Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَا تَقُمْ فِيهِ أَبَدًا: तुम उसमें कभी खड़े मत होओ (अर्थात् वहाँ नमाज़ के लिए मत जाओ)।
- أُسِّسَ: नींव रखी गई।
- التَّقْوَى: परहेज़गारी, अल्लाह का डर और उसकी आज्ञा का पालन।
- أَحَقّ: अधिक योग्य और उचित।
- يَتَطَهَّرُوا: पवित्रता प्राप्त करें (शारीरिक और आध्यात्मिक रूप से)।
- الْمُطَّهِّرِينَ: पूर्ण रूप से पवित्र रहने वाले।
तफ़सीर (व्याख्या):
हे नबी! उस मस्जिद (मस्जिद-ए-ज़िरार) में तुम कभी खड़े मत होना, क्योंकि वह मस्जिद नुक़्सान पहुँचाने, कुफ़्र फैलाने और मुसलमानों में फूट डालने के लिए बनाई गई थी। इसके विपरीत, वह मस्जिद जिसकी नींव पहले ही दिन से अल्लाह के डर और उसकी रज़ा पर रखी गई है — अर्थात् मस्जिद-ए-क़ुबा (और उसी तरह मस्जिद-ए-नबवी) — वह इस बात की अधिक हक़दार है कि तुम उसमें खड़े होकर नमाज़ पढ़ो। उस मस्जिद में ऐसे लोग हैं जो पवित्रता को बहुत पसंद करते हैं — वे पानी से नापाकी और गंदगी को दूर करते हैं, और अपने गुनाहों से तौबा करके और अल्लाह से माफ़ी माँगकर अपने दिलों को भी पाक रखते हैं। अल्लाह ऐसे ही पवित्र रहने वालों से प्रेम करता है, जो बाहरी और भीतरी दोनों तरह की पवित्रता अपनाते हैं।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- पवित्रता अल्लाह को बहुत पसंद है — यह आयत बताती है कि अल्लाह उन लोगों से मुहब्बत करता है जो पाकी और सफ़ाई का ख़याल रखते हैं, चाहे वह शरीर की सफ़ाई हो या दिल की। इसलिए हमें हमेशा पाकीज़गी अपनानी चाहिए।
- नीयत की पाकीज़गी सबसे बड़ी पूँजी है — मस्जिद-ए-ज़िरार और मस्जिद-ए-क़ुबा का फ़र्क़ यही है कि एक की नींव नफ़रत और फूट पर थी, और दूसरे की नींव तक़वा और इख़लास पर। यह हमें सिखाता है कि हर अच्छे काम की कामयाबी उसकी नीयत पर निर्भर है।
- तौबा और माफ़ी का दरवाज़ा हमेशा खुला है — आयत में "तहारत" का मतलब सिर्फ़ पानी से सफ़ाई नहीं, बल्कि गुनाहों से तौबा करना भी है। यह हमें उम्मीद देता है कि चाहे हमसे कितनी भी ग़लतियाँ हुई हों, अल्लाह की रहमत से हम पाक हो सकते हैं।
- बुराई से दूर रहना और अच्छाई को अपनाना — यह आयत हमें सिखाती है कि जिस चीज़ में फ़साद और नुक़्सान हो, उससे किनारा करना चाहिए, और जो चीज़ अल्लाह की रज़ा पर हो, उसी को अपनाना चाहिए। यही मोमिन की पहचान है।
📜 आयत 106-110 — सूरा अत-तौबा
अनुवाद — अत-तौबा 108
सूरा अत-तौबा आयत 108 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये लोग यक़ीनन झूठे है (ऐ रसूल) तुम इस (मस्जिद)…सूरा आयत 108/129 — सूरा अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तौबा सुनें, सूरा अत-तौबा अनुवाद, सूरा अत-तौबा mp3, सूरा अत-तौबा pdf. आयत 106–110. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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