अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَعْنَةً: अभिशाप, रहमत से दूरी और अपमान।
- بُعْدًا: रहमत से दूरी, विनाश और हानि।
- كَفَرُوا رَبَّهُمْ: उन्होंने अपने रब की नेमतों का इनकार किया और उसकी नाराज़गी मोल ली।
तफसीर:
इस आयत में अल्लाह तआला ने क़ौमे आद (हज़रत हूद अलैहिस्सलाम की क़ौम) के अंजाम को बयान किया है। उन पर दुनिया में भी लानत (अभिशाप) डाली गई और आख़िरत में भी उन्हें अल्लाह की रहमत से महरूम रखा जाएगा। यानी उन्हें दुनिया में ज़िल्लत, अपमान और अल्लाह की रहमत से दूरी नसीब हुई, और क़यामत के दिन भी वही हालत होगी। फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है: "सुन लो! क़ौमे आद ने अपने रब का इनकार किया और उसकी नेमतों की नाशुक्री की।" यह बात उनके लिए एलान है कि वे अल्लाह की रहमत से दूर हो गए। आख़िर में कहा गया: "सुन लो! हूद की क़ौम (आद) पर दूरी और विनाश हो!" यह दूरी उनके शिर्क और कुफ्र की वजह से थी, क्योंकि उन्होंने अल्लाह की नेमतों का इनकार किया और उसके नबी को झुठलाया। यहाँ "आद" से मुराद वह क़ौम है जो हज़रत हूद अलैहिस्सलाम की उम्मत थी, न कि "आदे इरम" जो बाद में आई।
फ़ायदे:
- अल्लाह की नेमतों का इनकार और कुफ्र इंसान को दुनिया और आख़िरत दोनों में ज़िल्लत और रहमत से दूरी का कारण बनता है।
- नबियों की तकज़ीब (झुठलाना) किसी क़ौम के विनाश का सबसे बड़ा कारण है।
- अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, और वह अपने हुक्म को अंजाम देकर रहता है।
- यह आयत मुसलमानों को सबक़ देती है कि वे अल्लाह की नेमतों के शुक्रगुज़ार रहें और अपने नबी की पैरवी करें, ताकि वे दुनिया और आख़िरत में अल्लाह की रहमत और करम के हक़दार बनें।
- इससे यह भी पता चलता है कि अल्लाह की लानत और रहमत से दूरी सबसे बड़ी सज़ा है, और मोमिन को चाहिए कि वह अपने अमल से इससे बचने की कोशिश करे।
📜 आयत 58-62 — हूद
अनुवाद — हूद 60
सूरा हूद आयत 60 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और इस दुनिया में भी लानत उनके पीछे लगा दी…सूरा आयत 60/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 58–62. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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