Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- زِينَةً: सांसारिक सजावट, ठाठ-बाठ और वैभव।
- مَلَأَهُ: उसके क़ौम के सरदार और बड़े लोग।
- اطْمِسْ: मिटा देना, नष्ट कर देना, बरकत खत्म कर देना।
- اشْدُدْ: सख्त कर देना, बंद कर देना, कठोर बना देना।
- الْعَذَابَ الْأَلِيمَ: दर्दनाक और तकलीफ़देह अज़ाब।
तफ़सीर:
हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने उस वक़्त दुआ की जब फ़िरऔन और उसके सरदारों ने हक़ को नकारने और बनी इसराईल को सताने में हद से तजावुज़ कर दिया था। उन्होंने अल्लाह की बारगाह में अर्ज़ किया: "ऐ हमारे रब! तूने फ़िरऔन और उसके क़ौम के बड़े लोगों को दुनिया की ज़िंदगी में खूब ठाठ-बाठ, सजावट का सामान और ढेरों माल-दौलत अता की है। ये नेअमतें उनके लिए शुक्र का ज़रिया नहीं बनीं, बल्कि उन्होंने इन्हीं चीज़ों का इस्तेमाल लोगों को तेरे रास्ते से भटकाने के लिए किया।"
फिर उन्होंने दुआ की: "ऐ हमारे रब! उनके माल को बरबाद कर दे और उसकी बरकत खत्म कर दे, ताकि वे उससे कोई फायदा न उठा सकें। और उनके दिलों को सख्त कर दे, उन पर मुहर लगा दे, यहाँ तक कि जब तक वे दर्दनाक अज़ाब को अपनी आँखों से न देख लें, ईमान न लाएँ।"
यह दुआ उन्होंने अल्लाह के हुक्म और उसकी मंज़ूरी के तहत की थी, क्योंकि उन्हें यह बात मालूम हो चुकी थी कि इन लोगों की किस्मत में ईमान नहीं है। वे जब अज़ाब देखेंगे तो ईमान लाएँगे, लेकिन उस वक़्त का ईमान क़बूल नहीं होता।
फ़ायदे:
- अल्लाह के नबी भी जब किसी ज़ालिम हुक्मरान के ज़ुल्म से तंग आ जाते हैं, तो उसके खिलाफ़ दुआ-ए-बदल करते हैं। यह सिखाता है कि ज़ुल्म के आगे खामोश न रहा जाए, बल्कि अल्लाह से मदद माँगी जाए।
- दुनिया की दौलत और ठाठ-बाठ अल्लाह की नेअमत है, लेकिन जब इनका इस्तेमाल हक़ के खिलाफ़ और लोगों को गुमराह करने के लिए हो, तो यही नेअमत अज़ाब का सबब बन जाती है।
- अल्लाह की दुआओं में हाजत और लाचारी का इज़हार करना सीख मिलती है। मूसा (अलैहिस्सलाम) ने बार-बार "रब्बना" कहकर अल्लाह से अपनी नज़दीकी जताई।
- यह आयत बताती है कि ईमान का वक़्त मरने से पहले और अज़ाब देखने से पहले है। जब अज़ाब आ जाए, तो ईमान काम नहीं आता।
- अल्लाह के नबी अपनी उम्मत के लिए रहमत हैं, लेकिन ज़ालिमों के लिए उनकी दुआ भी अल्लाह के इंसाफ़ का ज़रिया बनती है। यह हमें सिखाता है कि अल्लाह की राह में जो रुकावटें डालते हैं, उनका अंजाम बुरा होता है।
📜 आयत 86-90 — सूरा यूनुस
अनुवाद — यूनुस 88
सूरा यूनुस आयत 88 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और मूसा ने अर्ज़ की ऐ हमारे पालने वाले तूने…सूरा आयत 88/109 — सूरा यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूनुस सुनें, सूरा यूनुस अनुवाद, सूरा यूनुस mp3, सूरा यूनुस pdf. आयत 86–90. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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