Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- دَعْوَاهُمْ: उनका पुकारना, उनकी दुआ या प्रार्थना।
- سُبْحَانَكَ: तेरी पवित्रता का गुणगान, तू हर ऐब और कमी से पाक है।
- تَحِيَّتُهُمْ: उनका अभिवादन, एक-दूसरे को सलाम करना।
- آخِرُ دَعْوَاهُمْ: उनकी दुआ का अंतिम शब्द या आख़िरी पुकार।
विस्तृत व्याख्या:
अल्लाह तआला इस आयत में जन्नत के लोगों की हालत का वर्णन कर रहे हैं कि जब वे जन्नत में दाखिल होंगे, तो उनकी ज़ुबान पर जो पहला कलाम आएगा, वह "سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ" (ऐ अल्लाह! तू पाक है) होगा। यानी वे अल्लाह की तारीफ और उसकी पवित्रता का इज़हार करेंगे, क्योंकि जन्नत की नेमतें देखकर उनका दिल अल्लाह की महानता और पाकी के एहसास से भर जाएगा। यह उनका दुआ करने का तरीका होगा — तारीफ और तस्बीह के साथ।
फिर अल्लाह फ़रमाता है कि उनका आपसी अभिवादन "सलाम" होगा। यानी जब वे एक-दूसरे से मिलेंगे, तो एक-दूसरे को "सलाम" कहेंगे, और अल्लाह की तरफ से भी उनके लिए सलामती और शांति का पैग़ाम होगा। यह सलाम उनके लिए अम्न, सुकून और हर बुराई से सुरक्षा की निशानी है।
और उनकी दुआ का आख़िरी कलाम "अल्हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन" होगा। यानी जब वे जन्नत की नेमतों का पूरा आनंद ले चुकेंगे और हर लज़्ज़त का मज़ा चख चुकेंगे, तो उनकी ज़ुबान से निकलेगा: "सारी तारीफ़ अल्लाह के लिए है, जो सारे जहानों का पालनहार है।" यानी उनकी ज़िंदगी का आग़ाज़ भी अल्लाह की तारीफ से होगा और अंजाम भी अल्लाह की हम्द से। वे हर हाल में अल्लाह का शुक्र अदा करते रहेंगे।
महत्वपूर्ण शिक्षाएँ और फ़ायदे:
- जन्नत की ज़िंदगी भी अल्लाह की याद और तारीफ से भरी होगी — यह दिखाता है कि अल्लाह की याद ही असली सुकून और खुशी का ज़रिया है।
- मोमिन की ज़ुबान पर हमेशा अल्लाह की तस्बीह और हम्द होनी चाहिए, चाहे वह दुनिया में हो या आख़िरत में — यह उसकी पहचान है।
- सलाम करना इस्लामी तहज़ीब का हिस्सा है और जन्नत में भी यही अभिवादन होगा — इसलिए हमें दुनिया में भी सलाम को आम करना चाहिए।
- यह आयत हमें सिखाती है कि हर नेमत के लिए अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए, और हमारी ज़ुबान का इस्तेमाल अच्छे कलाम, तारीफ और दुआ में होना चाहिए।
- जन्नत की यह तस्वीर हमें अमल की तरफ राग़िब करती है कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक बनाएँ, ताकि हम भी उस मुक़ाम तक पहुँच सकें जहाँ सिर्फ़ सलाम, सुकून और अल्लाह की हम्द हो।
📜 आयत 8-12 — सूरा यूनुस
अनुवाद — यूनुस 10
सूरा यूनुस आयत 10 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उन बाग़ों में उन लोगों का बस ये कौल होगा…सूरा आयत 10/109 — सूरा यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूनुस सुनें, सूरा यूनुस अनुवाद, सूरा यूनुस mp3, सूरा यूनुस pdf. आयत 8–12. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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