अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَإِلَّمْ يَسْتَجِيبُوا لَكُمْ: यदि वे (मुशरिकीन) तुम्हारी बात का उत्तर न दें, अर्थात् तुम्हारी चुनौती का सामना न कर सकें।
- أُنزِلَ بِعِلْمِ اللَّهِ: यह क़ुरआन अल्लाह के ज्ञान के साथ उतारा गया है, अर्थात् अल्लाह इसे जानता हुआ और इसकी सुरक्षा करता हुआ उतारा है।
- لَّا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ: उसके सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं।
- مُسْلِمُونَ: अल्लाह के आगे आत्मसमर्पण करने वाले, उसकी आज्ञा के पाबंद।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब पैग़म्बर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने मक्का के मुशरिकीन को चुनौती दी कि यदि वे यह समझते हैं कि यह क़ुरआन किसी इंसान का बनाया हुआ है, तो वे भी इस जैसी कोई एक सूरा लेकर आएँ और अल्लाह के सिवा जिन्हें वे पुकारते हैं उन्हें भी बुला लें। जब वे ऐसा करने से असमर्थ रहे और उन्होंने इस चुनौती का कोई उत्तर न दिया, तो अल्लाह तआला ने फ़रमाया: "यदि वे तुम्हारी इस चुनौती का उत्तर नहीं देते, तो तुम (ऐ ईमान वालों!) यक़ीन के साथ जान लो कि यह क़ुरआन अल्लाह ही के ज्ञान से उतारा गया है, यह किसी इंसान का कलाम नहीं है, बल्कि यह अल्लाह का कलाम है जो उसके ज्ञान और उसकी हिकमत से उतरा है। और यह भी जान लो कि अल्लाह के सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं है, वही अकेला इबादत के लायक़ है।"
इसके बाद अल्लाह तआला ने फ़रमाया: "क्या तुम (इन स्पष्ट प्रमाणों और तर्कों के बाद) मुसलमान नहीं बनते?" यह एक प्रश्न के रूप में है, लेकिन इसका अर्थ आदेश देना है, अर्थात् "इस्लाम लाओ, अल्लाह के आगे सिर झुकाओ।" यह उन लोगों के लिए एक सख़्त चेतावनी है जो सत्य को जानने के बाद भी उसे स्वीकार नहीं करते। यह आयत उन मुशरिकीन को संबोधित करती है जिन्होंने क़ुरआन की चुनौती का सामना नहीं किया, और उन्हें बुलाती है कि वे अपनी ज़िद और हठधर्मिता छोड़कर अल्लाह के आगे झुक जाएँ।
फ़ायदे (लाभ):
- यह आयत क़ुरआन की सच्चाई और उसके अल्लाह की ओर से होने का एक स्पष्ट प्रमाण है, क्योंकि अरब के सबसे वाक्पटु लोग भी इस जैसी कोई रचना नहीं ला सके।
- इससे पता चलता है कि अल्लाह का ज्ञान हर चीज़ को घेरे हुए है, और क़ुरआन उसी के ज्ञान से उतरा है, इसलिए इसमें कोई संदेह या भ्रांति नहीं है।
- यह आयत तौहीद (एकेश्वरवाद) की पुकार है — अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं, और यही इस्लाम का मूल सिद्धांत है।
- यह आयत उन लोगों के लिए एक चेतावनी है जो सत्य को जानने के बाद भी उसे स्वीकार नहीं करते — ऐसे लोगों का ठिकाना अल्लाह के यहाँ बहुत बुरा होगा।
- यह आयत ईमान वालों को यक़ीन दिलाती है कि उनका दीन सत्य है, और वे सत्य पर क़ायम रहें, चाहे दुनिया उनका विरोध ही क्यों न करे।
📜 आयत 12-16 — हूद
अनुवाद — हूद 14
सूरा हूद आयत 14 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ख़ुदा के सिवा जिस जिस के तुम्हे बुलाते बन…सूरा आयत 14/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 12–16. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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