Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
### معاني الكلمات
- بَيِّنَةٍ: स्पष्ट प्रमाण, दलील और साक्ष्य जो सत्य को प्रकट करे।
- رِزْقًا حَسَنًا: पवित्र, हलाल और उत्तम आजीविका।
- أُخَالِفَكُمْ: मैं तुम्हारे विपरीत चलूँ, यानी जिस काम से तुम्हें रोकूँ, उसे स्वयं करूँ।
- إِصْلَاحَ: सुधारना, भलाई और सही रास्ते पर लाना।
- تَوْفِيقِي: मेरी सफलता और भलाई की तौफीक (सहायता)।
- أُنِيبُ: मैं रुजू करता हूँ, लौटता हूँ (अल्लाह की ओर)।
### تفسير الآية
हज़रत शुऐब (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम से कहा: "ऐ मेरी क़ौम! ज़रा सोचो, अगर मैं अपने रब की ओर से एक स्पष्ट प्रमाण (बैय्यना) पर हूँ — यानी मुझे उसकी तरफ़ से इल्म, नबुव्वत और सच्चाई की स्पष्ट दलील मिली है — और उसने मुझे अपनी ओर से पवित्र और उत्तम आजीविका (हलाल रिज़्क़) दी है, तो क्या यह मुनासिब है कि मैं उसके एहसानों के बावजूद उसकी नाफ़रमानी करूँ और हलाल को हराम में मिलाऊँ?"
फिर उन्होंने अपनी सच्ची नीयत और ईमानदारी बयान की: "मैं यह नहीं चाहता कि जिन कामों से तुम्हें रोकता हूँ, उन्हें ख़ुद करके तुम्हारे ख़िलाफ़ चलूँ। मैं तुम्हें जिस चीज़ से बचाता हूँ, उससे मैं ख़ुद भी दूर रहता हूँ। मेरा मक़सद सिर्फ़ तुम्हारी इस्लाह (सुधार) है — जहाँ तक मुझसे हो सके, मैं तुम्हें तौहीद और अल्लाह की इताअत की तरफ़ बुलाता हूँ और तुम्हारे दुनिया और आख़िरत की भलाई चाहता हूँ।"
आख़िर में उन्होंने अपनी पूरी भरोसा अल्लाह पर जताया: "मेरी तौफीक़ (सफलता) अल्लाह ही के हाथ में है, मैं ख़ुद अपनी भलाई नहीं कर सकता, तो दूसरों की भलाई कैसे कर सकता हूँ? मैंने उसी पर भरोसा किया है, और उसी की तरफ़ मैं हर मामले में रुजू करता हूँ — तौबा करके और अपने सारे काम उसे सौंपकर।"
### फ़ायदे (فوائد)
- दावत का अंदाज़: हज़रत शुऐब (अलैहिस्सलाम) का अंदाज़ बताता है कि नेकी की दावत में नर्मी, मुहब्बत और सच्ची चिंता होनी चाहिए, न कि सख़्ती और तकब्बुर।
- अमल और दावत में एकता: दावत देने वाले को ख़ुद उस पर अमल करना चाहिए। जो दूसरों को रोकता है, उसे ख़ुद उससे बचना चाहिए — यह सबसे बड़ी सच्चाई की निशानी है।
- इख़लास (नियत की पवित्रता): हर अच्छे काम में नीयत सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा और लोगों की भलाई होनी चाहिए, न कि दुनियावी मतलब।
- तौफीक़ अल्लाह से है: इंसान को अपनी ताक़त पर नाज़ नहीं करना चाहिए, बल्कि हर काम में अल्लाह से मदद माँगनी चाहिए। सफलता उसी के हाथ में है।
- तवक्कुल और इनाबत: मुसलमान की ज़िंदगी का निचोड़ यही है — अल्लाह पर भरोसा और हर मामले में उसी की तरफ़ लौटना। यही सच्ची इबादत और सब्र की मिसाल है।
- हलाल रिज़्क़ की अहमियत: हलाल कमाई और पवित्र जीवन अल्लाह का बड़ा एहसान है, और इसका शुक्र यह है कि इसे हराम से न मिलाया जाए।
📜 आयत 86-90 — सूरा हूद
अनुवाद — हूद 88
सूरा हूद आयत 88 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : शुएब ने कहा ऐ मेरी क़ौम अगर मै अपने परवरदिगार…सूरा आयत 88/123 — सूरा हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा हूद सुनें, सूरा हूद अनुवाद, सूरा हूद mp3, सूरा हूद pdf. आयत 86–90. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा हूद
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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