हूद · 14/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
فَإِلَّمْ يَسْتَجِيبُوا لَكُمْ فَاعْلَمُوا أَنَّمَا أُنزِلَ بِعِلْمِ اللَّهِ وَأَن لَّا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ فَهَلْ أَنتُم مُّسْلِمُونَ ۝١٤
Fa il lam yastajeeboo lakum fa`lamooo annamaaa unzilla bi`ilmil laahi wa al laaa ilaaha illaa Huwa fahal antum muslimoon
📖 हिंदी अर्थ
और ख़ुदा के सिवा जिस जिस के तुम्हे बुलाते बन पड़े मदद के वास्ते बुला लो उस पर अगर वह तुम्हारी न सुने तो समझ ले कि (ये क़ुरान) सिर्फ ख़ुदा के इल्म से नाज़िल किया गया है और ये कि ख़ुदा के सिवा कोई माबूद नहीं तो क्या तुम अब भी इस्लाम लाओगे (या नहीं)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَإِلَّمْ يَسْتَجِيبُوا لَكُمْ: यदि वे (मुशरिकीन) तुम्हारी बात का उत्तर न दें, अर्थात् तुम्हारी चुनौती का सामना न कर सकें।
  • أُنزِلَ بِعِلْمِ اللَّهِ: यह क़ुरआन अल्लाह के ज्ञान के साथ उतारा गया है, अर्थात् अल्लाह इसे जानता हुआ और इसकी सुरक्षा करता हुआ उतारा है।
  • لَّا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ: उसके सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं।
  • مُسْلِمُونَ: अल्लाह के आगे आत्मसमर्पण करने वाले, उसकी आज्ञा के पाबंद।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब पैग़म्बर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने मक्का के मुशरिकीन को चुनौती दी कि यदि वे यह समझते हैं कि यह क़ुरआन किसी इंसान का बनाया हुआ है, तो वे भी इस जैसी कोई एक सूरा लेकर आएँ और अल्लाह के सिवा जिन्हें वे पुकारते हैं उन्हें भी बुला लें। जब वे ऐसा करने से असमर्थ रहे और उन्होंने इस चुनौती का कोई उत्तर न दिया, तो अल्लाह तआला ने फ़रमाया: "यदि वे तुम्हारी इस चुनौती का उत्तर नहीं देते, तो तुम (ऐ ईमान वालों!) यक़ीन के साथ जान लो कि यह क़ुरआन अल्लाह ही के ज्ञान से उतारा गया है, यह किसी इंसान का कलाम नहीं है, बल्कि यह अल्लाह का कलाम है जो उसके ज्ञान और उसकी हिकमत से उतरा है। और यह भी जान लो कि अल्लाह के सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं है, वही अकेला इबादत के लायक़ है।"

इसके बाद अल्लाह तआला ने फ़रमाया: "क्या तुम (इन स्पष्ट प्रमाणों और तर्कों के बाद) मुसलमान नहीं बनते?" यह एक प्रश्न के रूप में है, लेकिन इसका अर्थ आदेश देना है, अर्थात् "इस्लाम लाओ, अल्लाह के आगे सिर झुकाओ।" यह उन लोगों के लिए एक सख़्त चेतावनी है जो सत्य को जानने के बाद भी उसे स्वीकार नहीं करते। यह आयत उन मुशरिकीन को संबोधित करती है जिन्होंने क़ुरआन की चुनौती का सामना नहीं किया, और उन्हें बुलाती है कि वे अपनी ज़िद और हठधर्मिता छोड़कर अल्लाह के आगे झुक जाएँ।

फ़ायदे (लाभ):

  1. यह आयत क़ुरआन की सच्चाई और उसके अल्लाह की ओर से होने का एक स्पष्ट प्रमाण है, क्योंकि अरब के सबसे वाक्पटु लोग भी इस जैसी कोई रचना नहीं ला सके।
  2. इससे पता चलता है कि अल्लाह का ज्ञान हर चीज़ को घेरे हुए है, और क़ुरआन उसी के ज्ञान से उतरा है, इसलिए इसमें कोई संदेह या भ्रांति नहीं है।
  3. यह आयत तौहीद (एकेश्वरवाद) की पुकार है — अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं, और यही इस्लाम का मूल सिद्धांत है।
  4. यह आयत उन लोगों के लिए एक चेतावनी है जो सत्य को जानने के बाद भी उसे स्वीकार नहीं करते — ऐसे लोगों का ठिकाना अल्लाह के यहाँ बहुत बुरा होगा।
  5. यह आयत ईमान वालों को यक़ीन दिलाती है कि उनका दीन सत्य है, और वे सत्य पर क़ायम रहें, चाहे दुनिया उनका विरोध ही क्यों न करे।


📜 आयत 12-16 — हूद

12فَلَعَلَّكَ تَارِكٌ بَعْضَ مَا يُوحَىٰ إِلَيْكَ وَضَائِقٌ بِهِ صَدْرُكَ أَن يَقُولُوا لَوْلَا أُنزِلَ عَلَيْهِ كَنزٌ أَوْ جَاءَ مَعَهُ مَلَكٌ ۚ إِنَّمَا أَنتَ نَذِيرٌ ۚ وَاللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ وَكِيلٌ
तो जो चीज़ तुम्हारे पास 'वही' के ज़रिए से भेजी है उनमें से बाज़ को (सुनाने के वक्त) यायद तुम फक़त इस ख्याल से छोड़ देने वाले हो और तुम तंग दिल हो कि मुबादा ये लोग कह बैंठें कि उन पर खज़ाना क्यों नहीं नाज़िल किया गया या (उनके तसदीक के लिए) उनके साथ कोई फरिश्ता क्यों न आया तो तुम सिर्फ (अज़ाब से) डराने वाले हो
13أَمْ يَقُولُونَ افْتَرَاهُ ۖ قُلْ فَأْتُوا بِعَشْرِ سُوَرٍ مِّثْلِهِ مُفْتَرَيَاتٍ وَادْعُوا مَنِ اسْتَطَعْتُم مِّن دُونِ اللَّهِ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
तुम्हें उनका ख्याल न करना चाहिए और ख़ुदा हर चीज़ का ज़िम्मेदार है क्या ये लोग कहते हैं कि उस शख़्श (तुम) ने इस (क़ुरान) को अपनी तरफ से गढ़ लिया है तो तुम (उनसे साफ साफ) कह दो कि अगर तुम (अपने दावे में) सच्चे हो तो (ज्यादा नहीं) ऐसे दस सूरे अपनी तरफ से गढ़ के ले आओं
14فَإِلَّمْ يَسْتَجِيبُوا لَكُمْ فَاعْلَمُوا أَنَّمَا أُنزِلَ بِعِلْمِ اللَّهِ وَأَن لَّا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ فَهَلْ أَنتُم مُّسْلِمُونَ
और ख़ुदा के सिवा जिस जिस के तुम्हे बुलाते बन पड़े मदद के वास्ते बुला लो उस पर अगर वह तुम्हारी न सुने तो समझ ले कि (ये क़ुरान) सिर्फ ख़ुदा के इल्म से नाज़िल किया गया है और ये कि ख़ुदा के सिवा कोई माबूद नहीं तो क्या तुम अब भी इस्लाम लाओगे (या नहीं)
15مَن كَانَ يُرِيدُ الْحَيَاةَ الدُّنْيَا وَزِينَتَهَا نُوَفِّ إِلَيْهِمْ أَعْمَالَهُمْ فِيهَا وَهُمْ فِيهَا لَا يُبْخَسُونَ
नेकी करने वालों में से जो शख़्श दुनिया की ज़िन्दगी और उसके रिज़क़ का तालिब हो तो हम उन्हें उनकी कारगुज़ारियों का बदला दुनिया ही में पूरा पूरा भर देते हैं और ये लोग दुनिया में घाटे में नहीं रहेगें
16أُولَٰئِكَ الَّذِينَ لَيْسَ لَهُمْ فِي الْآخِرَةِ إِلَّا النَّارُ ۖ وَحَبِطَ مَا صَنَعُوا فِيهَا وَبَاطِلٌ مَّا كَانُوا يَعْمَلُونَ
मगर (हाँ) ये वह लोग हैं जिनके लिए आख़िरत में (जहन्नुम की) आग के सिवा कुछ नहीं और जो कुछ दुनिया में उन लोगों ने किया धरा था सब अकारत (बर्बाद) हो गया और जो कुछ ये लोग करते थे सब मिटियामेट हो गया
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अनुवाद — हूद 14

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Tuesday, August 18, 2026

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