अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لَا يَجْرِمَنَّكُمْ – तुम्हें किसी ऐसे काम पर न उभारे, न प्रेरित करे।
- شِقَاقِي – मेरी दुश्मनी, मेरे विरोध और मेरे मार्ग से अलग होने की वजह से पैदा हुई नाराज़गी।
- أَن يُصِيبَكُم – यह कि तुम पर आ पड़े (अज़ाब)।
- بِبَعِيدٍ – दूर नहीं, बल्कि बहुत करीब है।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ मेरी क़ौम के लोगो! मेरी दुश्मनी और मेरे विरोध का यह मतलब हरगिज़ नहीं होना चाहिए कि तुम हठ और ज़िद पर अड़ जाओ और सच्चाई को क़बूल करने से इनकार कर दो। मेरी नाराज़गी तुम्हें उस रास्ते पर न ले जाए जो तुम्हारे लिए तबाही का सबब बने। सावधान हो जाओ, कहीं ऐसा न हो कि तुम पर भी वही अज़ाब आ पड़े जो नूह की क़ौम पर आया था (जो तूफ़ान में डूब गई), या हूद की क़ौम 'आद पर आया था (जो तेज़ हवा से हलाक हुई), या सालिह की क़ौम समूद पर आया था (जो भयंकर चीख़ से नष्ट हो गई)। और लूत की क़ौम तुमसे दूर नहीं है – न समय के लिहाज़ से और न जगह के लिहाज़ से। उनका विनाश तो अभी हाल का है और उनके इलाक़े तुम्हारे पास ही हैं। तुमने खुद देखा और सुना है कि उन पर क्या गुज़री, इसलिए उनसे सबक़ सीखो और अपनी स्थिति पर ग़ौर करो।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- नफ़रत और दुश्मनी को सच्चाई क़बूल करने में रुकावट न बनने दें – इंसान को चाहिए कि सच्चाई को सिर्फ़ इसलिए न ठुकराए क्योंकि वह किसी ख़ास शख्स से नाराज़ है। हक़ को हक़ समझकर क़बूल करना चाहिए, चाहे वह किसी के ज़रिए आए।
- पिछली उम्मतों का अंजाम हमारे लिए नसीहत है – अल्लाह ने क़ुरआन में पुरानी क़ौमों के हलाक होने के वाक़ियात इसलिए बयान किए हैं ताकि हम उनसे इबरत हासिल करें और उन गलतियों से बचें जिनकी वजह से वे तबाह हुए।
- अज़ाब की करीबी का एहसास – इंसान कभी-कभी सोचता है कि अल्लाह का अज़ाब बहुत दूर है, लेकिन यह आयत बताती है कि अज़ाब बिल्कुल करीब हो सकता है – जैसे लूत की क़ौम का विनाश शुएब की क़ौम के लिए बहुत पास था। इसलिए हमें हर वक़्त अपने आपको सुधारने की कोशिश करनी चाहिए।
- तौबा का दरवाज़ा हमेशा खुला है – शुएब अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को अज़ाब से डराने के साथ-साथ तौबा की तरफ़ बुलाया। यह सिखाता है कि अल्लाह की रहमत बहुत वसीअ है और जब तक इंसान ज़िंदा है, उसके लिए पलट आने का मौक़ा मौजूद है।
- इस्लाम सिर्फ़ डराने का नहीं, बल्कि सुधारने का दीन है – इस आयत में डर और उम्मीद दोनों हैं। डर इसलिए कि गलत रास्ते पर चलने का अंजाम बुरा है, और उम्मीद इसलिए कि अगर क़ौम सुधर जाए तो अल्लाह का अज़ाब टल सकता है। यही इस्लाम की खूबसूरती है कि वह इंसान को अंधेरे से निकालकर रोशनी की तरफ़ ले जाता है।
📜 आयत 87-91 — हूद
अनुवाद — हूद 89
सूरा हूद आयत 89 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ऐ मेरी क़ौमे मेरी ज़िद कही तुम से ऐसा…सूरा आयत 89/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 87–91. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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