Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- इंसान (الإنسان): यहाँ इससे मुराद आम इंसान है, चाहे वह मर्द हो या औरत।
- ख़ुस्र (خُسْر): घाटा, नुक़सान, हानि, विनाश और कमी। यानी अपने जीवन, समय और पूँजी को बेकार गँवाना।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला ने इस आयत में क़सम खाई है समय (अस्र) की, और फरमाया कि बेशक इंसान बड़े नुक़सान और घाटे में है। यानी हर इंसान, चाहे वह कितना भी अमीर, ताकतवर या इल्म वाला क्यों न हो, अपनी ज़िंदगी के हर पल में नुक़सान उठा रहा है। उसकी उम्र का हर लम्हा, उसकी साँसों का हर दौर, उसकी ताकत का हर ज़र्रा — सब कुछ घटता जा रहा है और वह मौत की तरफ बढ़ता जा रहा है। यह नुक़सान सिर्फ़ दुनिया का नहीं, बल्कि आख़िरत का भी है, क्योंकि जो इंसान अपनी ज़िंदगी अल्लाह की इबादत और उसकी रज़ा में नहीं बिताता, वह असल में अपनी सबसे बड़ी पूँजी — यानी अपनी उम्र — को तबाह कर रहा है।
यह आयत एक चेतावनी है कि इंसान अपनी ज़िंदगी के हर पल को कीमती समझे। वह समय जो बीत गया, वह कभी लौटकर नहीं आएगा। जो जवानी गई, वह वापस नहीं आएगी। जो सेहत गई, वह लौटकर नहीं आएगी। इसलिए हर इंसान को चाहिए कि वह अपने समय को अल्लाह की इबादत, नेक कामों और दूसरों की भलाई में लगाए, क्योंकि यही उसका असली नफ़ा है। जो इंसान इस नुक़सान से बचना चाहता है, उसके लिए अल्लाह ने आगे की आयतों में रास्ता बता दिया है — ईमान, नेक अमल, हक़ की नसीहत और सब्र की ताकीद।
यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपनी ज़िंदगी को बेकार की बातों, गुनाहों और लापरवाही में न गँवाएँ। हर सुबह और हर शाम हमें यह सोचना चाहिए कि हमने आज क्या कमाया? क्या हम अल्लाह के करीब हुए? क्या हमने किसी की मदद की? क्या हमने अपने रब की रज़ा के लिए कुछ किया? अगर हाँ, तो यही हमारा असली नफ़ा है। और अगर नहीं, तो हम उसी नुक़सान में हैं जिसका ज़िक्र अल्लाह ने इस आयत में किया है।
याद रखिए, यह दुनिया की ज़िंदगी बहुत छोटी है, लेकिन इसका हर लम्हा बहुत कीमती है। अल्लाह ने हमें यह ज़िंदगी एक इम्तिहान के लिए दी है। जो इसे अच्छे से गुज़ारेगा, वह कामयाब होगा, और जो इसे ग़फ़लत में गँवाएगा, वह नुक़सान उठाएगा। इसलिए आज ही से अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की राह में लगाने का अज़्म करें, और उस रास्ते पर चलें जो हमें इस नुक़सान से बचाकर हमेशा की कामयाबी तक पहुँचाए।
📜 आयत 1-3 — सूरा अल-अस्र
अनुवाद — अल-अस्र 2
सूरा अल-अस्र आयत 2 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक इन्सान घाटे में हैसूरा आयत 2/3 — सूरा अल-अस्र العصر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अस्र सुनें, सूरा अल-अस्र अनुवाद, सूरा अल-अस्र mp3, सूरा अल-अस्र pdf. आयत 1–3. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 29, 2026
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