यूनुस · 87/109
अनुवाद उच्चारण — यूनुस
وَأَوْحَيْنَا إِلَىٰ مُوسَىٰ وَأَخِيهِ أَن تَبَوَّءَا لِقَوْمِكُمَا بِمِصْرَ بُيُوتًا وَاجْعَلُوا بُيُوتَكُمْ قِبْلَةً وَأَقِيمُوا الصَّلَاةَ ۗ وَبَشِّرِ الْمُؤْمِنِينَ ۝٨٧
Wa awhainaaa ilaa Moosaa wa akheehi an tabaw wa aa liqawmikuma bi Misra bu yootanw waj`aloo bu yootakum qiblatanw wa aqeemus Salaah; wa bashshiril mu`mineen
📖 हिंदी अर्थ
और हमने मूसा और उनके भाई (हारुन) के पास 'वही' भेजी कि मिस्र में अपनी क़ौम के (रहने सहने के) लिए घर बना डालो और अपने अपने घरों ही को मस्जिदें क़रार दे लो और पाबन्दी से नमाज़ पढ़ों और मोमिनीन को (नजात का) खुशख़बरी दे दो
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • تَبَوَّءَا: अर्थात दोनों (मूसा और हारून) अपने लिए और अपनी क़ौम के लिए घर ठहराएँ और चुनें।
  • قِبْلَةً: यहाँ इसका अर्थ है ऐसे घर जो नमाज़ के लिए क़िबला (मस्जिद) बन जाएँ, यानी इबादत की जगह।
  • أَقِيمُوا الصَّلَاةَ: नमाज़ को पूरे अदब और उसके नियमों के साथ, उसके निर्धारित समय पर अदा करो।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने हज़रत मूसा और उनके भाई हज़रत हारून (अलैहिमुस्सलाम) की ओर वह्य भेजी कि तुम दोनों मिस्र में अपनी क़ौम (बनी इसराईल) के लिए ऐसे घर तैयार करो जो उनके लिए सुरक्षित रहने की जगह हों और साथ ही इबादत का केंद्र बनें। उन्हें यह भी निर्देश दिया गया कि इन घरों को क़िबला (यानी मस्जिद और नमाज़ की जगह) बना लो, क्योंकि फ़िरऔन ने बनी इसराईल की इबादतगाहों को तबाह कर दिया था और उन्हें खुले तौर पर अपने दीन पर अमल करने से रोक दिया था। इसलिए उन्हें हुक्म दिया गया कि वे अपने घरों में ही छिपकर नमाज़ अदा करें। साथ ही अल्लाह ने उन्हें नमाज़ को पूरी तरह क़ायम करने का आदेश दिया। फिर अल्लाह ने हज़रत मूसा को यह खुशखबरी सुनाने को कहा कि जो लोग ईमान लाए हैं और अल्लाह के आदेशों पर अमल कर रहे हैं, उन्हें अल्लाह की तरफ से नस्र (मदद), फ़तह (विजय) और दुनिया व आख़िरत की भलाई ज़रूर मिलेगी, और उनका दुश्मन (फ़िरऔन) तबाह होगा।

फ़ायदे:

  1. मुसीबत और सख्ती के वक़्त में भी अल्लाह की इबादत को नहीं छोड़ना चाहिए, बल्कि हालात के मुताबिक उसे अदा करने का तरीक़ा अपनाना चाहिए। यही सब्र और अल्लाह पर भरोसे की निशानी है।
  2. अल्लाह अपने नबियों और उनके साथियों को हर मुश्किल में रास्ता दिखाता है और उनके लिए नस्र का ज़रिया बनाता है, बशर्ते वे उसके हुक्म की तामील करें।
  3. नमाज़ की पाबंदी और उसे क़ायम करना हर हाल में ज़रूरी है — चाहे खुला अमल मुमकिन हो या छिपकर करना पड़े। यह दीन की बुनियाद है।
  4. मोमिनों के लिए अल्लाह की तरफ से खुशखबरी है कि उनका अंजाम बेहतर होगा, भले ही वे अभी कमज़ोर और मुसीबत में हों। यह ईमान वालों के दिलों को मज़बूती और उम्मीद देता है।
  5. घर को इबादत की जगह बनाना (यानी घर में नमाज़ पढ़ना और क़ुरआन की तिलावत करना) घर को रहमत और बरकत से भर देता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 85-89 — यूनुस

85فَقَالُوا عَلَى اللَّهِ تَوَكَّلْنَا رَبَّنَا لَا تَجْعَلْنَا فِتْنَةً لِّلْقَوْمِ الظَّالِمِينَ
उस पर उन लोगों ने अर्ज़ की हमने तो ख़ुदा ही पर भरोसा कर लिया है और दुआ की कि ऐ हमारे पालने वाले तू हमें ज़ालिम लोगों का (ज़रिया) इम्तिहान न बना
86وَنَجِّنَا بِرَحْمَتِكَ مِنَ الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ
और अपनी रहमत से हमें इन काफ़िर लोगों (के नीचे) से नजात दे
87وَأَوْحَيْنَا إِلَىٰ مُوسَىٰ وَأَخِيهِ أَن تَبَوَّءَا لِقَوْمِكُمَا بِمِصْرَ بُيُوتًا وَاجْعَلُوا بُيُوتَكُمْ قِبْلَةً وَأَقِيمُوا الصَّلَاةَ ۗ وَبَشِّرِ الْمُؤْمِنِينَ
और हमने मूसा और उनके भाई (हारुन) के पास 'वही' भेजी कि मिस्र में अपनी क़ौम के (रहने सहने के) लिए घर बना डालो और अपने अपने घरों ही को मस्जिदें क़रार दे लो और पाबन्दी से नमाज़ पढ़ों और मोमिनीन को (नजात का) खुशख़बरी दे दो
88وَقَالَ مُوسَىٰ رَبَّنَا إِنَّكَ آتَيْتَ فِرْعَوْنَ وَمَلَأَهُ زِينَةً وَأَمْوَالًا فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا رَبَّنَا لِيُضِلُّوا عَن سَبِيلِكَ ۖ رَبَّنَا اطْمِسْ عَلَىٰ أَمْوَالِهِمْ وَاشْدُدْ عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ فَلَا يُؤْمِنُوا حَتَّىٰ يَرَوُا الْعَذَابَ الْأَلِيمَ
और मूसा ने अर्ज़ की ऐ हमारे पालने वाले तूने फिरऔन और उसके सरदारों को दुनिया की ज़िन्दगी में (बड़ी) आराइश और दौलत दे रखी है (क्या तूने ये सामान इस लिए अता किया है) ताकि ये लोग तेरे रास्तें से लोगों को बहकाएं परवरदिगार तू उनके माल (दौलत) को ग़ारत (बरबाद) कर दे और उनके दिलों पर सख्ती कर (क्योंकि) जब तक ये लोग तकलीफ देह अज़ाब न देख लेगें ईमान न लाएगें
89قَالَ قَدْ أُجِيبَت دَّعْوَتُكُمَا فَاسْتَقِيمَا وَلَا تَتَّبِعَانِّ سَبِيلَ الَّذِينَ لَا يَعْلَمُونَ
(ख़ुदा ने) फरमाया तुम दोनों की दुआ क़ुबूल की गई तो तुम दोनों साबित कदम रहो और नादानों की राह पर न चलो
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अनुवाद — यूनुस 87

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सूरा आयत 87/109 — यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूनुस सुनें, यूनुस अनुवाद, यूनुस mp3, यूनुस pdf. आयत 85–89. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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