अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- अल-अस्र (العصر): इसका अर्थ है समय, ज़माना, या दिन का वह हिस्सा जो सूर्य के ढलने से लेकर सूर्यास्त तक होता है। कुछ मुफ़स्सिरीन (व्याख्याकारों) ने इसे पूरे दिन और रात के समय (दहर) से भी माना है।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस आयत में समय की क़सम खाई है। समय एक ऐसी नेमत (वरदान) है जिसकी अहमियत को अक्सर इंसान समझ नहीं पाता। अल्लाह ने जब किसी चीज़ की क़सम खाता है, तो इसका मतलब है कि वह चीज़ बहुत बड़ी और अहमियत वाली है। यहाँ अल्लाह ने "अस्र" यानी समय की क़सम खाई है, चाहे वह पूरा ज़माना हो या दिन का आख़िरी हिस्सा (अस्र का वक़्त)।
इस क़सम का मक़सद इंसान को यह बताना है कि समय बहुत कीमती है। इंसान की ज़िंदगी समय ही से बनी है, और हर गुज़रता हुआ लम्हा उसकी उम्र का एक हिस्सा है जो कभी वापस नहीं आता। यह क़सम इस बात पर ज़ोर देती है कि इंसान को अपने समय का सही इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि समय ही वह चीज़ है जिसमें इंसान अपनी कामयाबी या नाकामी तय करता है।
एक अहम बात यह भी है कि अल्लाह ने यहाँ क़सम खाई है, लेकिन इंसान को कभी अल्लाह के सिवा किसी और की क़सम नहीं खानी चाहिए। क़सम सिर्फ़ अल्लाह के नाम की खाई जा सकती है, क्योंकि किसी और की क़सम खाना शिर्क (अल्लाह के साथ किसी को साझीदार बनाना) की तरह है। यह एक तनबीह (चेतावनी) है कि मुसलमान को अपनी ज़ुबान की हिफ़ाज़त करनी चाहिए और सिर्फ़ अल्लाह के नाम की क़सम खानी चाहिए।
इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हमें अपने वक़्त की क़द्र करनी चाहिए। हर पल को अल्लाह की इबादत, अच्छे कामों और दूसरों की मदद में गुज़ारना चाहिए। समय वह नेमत है जो अल्लाह ने हमें दी है, और क़यामत के दिन हमसे इसके बारे में पूछा जाएगा कि हमने इसे किस तरह बिताया। इसलिए, प्यारे भाइयों और बहनों, आओ हम अपने समय को अल्लाह की रज़ा (खुशी) के लिए इस्तेमाल करें, ताकि दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी हासिल कर सकें।
📜 आयत 1-3 — अल-अस्र
अनुवाद — अल-अस्र 1
सूरा अल-अस्र आयत 1 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : नमाज़े अस्र की क़समसूरा आयत 1/3 — अल-अस्र العصر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अस्र सुनें, अल-अस्र अनुवाद, अल-अस्र mp3, अल-अस्र pdf. आयत 1–3. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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