍ: अर्थात कोई ऐसा व्यक्ति जो तुम पर उन्हें नियंत्रित करने, बलपूर्वक ईमान लाने पर मजबूर करने, या उनके कर्मों का हिसाब लेने के लिए नियुक्त किया गया हो।
तफसीर:
ऐ नबी! आप उन लोगों को नसीहत करते रहिए जो आपके संदेश से मुँह मोड़ते हैं, और उनके इनकार पर दुखी न हों। आपका काम केवल उन्हें सत्य का उपदेश देना और सीधा रास्ता दिखाना है। आप उन पर कोई अधिकार नहीं रखते कि उन्हें ज़बरदस्ती ईमान लाने पर मजबूर करें। ईमान दिल की चीज़ है, जो केवल अल्लाह की मर्ज़ी से आता है। आपकी ज़िम्मेदारी सिर्फ संदेश पहुँचाना है, और उनका हिसाब अल्लाह के सुपुर्द है।
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम में किसी को धर्म स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं किया जाता। हमारा कर्तव्य है कि हम अच्छे आचरण और प्रभावशाली उपदेश के माध्यम से लोगों को सत्य की ओर बुलाएँ, और परिणाम अल्लाह पर छोड़ दें। यही वह सुंदर शिक्षा है जो इस्लाम को एक शांतिपूर्ण और तर्कसंगत धर्म बनाती है। जब हम यह समझ जाते हैं कि हमारा काम केवल संदेश पहुँचाना है, तो हमारे दिल से निराशा और क्रोध समाप्त हो जाता है, और हम अल्लाह की रहमत पर भरोसा करके अपने दायित्व का पालन करते हैं। याद रखिए, अल्लाह ने आपको एक रहमत बनाकर भेजा है, और आपका उज्ज्वल उदाहरण ही लोगों के दिलों को छूने का सबसे बड़ा माध्यम है।
📜 आयत 20-24 — अल-ग़ाशिया
अनुवाद — अल-ग़ाशिया 22
सूरा अल-ग़ाशिया आयत 22 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तुम कुछ उन पर दरोग़ा तो हो नहींसूरा आयत 22/26 — अल-ग़ाशिया الغاشية (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-ग़ाशिया सुनें, अल-ग़ाशिया अनुवाद, अल-ग़ाशिया mp3, अल-ग़ाशिया pdf. आयत 20–24. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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