Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الحَقّ (अल-हक़): सत्य, यहाँ अर्थ है क़ुरआन और इस्लाम की शिक्षाएँ।
- اهْتَدَى (इह्तदा): सीधे मार्ग पर चलना, हिदायत पाना।
- ضَلَّ (ज़ल्ल): गुमराह होना, सत्य से भटक जाना।
- وَكِيل (वकील): संरक्षक, निरीक्षक, जो किसी के कर्मों का हिसाब रखे या उसे मजबूर करे।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप इन लोगों से कह दीजिए: "ऐ सभी लोगों! तुम्हारे रब की ओर से तुम्हारे पास सत्य आ चुका है — यह क़ुरआन और रिसालत (पैग़म्बरी) जो सत्य और हिदायत का स्पष्ट प्रमाण है। अब किसी के पास कोई बहाना या हुज्जत शेष नहीं बची।"
इसके बाद जो कोई इस सत्य को स्वीकार करके हिदायत का मार्ग अपनाएगा, उसकी इस हिदायत का पूरा लाभ उसी को मिलेगा। क्योंकि अल्लाह तआला अपने बंदों की इबादत से बेनियाज़ है, उसे किसी की आज्ञाकारिता से कोई लाभ नहीं पहुँचता। और जो कोई इस सत्य को ठुकराकर गुमराही का रास्ता चुनेगा, उसके गुमराह होने का वबाल (बुरा परिणाम) भी उसी की अपनी जान पर पड़ेगा। अल्लाह को उसके कुफ्र से कोई हानि नहीं पहुँचती।
और (ऐ नबी!) आप कह दीजिए: "मैं तुम पर कोई संरक्षक या निरीक्षक नहीं हूँ जो तुम्हारे कर्मों को गिनता रहूँ या तुम्हें जबरन ईमान पर ला सकूँ। मेरा काम केवल अल्लाह का संदेश पहुँचाना है। हिसाब लेना और बदला देना अल्लाह के हाथ में है।"
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- सत्य का स्पष्टीकरण: यह आयत बताती है कि अल्लाह ने अपनी ओर से सत्य को स्पष्ट कर दिया है, अब किसी के लिए यह कहने का अवसर नहीं कि हमें पता ही नहीं था। यह अल्लाह की ओर से पूर्ण न्याय है।
- हिदायत का लाभ स्वयं को: जब हम सत्य को अपनाते हैं, तो इसका सबसे बड़ा लाभ हमारी अपनी आत्मा को मिलता है — आत्मिक शांति, सही रास्ता और अल्लाह की रज़ा। यह हमें अच्छे कर्मों के लिए प्रेरित करता है।
- गुमराही का नुक़सान स्वयं को: गुमराही और बुराई का नुक़सान भी उसी व्यक्ति को होता है जो उसे चुनता है। यह हमें बुराई से बचने की प्रेरणा देता है और यह समझाता है कि अल्लाह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता।
- नबी की ज़िम्मेदारी का स्पष्टीकरण: यह आयत हमें सिखाती है कि पैग़म्बरों का काम केवल संदेश पहुँचाना है, जबरदस्ती ईमान लाना नहीं। यह इस्लाम की सहिष्णुता और मानव स्वतंत्रता के प्रति सम्मान को दर्शाता है।
- अल्लाह पर भरोसा: यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपना काम करना चाहिए — सत्य का प्रचार करना, अच्छाई की ओर बुलाना — और परिणाम अल्लाह पर छोड़ देना चाहिए। यह हमें निराशा से बचाता है और धैर्य सिखाता है।
- जिम्मेदारी का एहसास: हर व्यक्ति अपने कर्मों का जिम्मेदार स्वयं है। यह हमें सचेत करता है कि हम अपने जीवन के हर फैसले में सोच-समझकर कदम उठाएँ, क्योंकि परिणाम हमारे अपने होंगे।
📜 आयत 106-109 — सूरा यूनुस
अनुवाद — यूनुस 108
सूरा यूनुस आयत 108 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ लोगों तुम्हारे परवरदिगार…सूरा आयत 108/109 — सूरा यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूनुस सुनें, सूरा यूनुस अनुवाद, सूरा यूनुस mp3, सूरा यूनुस pdf. आयत 106–109. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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