अत-तौबा · 108/129
अनुवाद उच्चारण — अत-तौबा
لَا تَقُمْ فِيهِ أَبَدًا ۚ لَّمَسْجِدٌ أُسِّسَ عَلَى التَّقْوَىٰ مِنْ أَوَّلِ يَوْمٍ أَحَقُّ أَن تَقُومَ فِيهِ ۚ فِيهِ رِجَالٌ يُحِبُّونَ أَن يَتَطَهَّرُوا ۚ وَاللَّهُ يُحِبُّ الْمُطَّهِّرِينَ ۝١٠٨
Laa taqum feehi abadaa; lamasjidun ussisa `alat taqwaa min awwali yawmin ahaqqu an taqooma feeh; feehi rijaaluny yuhibbona ai yatatahharoo, wallaahu yuhibbul mmuttah hireen
📖 हिंदी अर्थ
ये लोग यक़ीनन झूठे है (ऐ रसूल) तुम इस (मस्जिद) में कभी खड़े भी न होना वह मस्जिद जिसकी बुनियाद अव्वल रोज़ से परहेज़गारी पर रखी गई है वह ज़रूर उसकी ज्यादा हक़दार है कि तुम उसमें खडे होकर (नमाज़ पढ़ो क्योंकि) उसमें वह लोग हैं जो पाक व पाकीज़ा रहने को पसन्द करते हैं और ख़ुदा भी पाक व पाकीज़ा रहने वालों को दोस्त रखता है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَا تَقُمْ فِيهِ أَبَدًا: तुम उसमें कभी खड़े मत होओ (अर्थात् वहाँ नमाज़ के लिए मत जाओ)।
  • أُسِّسَ: नींव रखी गई।
  • التَّقْوَى: परहेज़गारी, अल्लाह का डर और उसकी आज्ञा का पालन।
  • أَحَقّ: अधिक योग्य और उचित।
  • يَتَطَهَّرُوا: पवित्रता प्राप्त करें (शारीरिक और आध्यात्मिक रूप से)।
  • الْمُطَّهِّرِينَ: पूर्ण रूप से पवित्र रहने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

हे नबी! उस मस्जिद (मस्जिद-ए-ज़िरार) में तुम कभी खड़े मत होना, क्योंकि वह मस्जिद नुक़्सान पहुँचाने, कुफ़्र फैलाने और मुसलमानों में फूट डालने के लिए बनाई गई थी। इसके विपरीत, वह मस्जिद जिसकी नींव पहले ही दिन से अल्लाह के डर और उसकी रज़ा पर रखी गई है — अर्थात् मस्जिद-ए-क़ुबा (और उसी तरह मस्जिद-ए-नबवी) — वह इस बात की अधिक हक़दार है कि तुम उसमें खड़े होकर नमाज़ पढ़ो। उस मस्जिद में ऐसे लोग हैं जो पवित्रता को बहुत पसंद करते हैं — वे पानी से नापाकी और गंदगी को दूर करते हैं, और अपने गुनाहों से तौबा करके और अल्लाह से माफ़ी माँगकर अपने दिलों को भी पाक रखते हैं। अल्लाह ऐसे ही पवित्र रहने वालों से प्रेम करता है, जो बाहरी और भीतरी दोनों तरह की पवित्रता अपनाते हैं।


फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. पवित्रता अल्लाह को बहुत पसंद है — यह आयत बताती है कि अल्लाह उन लोगों से मुहब्बत करता है जो पाकी और सफ़ाई का ख़याल रखते हैं, चाहे वह शरीर की सफ़ाई हो या दिल की। इसलिए हमें हमेशा पाकीज़गी अपनानी चाहिए।
  2. नीयत की पाकीज़गी सबसे बड़ी पूँजी है — मस्जिद-ए-ज़िरार और मस्जिद-ए-क़ुबा का फ़र्क़ यही है कि एक की नींव नफ़रत और फूट पर थी, और दूसरे की नींव तक़वा और इख़लास पर। यह हमें सिखाता है कि हर अच्छे काम की कामयाबी उसकी नीयत पर निर्भर है।
  3. तौबा और माफ़ी का दरवाज़ा हमेशा खुला है — आयत में "तहारत" का मतलब सिर्फ़ पानी से सफ़ाई नहीं, बल्कि गुनाहों से तौबा करना भी है। यह हमें उम्मीद देता है कि चाहे हमसे कितनी भी ग़लतियाँ हुई हों, अल्लाह की रहमत से हम पाक हो सकते हैं।
  4. बुराई से दूर रहना और अच्छाई को अपनाना — यह आयत हमें सिखाती है कि जिस चीज़ में फ़साद और नुक़्सान हो, उससे किनारा करना चाहिए, और जो चीज़ अल्लाह की रज़ा पर हो, उसी को अपनाना चाहिए। यही मोमिन की पहचान है।


📜 आयत 106-110 — अत-तौबा

106وَآخَرُونَ مُرْجَوْنَ لِأَمْرِ اللَّهِ إِمَّا يُعَذِّبُهُمْ وَإِمَّا يَتُوبُ عَلَيْهِمْ ۗ وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ
और कुछ लोग हैं जो हुक्मे ख़ुदा के उम्मीदवार किए गए हैं (उसको अख्तेयार है) ख्वाह उन पर अज़ाब करे या उन पर मेहरबानी करे और ख़ुदा (तो) बड़ा वाकिफकार हिकमत वाला है
107وَالَّذِينَ اتَّخَذُوا مَسْجِدًا ضِرَارًا وَكُفْرًا وَتَفْرِيقًا بَيْنَ الْمُؤْمِنِينَ وَإِرْصَادًا لِّمَنْ حَارَبَ اللَّهَ وَرَسُولَهُ مِن قَبْلُ ۚ وَلَيَحْلِفُنَّ إِنْ أَرَدْنَا إِلَّا الْحُسْنَىٰ ۖ وَاللَّهُ يَشْهَدُ إِنَّهُمْ لَكَاذِبُونَ
और (वह लोग भी मुनाफिक़ हैं) जिन्होने (मुसलमानों के) नुकसान पहुंचाने और कुफ़्र करने वाले और मोमिनीन के दरमियान तफरक़ा (फूट) डालते और उस शख़्स की घात में बैठने के वास्ते मस्जिद बनाकर खड़ी की है जो ख़ुदा और उसके रसूल से पहले लड़ चुका है (और लुत्फ़ तो ये है कि) ज़रूर क़समें खाएगें कि हमने भलाई के सिवा कुछ और इरादा ही नहीं किया और ख़ुदा ख़ुद गवाही देता है
108لَا تَقُمْ فِيهِ أَبَدًا ۚ لَّمَسْجِدٌ أُسِّسَ عَلَى التَّقْوَىٰ مِنْ أَوَّلِ يَوْمٍ أَحَقُّ أَن تَقُومَ فِيهِ ۚ فِيهِ رِجَالٌ يُحِبُّونَ أَن يَتَطَهَّرُوا ۚ وَاللَّهُ يُحِبُّ الْمُطَّهِّرِينَ
ये लोग यक़ीनन झूठे है (ऐ रसूल) तुम इस (मस्जिद) में कभी खड़े भी न होना वह मस्जिद जिसकी बुनियाद अव्वल रोज़ से परहेज़गारी पर रखी गई है वह ज़रूर उसकी ज्यादा हक़दार है कि तुम उसमें खडे होकर (नमाज़ पढ़ो क्योंकि) उसमें वह लोग हैं जो पाक व पाकीज़ा रहने को पसन्द करते हैं और ख़ुदा भी पाक व पाकीज़ा रहने वालों को दोस्त रखता है
109أَفَمَنْ أَسَّسَ بُنْيَانَهُ عَلَىٰ تَقْوَىٰ مِنَ اللَّهِ وَرِضْوَانٍ خَيْرٌ أَم مَّنْ أَسَّسَ بُنْيَانَهُ عَلَىٰ شَفَا جُرُفٍ هَارٍ فَانْهَارَ بِهِ فِي نَارِ جَهَنَّمَ ۗ وَاللَّهُ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الظَّالِمِينَ
क्या जिस शख़्स ने ख़ुदा के ख़ौफ और ख़ुशनूदी पर अपनी इमारत की बुनियाद डाली हो वह ज्यादा अच्छा है या वह शख़्स जिसने अपनी इमारत की बुनियाद इस बोदे किनारे के लब पर रखी हो जिसमें दरार पड़ चुकी हो और अगर वह चाहता हो फिर उसे ले दे के जहन्नुम की आग में फट पडे और ख़ुदा ज़ालिम लोगों को मंज़िलें मक़सूद तक नहीं पहुंचाया करता
110لَا يَزَالُ بُنْيَانُهُمُ الَّذِي بَنَوْا رِيبَةً فِي قُلُوبِهِمْ إِلَّا أَن تَقَطَّعَ قُلُوبُهُمْ ۗ وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ
(ये इमारत की) बुनियाद जो उन लोगों ने क़ायम की उसके सबब से उनके दिलो में हमेशा धरपकड़ रहेगी यहाँ तक कि उनके दिलों के परख़चे उड़ जाएँ और ख़ुदा तो बड़ा वाक़िफकार हकीम हैं
अत-तौबाकुरान सूची
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अनुवाद — अत-तौबा 108

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Tuesday, August 18, 2026

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