अल-ग़ाशिया · 21/26
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-ग़ाशिया
فَذَكِّرْ إِنَّمَا أَنتَ مُذَكِّرٌ ۝٢١
Fazakkir innama anta Muzakkir
📖 हिंदी अर्थ
तो तुम नसीहत करते रहो तुम तो बस नसीहत करने वाले हो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَذَكِّرْ – तो आप नसीहत दीजिए, याद दिलाइए
  • إِنَّمَا – केवल, सिर्फ
  • مُذَكِّرٌ – नसीहत करने वाला, याद दिलाने वाला

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप इन लोगों को नसीहत दीजिए और उन्हें अल्लाह के अज़ाब से डराइए। आपका काम केवल यही है कि आप लोगों को सच्चाई याद दिलाएँ और उन्हें सीधे रास्ते की ओर बुलाएँ। आप पर यह ज़िम्मेदारी नहीं है कि लोगों को ज़बरदस्ती ईमान लाने पर मजबूर करें।

याद रखिए, आप केवल एक मुबल्लिग़ (संदेश पहुँचाने वाले) और नसीहत करने वाले हैं। हिदायत देना और दिलों को बदलना केवल अल्लाह के हाथ में है। आपका काम पैग़ाम पहुँचाना है, और यह आपने बखूबी अंजाम दिया।

इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी को तसल्ली दे रहे हैं कि अगर लोग आपकी बात न मानें तो आप दुखी न हों, क्योंकि आपकी ज़िम्मेदारी सिर्फ तब्लीग़ (संदेश पहुँचाना) है। यह हमारे लिए भी एक बड़ा सबक़ है कि हम दूसरों को अच्छी बात समझाएँ, लेकिन नतीजा अल्लाह पर छोड़ दें।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि दीन के काम में निराशा नहीं होनी चाहिए। हमें अपना फर्ज़ निभाना है — अच्छाई की तरफ बुलाना, नसीहत करना, और बाकी अल्लाह पर छोड़ देना। अल्लाह तआला किसी को भी हिदायत देना चाहे तो उसका दिल खोल देता है। हमें सिर्फ सच्चाई पेश करनी है, प्यार और हिकमत से, और फिर भरोसा अल्लाह पर रखना है। यही नबी की सुन्नत है और यही हमारी कामयाबी का रास्ता है।



📜 आयत 19-23 — सूरा अल-ग़ाशिया

19وَإِلَى الْجِبَالِ كَيْفَ نُصِبَتْ
और पहाड़ों की तरफ़ कि किस तरह खड़े किए गए हैं
20وَإِلَى الْأَرْضِ كَيْفَ سُطِحَتْ
और ज़मीन की तरफ कि किस तरह बिछायी गयी है
21فَذَكِّرْ إِنَّمَا أَنتَ مُذَكِّرٌ
तो तुम नसीहत करते रहो तुम तो बस नसीहत करने वाले हो
22لَّسْتَ عَلَيْهِم بِمُصَيْطِرٍ
तुम कुछ उन पर दरोग़ा तो हो नहीं
23إِلَّا مَن تَوَلَّىٰ وَكَفَرَ
हाँ जिसने मुँह फेर लिया
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21आयत

अनुवाद — अल-ग़ाशिया 21

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Saturday, October 3, 2026

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