Afaman assasa bunyaa nahoo `alaa taqwaa minal laahi wa ridwaanin khairun am man assasa bunyaanahoo `alaa shafaa jurufin haarin fanhaara bihee fee Naari Jahannnam; wallaahu laa yahdil qawmaz zaalimeen
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
क्या जिस शख़्स ने ख़ुदा के ख़ौफ और ख़ुशनूदी पर अपनी इमारत की बुनियाद डाली हो वह ज्यादा अच्छा है या वह शख़्स जिसने अपनी इमारत की बुनियाद इस बोदे किनारे के लब पर रखी हो जिसमें दरार पड़ चुकी हो और अगर वह चाहता हो फिर उसे ले दे के जहन्नुम की आग में फट पडे और ख़ुदा ज़ालिम लोगों को मंज़िलें मक़सूद तक नहीं पहुंचाया करता
🌐 Additional reference in اردو
🌐 اردو
بھلا جس شخص نے اپنی عمارت کی بنیاد خدا کے خوف اور اس کی رضامندی پر رکھی وہ اچھا ہے یا وہ جس نے اپنی عمارت کی بنیاد گر جانے والی کھائی کے کنارے پر رکھی کہ وہ اس کو دوزخ کی آگ میں لے گری اور خدا ظالموں کو ہدایت نہیں دیتا
अल्लाह तआला इस आयत में दो तरह के लोगों की मिसाल देते हुए पूछते हैं: क्या वह व्यक्ति जिसने अपनी इमारत (यानी अपने दीन और अमल की नींव) अल्लाह के डर और उसकी रज़ा पर रखी, बेहतर है, या वह जिसने अपनी इमारत की नींव किसी ढहने वाली खाई के किनारे पर रखी, जो उसे लेकर जहन्नम की आग में गिर पड़ी? यानी जिसने अपना दीन और अमल ईमान और तक़्वा पर बनाया, उसका निर्माण मज़बूत और क़ायम रहने वाला है। उसकी मिसाल उस घर जैसी है जो पक्की और मज़बूत नींव पर खड़ा हो। इसके विपरीत, जिसने अपना दीन कुफ्र, निफ़ाक़ और बुराई पर बनाया—जैसे मुनाफ़िक़ों ने मस्जिदे-ज़िरार (नुक़सान पहुँचाने वाली मस्जिद) बनाई—उसकी मिसाल उस इमारत जैसी है जो किसी कमज़ोर और ढहने वाली खाई के किनारे पर खड़ी हो। वह इमारत ज़रा सी हलचल से ढह जाती है और अपने बनाने वाले को अपने साथ गिराकर जहन्नम की आग में ले जाती है। अल्लाह तआला ऐसे ज़ालिमों को (जो अपनी हदों से आगे बढ़कर कुफ्र और निफ़ाक़ पर क़ायम रहते हैं) सीधा रास्ता नहीं दिखाता, क्योंकि उन्होंने खुद अपने लिए हलाकत का रास्ता चुना।
फ़ायदे (सबक):
इंसान के हर काम की नींव और बुनियाद सबसे अहम है। अगर नींव ईमान और तक़्वा पर हो, तो पूरा निर्माण मज़बूत और फलदायक होता है, चाहे वह दीन हो या दुनिया का कोई काम।
अल्लाह की रज़ा और उसका डर हर अच्छे काम की कुंजी है। जो काम अल्लाह की रज़ा के लिए किया जाए, वही बरकत वाला और क़ायम रहने वाला है।
नेक नीयत और ख़ालिस इरादे की अहमियत — मस्जिद जैसी पवित्र जगह भी अगर नुक़सान पहुँचाने और फूट डालने की नीयत से बनाई जाए, तो अल्लाह के यहाँ नापसंद है। यह सिखाता है कि हर अमल का दारोमदार नीयत पर है।
अल्लाह ज़ालिमों को हिदायत नहीं देता, यानी जो लोग खुद अपनी ज़ुल्म (कुफ्र, निफ़ाक़, फसाद) पर अड़े रहें, उनके लिए हिदायत का दरवाज़ा बंद हो जाता है। यह हमें सचेत करता है कि हम अपने दिलों को पाक रखें और अल्लाह की नाराज़गी से बचें।
यह आयत मुसलमानों को तरग़ीब देती है कि वे अपने जीवन की हर इमारत — चाहे वह मस्जिद हो, घर हो, या समाज — तक़्वा और अल्लाह की रज़ा पर खड़ी करें, ताकि वह दुनिया और आख़िरत दोनों में सुरक्षित रहे।
क्या जिस शख़्स ने ख़ुदा के ख़ौफ और ख़ुशनूदी पर अपनी इमारत की बुनियाद डाली हो वह ज्यादा अच्छा है या वह शख़्स जिसने अपनी इमारत की बुनियाद इस बोदे किनारे के लब पर रखी हो जिसमें दरार पड़ चुकी हो और अगर वह चाहता हो फिर उसे ले दे के जहन्नुम की आग में फट पडे और ख़ुदा ज़ालिम लोगों को मंज़िलें मक़सूद तक नहीं पहुंचाया करता
और (वह लोग भी मुनाफिक़ हैं) जिन्होने (मुसलमानों के) नुकसान पहुंचाने और कुफ़्र करने वाले और मोमिनीन के दरमियान तफरक़ा (फूट) डालते और उस शख़्स की घात में बैठने के वास्ते मस्जिद बनाकर खड़ी की है जो ख़ुदा और उसके रसूल से पहले लड़ चुका है (और लुत्फ़ तो ये है कि) ज़रूर क़समें खाएगें कि हमने भलाई के सिवा कुछ और इरादा ही नहीं किया और ख़ुदा ख़ुद गवाही देता है
ये लोग यक़ीनन झूठे है (ऐ रसूल) तुम इस (मस्जिद) में कभी खड़े भी न होना वह मस्जिद जिसकी बुनियाद अव्वल रोज़ से परहेज़गारी पर रखी गई है वह ज़रूर उसकी ज्यादा हक़दार है कि तुम उसमें खडे होकर (नमाज़ पढ़ो क्योंकि) उसमें वह लोग हैं जो पाक व पाकीज़ा रहने को पसन्द करते हैं और ख़ुदा भी पाक व पाकीज़ा रहने वालों को दोस्त रखता है
क्या जिस शख़्स ने ख़ुदा के ख़ौफ और ख़ुशनूदी पर अपनी इमारत की बुनियाद डाली हो वह ज्यादा अच्छा है या वह शख़्स जिसने अपनी इमारत की बुनियाद इस बोदे किनारे के लब पर रखी हो जिसमें दरार पड़ चुकी हो और अगर वह चाहता हो फिर उसे ले दे के जहन्नुम की आग में फट पडे और ख़ुदा ज़ालिम लोगों को मंज़िलें मक़सूद तक नहीं पहुंचाया करता
(ये इमारत की) बुनियाद जो उन लोगों ने क़ायम की उसके सबब से उनके दिलो में हमेशा धरपकड़ रहेगी यहाँ तक कि उनके दिलों के परख़चे उड़ जाएँ और ख़ुदा तो बड़ा वाक़िफकार हकीम हैं
इसमें तो शक़ ही नहीं कि ख़ुदा ने मोमिनीन से उनकी जानें और उनके माल इस बात पर ख़रीद लिए हैं कि (उनकी क़ीमत) उनके लिए बेहश्त है (इसी वजह से) ये लोग ख़ुदा की राह में लड़ते हैं तो (कुफ्फ़ार को) मारते हैं और ख़ुद (भी) मारे जाते हैं (ये) पक्का वायदा है (जिसका पूरा करना) ख़ुदा पर लाज़िम है और ऐसा पक्का है कि तौरैत और इन्जील और क़ुरान (सब) में (लिखा हुआ है) और अपने एहद का पूरा करने वाला ख़ुदा से बढ़कर कौन है तुम तो अपनी ख़रीद फरोख्त से जो तुमने ख़ुदा से की है खुशियाँ मनाओ यही तो बड़ी कामयाबी है
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