अल-बलद · 11/20
अनुवाद उच्चारण — अल-बलद
فَلَا اقْتَحَمَ الْعَقَبَةَ ۝١١
Falaq tahamal-`aqabah
📖 हिंदी अर्थ
फिर वह घाटी पर से होकर (क्यों) नहीं गुज़रा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَلَا اقْتَحَمَ – "फलाक्तहम" का अर्थ है कि उसने (कठिनाई को) पार नहीं किया, अर्थात उसने उस कठिन कार्य को अपने ऊपर क्यों नहीं लिया। "इक़्तिहाम" का अर्थ है किसी कठिन काम में जोश और सख्ती से प्रवेश करना।
  • الْعَقَبَةَ – "अक़बा" का अर्थ है कठिन घाटी या रास्ता, जिसे पार करना बहुत मुश्किल हो। यहाँ इससे मुराद वह कठिन काम है जो इंसान को जहन्नुम से बचाकर जन्नत तक पहुँचाता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला इंसान को जागृत कर रहा है कि उसने न तो उस कठिन घाटी को पार किया और न ही उस रास्ते पर चलने की कोशिश की जो उसे सफलता और नजात तक पहुँचाता। यह "अक़बा" (कठिन घाटी) वह रास्ता है जो इंसान को जहन्नुम से जन्नत की ओर ले जाता है, लेकिन यह रास्ता आसान नहीं है—इस पर चलने के लिए अपनी इच्छाओं को कुचलना, माल खर्च करना, और अपने नफ्स से जिहाद करना पड़ता है।

यह आयत उस इंसान पर अफसोस और मलामत का पैगाम देती है जो दुनिया में अपने धन और ताकत पर इतराता है, लेकिन जब उसे उस कठिन रास्ते पर चलने का मौका मिलता है जो उसे अल्लाह की रज़ा और जन्नत तक पहुँचाता है, तो वह पीछे हट जाता है। वह उस घाटी को पार नहीं करता, बल्कि अपने माल और शौहरत के पीछे पड़ा रहता है।

इस आयत में अल्लाह तआला हमें बताना चाहते हैं कि जन्नत का रास्ता आसान नहीं है, बल्कि उसमें कठिनाइयाँ हैं—जैसे भूखे को खाना खिलाना, यतीम की परवरिश करना, मुसीबत में लोगों की मदद करना, और अपने माल को अल्लाह की राह में खर्च करना। ये सारे काम नफ्स पर भारी लगते हैं, इसलिए इन्हें "अक़बा" (कठिन घाटी) कहा गया।

लेकिन जो इंसान इस कठिन रास्ते पर चलता है, वह दुनिया में भी इज़्ज़त पाता है और आख़िरत में भी कामयाब होता है। अल्लाह तआला हमें तौफ़ीक़ दे कि हम इस कठिन घाटी को पार करने की हिम्मत करें, अपने नफ्स को काबू में रखें, और उन अच्छे कामों को करें जो हमें अल्लाह के करीब ले जाएँ। याद रखिए, जन्नत की राह में जो मुश्किलें हैं, वही इसकी क़ीमत हैं—और अल्लाह उन लोगों के साथ है जो सब्र करते हैं और उसकी राह में कठिनाइयाँ उठाते हैं।



📜 आयत 9-13 — अल-बलद

9وَلِسَانًا وَشَفَتَيْنِ
और दोनों लब नहीं दिए (ज़रूर दिए)
10وَهَدَيْنَاهُ النَّجْدَيْنِ
और उसको (अच्छी बुरी) दोनों राहें भी दिखा दीं
11فَلَا اقْتَحَمَ الْعَقَبَةَ
फिर वह घाटी पर से होकर (क्यों) नहीं गुज़रा
12وَمَا أَدْرَاكَ مَا الْعَقَبَةُ
और तुमको क्या मालूम कि घाटी क्या है
13فَكُّ رَقَبَةٍ
किसी (की) गर्दन का (गुलामी या कर्ज से) छुड़ाना
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अनुवाद — अल-बलद 11

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Tuesday, August 18, 2026

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