Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- آمَنُوا: ईमान लाए, अल्लाह और उसके रसूल पर विश्वास किया।
- عَمِلُوا الصَّالِحَاتِ: अच्छे और नेक कर्म किए।
- تَوَاصَوْا بِالْحَقِّ: एक-दूसरे को सत्य (हक़) की नसीहत की, यानी ईमान, तौहीद और अल्लाह की इबादत पर स्थिर रहने की वसीयत की।
- تَوَاصَوْا بِالصَّبْرِ: एक-दूसरे को सब्र की नसीहत की, यानी आज्ञा पालन (ताअत) पर सब्र, गुनाहों से बचने पर सब्र और मुसीबतों पर सब्र।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला ने उन लोगों को घाटे (नुक़सान) से मुक्ति की शुभ सूचना दी है जो चार गुणों से सुशोभित हों। पहला गुण यह है कि वे अल्लाह पर ईमान लाएँ—उसकी वहदानियत (एकता), उसके रसूलों और अंतिम दिन पर पूर्ण विश्वास रखें। ईमान सिर्फ़ ज़ुबान का दावा नहीं, बल्कि दिल का यक़ीन और अमल की जड़ है। दूसरा गुण यह है कि वे नेक कर्म करें—नमाज़, ज़कात, रोज़ा, हज, सच्चाई, अमानत, हुस्न-ए-अख़्लाक़ और लोगों के साथ भलाई। यह ईमान का फल है, क्योंकि ईमान बिना अमल के अधूरा है।
तीसरा गुण यह है कि वे एक-दूसरे को हक़ (सत्य) की नसीहत करें। यानी वे केवल ख़ुद सत्य पर नहीं रहते, बल्कि दूसरों को भी सत्य की ओर बुलाते हैं, उन्हें तौहीद, ईमान और अल्लाह की इबादत पर स्थिर रहने की वसीयत करते हैं। यह दावत और अम्र बिल-मारूफ़ (भलाई का आदेश) का पहलू है, जो समाज को सुधारता है और लोगों को गुमराही से बचाता है। चौथा गुण यह है कि वे एक-दूसरे को सब्र की नसीहत करें—अल्लाह की आज्ञा पालन पर सब्र, गुनाहों से बचने पर सब्र, और जीवन की कठिनाइयों और मुसीबतों पर सब्र। सब्र ही वह ताक़त है जो इंसान को हक़ पर क़ायम रखती है और उसे निराशा से बचाती है।
ये चार गुण—ईमान, नेक अमल, हक़ की नसीहत और सब्र की नसीहत—मिलकर इंसान को घाटे से बचाते हैं और उसे दुनिया और आख़िरत दोनों में सफलता और नजात (मुक्ति) दिलाते हैं। जो इन गुणों से सुशोभित है, वह कभी घाटे में नहीं रह सकता, चाहे दुनिया की दृष्टि में वह कितना भी कमज़ोर या ग़रीब क्यों न हो। यह आयत हमें सिखाती है कि सच्ची कामयाबी सिर्फ़ दुनिया के माल-दौलत और शोहरत में नहीं, बल्कि अल्लाह की रज़ा और उसके दीन पर स्थिर रहने में है। इसलिए हमें चाहिए कि हम ख़ुद को इन गुणों से सजाएँ और दूसरों को भी इनकी तरफ़ बुलाएँ, ताकि हम सब उस ख़ुशनसीबी को हासिल कर सकें जो अल्लाह ने अपने नेक बंदों के लिए तैयार की है।
📜 आयत 1-3 — सूरा अल-अस्र
अनुवाद — अल-अस्र 3
सूरा अल-अस्र आयत 3 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मगर जो लोग ईमान लाए, और अच्छे काम करते रहे…सूरा आयत 3/3 — सूरा अल-अस्र العصر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अस्र सुनें, सूरा अल-अस्र अनुवाद, सूरा अल-अस्र mp3, सूरा अल-अस्र pdf. आयत 1–3. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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