(ये इमारत की) बुनियाद जो उन लोगों ने क़ायम की उसके सबब से उनके दिलो में हमेशा धरपकड़ रहेगी यहाँ तक कि उनके दिलों के परख़चे उड़ जाएँ और ख़ुदा तो बड़ा वाक़िफकार हकीम हैं
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یہ عمارت جو انہوں نے بنائی ہے ہمیشہ ان کے دلوں میں (موجب) خلجان رہے گی (اور ان کو متردد رکھے گی) مگر یہ کہ ان کے دل پاش پاش ہو جائیں اور خدا جاننے والا اور حکمت والا ہے
(ये इमारत की) बुनियाद जो उन लोगों ने क़ायम की उसके सबब से उनके दिलो में हमेशा धरपकड़ रहेगी यहाँ तक कि उनके दिलों के परख़चे उड़ जाएँ और ख़ुदा तो बड़ा वाक़िफकार हकीम हैं
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
رِيبَةً: संदेह, शक और निफ़ाक़ (मुनाफ़िक़ी)।
تَقَطَّعَ قُلُوبُهُمْ: उनके दिल टुकड़े-टुकड़े हो जाएँ, यानी मौत आ जाए या वे मारे जाएँ।
तफ़सीर (व्याख्या):
मुनाफ़िक़ीन (कपटियों) ने मस्जिद-ए-ज़िरार (नुक़सान पहुँचाने के लिए बनाई गई मस्जिद) बनाई थी, जिसे अल्लाह के नबी ﷺ के आदेश से गिरा दिया गया। यह आयत बताती है कि उनका वह बनाया हुआ ढाँचा भले ही गिरा दिया गया हो, लेकिन उसका शक, संदेह और निफ़ाक़ उनके दिलों में हमेशा के लिए बस गया है। यह रीबा (संदेह) उनके दिलों से तब तक नहीं निकलेगा, जब तक उनके दिल टुकड़े-टुकड़े न हो जाएँ, यानी जब तक वे मौत को न पहुँच जाएँ या तलवार से मार न दिए जाएँ। उन्होंने सोचा था कि यह मस्जिद बनाकर वे अच्छा काम कर रहे हैं, लेकिन जब इसे गिराया गया, तो उनकी निफ़ाक़ और बढ़ गई। अल्लाह उनके दिलों की बात और उनकी नीयत को पूरी तरह जानता है, और वह अपने फ़ैसलों में बेहद हिकमत वाला है। उसने जो हुक्म दिया कि यह मस्जिद गिरा दी जाए, वह पूरी हिकमत पर आधारित था, ताकि इस्लाम और मुसलमानों को नुक़सान से बचाया जा सके।
फ़ायदे (सबक़):
अल्लाह की निगरानी से कोई चीज़ छिपी नहीं है — चाहे लोग कितनी भी चालाकी से काम करें, अल्लाह उनकी नीयत को जानता है और उसका अंजाम सामने लाता है।
नेक काम की आड़ में बुराई करना सबसे बड़ा धोखा है — मुनाफ़िक़ीन ने मस्जिद बनाकर अच्छा काम दिखाया, लेकिन उनका मक़सद नुक़सान पहुँचाना था। इससे सबक़ लेना चाहिए कि हर काम की नीयत साफ़ होनी चाहिए।
जब इंसान निफ़ाक़ और शक में पड़ जाता है, तो उसका दिल सख्त हो जाता है और हिदायत उसे छू नहीं पाती — इसलिए दिल की सफ़ाई और सच्चाई को हमेशा अपनाना चाहिए।
अल्लाह की हिकमत पर भरोसा रखना चाहिए — कभी-कभी जो फ़ैसला हमें समझ नहीं आता, वही इंसान के भले के लिए होता है, जैसे उस मस्जिद का गिराया जाना मुसलमानों के लिए रहमत बना।
यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि अपने दिल को शक, हसद और निफ़ाक़ से पाक रखें, क्योंकि ये चीज़ें इंसान को अल्लाह की रहमत से दूर कर देती हैं और उसे हमेशा बेचैन रखती हैं।
ये लोग यक़ीनन झूठे है (ऐ रसूल) तुम इस (मस्जिद) में कभी खड़े भी न होना वह मस्जिद जिसकी बुनियाद अव्वल रोज़ से परहेज़गारी पर रखी गई है वह ज़रूर उसकी ज्यादा हक़दार है कि तुम उसमें खडे होकर (नमाज़ पढ़ो क्योंकि) उसमें वह लोग हैं जो पाक व पाकीज़ा रहने को पसन्द करते हैं और ख़ुदा भी पाक व पाकीज़ा रहने वालों को दोस्त रखता है
क्या जिस शख़्स ने ख़ुदा के ख़ौफ और ख़ुशनूदी पर अपनी इमारत की बुनियाद डाली हो वह ज्यादा अच्छा है या वह शख़्स जिसने अपनी इमारत की बुनियाद इस बोदे किनारे के लब पर रखी हो जिसमें दरार पड़ चुकी हो और अगर वह चाहता हो फिर उसे ले दे के जहन्नुम की आग में फट पडे और ख़ुदा ज़ालिम लोगों को मंज़िलें मक़सूद तक नहीं पहुंचाया करता
(ये इमारत की) बुनियाद जो उन लोगों ने क़ायम की उसके सबब से उनके दिलो में हमेशा धरपकड़ रहेगी यहाँ तक कि उनके दिलों के परख़चे उड़ जाएँ और ख़ुदा तो बड़ा वाक़िफकार हकीम हैं
इसमें तो शक़ ही नहीं कि ख़ुदा ने मोमिनीन से उनकी जानें और उनके माल इस बात पर ख़रीद लिए हैं कि (उनकी क़ीमत) उनके लिए बेहश्त है (इसी वजह से) ये लोग ख़ुदा की राह में लड़ते हैं तो (कुफ्फ़ार को) मारते हैं और ख़ुद (भी) मारे जाते हैं (ये) पक्का वायदा है (जिसका पूरा करना) ख़ुदा पर लाज़िम है और ऐसा पक्का है कि तौरैत और इन्जील और क़ुरान (सब) में (लिखा हुआ है) और अपने एहद का पूरा करने वाला ख़ुदा से बढ़कर कौन है तुम तो अपनी ख़रीद फरोख्त से जो तुमने ख़ुदा से की है खुशियाँ मनाओ यही तो बड़ी कामयाबी है
(ये लोग) तौबा करने वाले इबादत गुज़ार (ख़ुदा की) हम्दो सना (तारीफ़) करने वाले (उस की राह में) सफर करने वाले रूकूउ करने वाले सजदा करने वाले नेक काम का हुक्म करने वाले और बुरे काम से रोकने वाले और ख़ुदा की (मुक़र्रर की हुई) हदो को निगाह रखने वाले हैं और (ऐ रसूल) उन मोमिनीन को (बेहिश्त की) ख़ुशख़बरी दे दो
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