यूनुस · 109/109
अनुवाद उच्चारण — सूरा यूनुस
وَاتَّبِعْ مَا يُوحَىٰ إِلَيْكَ وَاصْبِرْ حَتَّىٰ يَحْكُمَ اللَّهُ ۚ وَهُوَ خَيْرُ الْحَاكِمِينَ ۝١٠٩
Qattabi` maa yoohaaa ilaika wasbir hattaa yahkumal laah; wa Huwa khairul haakimeen
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) तुम्हारे पास जो 'वही' भेजी जाती है तुम बस उसी की पैरवी करो और सब्र करो यहाँ तक कि ख़ुदा तुम्हारे और काफिरों के दरमियान फैसला फरमाए और वह तो तमाम फैसला करने वालों से बेहतर है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • وَاتَّبِعْ: तुम अनुसरण करो और उस पर अमल करो।
  • مَا يُوحَىٰ إِلَيْكَ: जो कुछ तुम्हारी ओर वह्य (प्रकाशना) की जाती है।
  • وَاصْبِرْ: धैर्य रखो और सहनशीलता अपनाओ।
  • حَتَّىٰ يَحْكُمَ اللَّهُ: जब तक अल्लाह अपना फैसला न कर दे।
  • خَيْرُ الْحَاكِمِينَ: सबसे उत्तम फैसला करने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

हे नबी! तुम उस वह्य (प्रकाशना) का पूर्ण रूप से अनुसरण करो जो तुम्हारे रब की ओर से तुम्हारे पास भेजी जा रही है, और उस पर अमल करते रहो। साथ ही, धैर्य और सब्र को अपनाओ—अल्लाह की आज्ञाओं का पालन करने में, उसकी मनाही से बचने में, और उन लोगों की ओर से होने वाले कष्टों को सहने में जो तुम्हारे विरोध में हैं और तुम्हारे संदेश को झुठला रहे हैं। यह सब्र तब तक जारी रखो जब तक अल्लाह अपना फैसला न कर ले—चाहे वह फैसला दुनिया में तुम्हारी मदद और विजय के रूप में हो, या काफिरों के लिए आख़िरत की यातना के रूप में, या जिहाद के आदेश के रूप में। अल्लाह ही सबसे उत्तम फैसला करने वाला है, क्योंकि उसका फैसला पूर्ण न्याय पर आधारित होता है—उसमें किसी प्रकार का कोई अन्याय या पक्षपात नहीं होता। वह हर मामले में सच्चाई और न्याय के साथ फैसला करता है।


फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. वह्य का अनुसरण ही सफलता की कुंजी है — जब इंसान अल्लाह की भेजी हुई शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाता है, तो वह सीधे रास्ते पर चलता है और उसका दिल सुकून पाता है।
  2. सब्र (धैर्य) एक महान गुण है — मुसीबतों और कष्टों के समय धैर्य रखना ईमान की निशानी है। अल्लाह उन्हीं को सफलता देता है जो सब्र करते हैं।
  3. अल्लाह का फैसला सबसे उत्तम होता है — जब हम अपने मामलों को अल्लाह पर छोड़ देते हैं और उसके फैसले पर संतुष्ट रहते हैं, तो हमें मानसिक शांति मिलती है, क्योंकि अल्लाह हर हाल में हमारे लिए भलाई ही चाहता है।
  4. नबी की ज़िंदगी हमारे लिए नमूना है — यह आयत हमें सिखाती है कि जिस तरह नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने कष्टों के बावजूद धैर्य और दृढ़ता से अपना काम जारी रखा, उसी तरह हमें भी अपने जीवन में सच्चाई पर डटे रहना चाहिए।
  5. न्याय का महत्व — अल्लाह सबसे उत्तम न्याय करने वाला है, इसलिए हमें भी अपने जीवन में न्याय को अपनाना चाहिए और किसी के साथ अन्याय नहीं करना चाहिए।


📜 आयत 107-109 — सूरा यूनुस

107وَإِن يَمْسَسْكَ اللَّهُ بِضُرٍّ فَلَا كَاشِفَ لَهُ إِلَّا هُوَ ۖ وَإِن يُرِدْكَ بِخَيْرٍ فَلَا رَادَّ لِفَضْلِهِ ۚ يُصِيبُ بِهِ مَن يَشَاءُ مِنْ عِبَادِهِ ۚ وَهُوَ الْغَفُورُ الرَّحِيمُ
और (याद रखो कि) अगर ख़ुदा की तरफ से तुम्हें कोई बुराई छू भी गई तो फिर उसके सिवा कोई उसका दफा करने वाला नहीं होगा और अगर तुम्हारे साथ भलाई का इरादा करे तो फिर उसके फज़ल व करम का लपेटने वाला भी कोई नहीं वह अपने बन्दों में से जिसको चाहे फायदा पहुँचाएँ और वह बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
108قُلْ يَا أَيُّهَا النَّاسُ قَدْ جَاءَكُمُ الْحَقُّ مِن رَّبِّكُمْ ۖ فَمَنِ اهْتَدَىٰ فَإِنَّمَا يَهْتَدِي لِنَفْسِهِ ۖ وَمَن ضَلَّ فَإِنَّمَا يَضِلُّ عَلَيْهَا ۖ وَمَا أَنَا عَلَيْكُم بِوَكِيلٍ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ लोगों तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम्हारे पास हक़ (क़ुरान) आ चुका फिर जो शख़्स सीधी राह पर चलेगा तो वह सिर्फ अपने ही दम के लिए हिदायत एख्तेयार करेगा और जो गुमराही एख्तेयार करेगा वह तो भटक कर कुछ अपना ही खोएगा और मैं कुछ तुम्हारा ज़िम्मेदार तो हूँ नहीं
109وَاتَّبِعْ مَا يُوحَىٰ إِلَيْكَ وَاصْبِرْ حَتَّىٰ يَحْكُمَ اللَّهُ ۚ وَهُوَ خَيْرُ الْحَاكِمِينَ
और (ऐ रसूल) तुम्हारे पास जो 'वही' भेजी जाती है तुम बस उसी की पैरवी करो और सब्र करो यहाँ तक कि ख़ुदा तुम्हारे और काफिरों के दरमियान फैसला फरमाए और वह तो तमाम फैसला करने वालों से बेहतर है
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अनुवाद — यूनुस 109

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Saturday, October 3, 2026

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