हूद · 97/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
إِلَىٰ فِرْعَوْنَ وَمَلَئِهِ فَاتَّبَعُوا أَمْرَ فِرْعَوْنَ ۖ وَمَا أَمْرُ فِرْعَوْنَ بِرَشِيدٍ ۝٩٧
Ilaa Fir`awna wa mala`ihee fattaba`ooo amra Fir`awna wa maaa amru Fir`awna birasheed
📖 हिंदी अर्थ
फिरऔन और उसके अम्र (सरदारों) के पास (पैग़म्बर बना कर) भेजा तो लोगों ने फिरऔन ही का हुक्म मान लिया (और मूसा की एक न सुनी) हालॉकि फिरऔन का हुक्म कुछ जॅचा समझा हुआ न था

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • फ़िरऔन: मिस्र का शासक, जो अत्याचारी और घमंडी था।
  • मलइ (मलए): उसके दरबारी, सरदार और बड़े-बड़े अधिकारी।
  • रशीद: सही मार्ग पर चलने वाला, बुद्धिमत्ता और सही निर्णय वाला।

व्याख्या:

इस आयत में अल्लाह तआला बता रहे हैं कि हमने मूसा (अलैहिस्सलाम) को फ़िरऔन और उसके दरबार के बड़े सरदारों की ओर भेजा, ताकि वे उन्हें सत्य का मार्ग दिखाएँ। लेकिन फ़िरऔन ने अपने घमंड और अहंकार के कारण सत्य को नहीं माना और अपने लोगों को अपने ही आदेश पर चलने का आदेश दिया। उसके दरबारी और सरदारों ने भी बिना किसी विचार के उसकी बात मान ली और मूसा (अलैहिस्सलाम) के विरुद्ध हो गए। अल्लाह तआला फ़रमाते हैं कि फ़िरऔन का आदेश कभी सही और बुद्धिमत्ता वाला नहीं था, बल्कि वह पूरी तरह गलत, भ्रम, अज्ञानता और कुफ़्र पर आधारित था। उसके आदेश में न कोई भलाई थी, न ही कोई सीधा रास्ता। वह केवल अपनी मनमानी और अत्याचार पर चलता था, और उसके अनुयायियों ने अंधी पैरवी करके अपना विनाश स्वयं बुलाया।

शिक्षाएँ और लाभ:

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि सत्य की पहचान करने के लिए हमेशा अक्ल और समझ का इस्तेमाल करना चाहिए, न कि केवल बड़ों या शासकों की अंधी पैरवी करनी चाहिए।
  2. अत्याचारी और घमंडी लोगों के आदेशों पर चलना विनाश का कारण बनता है, चाहे वे कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों।
  3. सच्चा मार्गदर्शन केवल अल्लाह और उसके पैग़म्बरों का है; किसी इंसान का आदेश, चाहे वह कितना भी बड़ा क्यों न हो, जब तक वह अल्लाह की शिक्षाओं के अनुरूप न हो, उसे मानना सही नहीं है।
  4. यह आयत मुसलमानों को सबक देती है कि वे अपने नेताओं और अगुआओं की बातों को क़ुरआन और सुन्नत की कसौटी पर परखें, और यदि वे सत्य के विरुद्ध हों तो उनका साथ न दें।
  5. अल्लाह का फ़ैसला हमेशा सच्चाई और न्याय पर होता है, और अत्याचारियों का अंत बुरा होता है, चाहे वे दुनिया में कितनी भी देर तक सत्ता में रहें।


📜 आयत 95-99 — हूद

95كَأَن لَّمْ يَغْنَوْا فِيهَا ۗ أَلَا بُعْدًا لِّمَدْيَنَ كَمَا بَعِدَتْ ثَمُودُ
(और वह ऐसे मर मिटे) कि गोया उन बस्तियों में कभी बसे ही न थे सुन रखो कि जिस तरह समूद (ख़ुदा की बारगाह से) धुत्कारे गए उसी तरह अहले मदियन की भी धुत्कारी हुई
96وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مُوسَىٰ بِآيَاتِنَا وَسُلْطَانٍ مُّبِينٍ
और बेशक हमने मूसा को अपनी निशानियाँ और रौशन दलील देकर
97إِلَىٰ فِرْعَوْنَ وَمَلَئِهِ فَاتَّبَعُوا أَمْرَ فِرْعَوْنَ ۖ وَمَا أَمْرُ فِرْعَوْنَ بِرَشِيدٍ
फिरऔन और उसके अम्र (सरदारों) के पास (पैग़म्बर बना कर) भेजा तो लोगों ने फिरऔन ही का हुक्म मान लिया (और मूसा की एक न सुनी) हालॉकि फिरऔन का हुक्म कुछ जॅचा समझा हुआ न था
98يَقْدُمُ قَوْمَهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ فَأَوْرَدَهُمُ النَّارَ ۖ وَبِئْسَ الْوِرْدُ الْمَوْرُودُ
क़यामत के दिन वह अपनी क़ौम के आगे आगे चलेगा और उनको दोज़ख़ में ले जाकर झोंक देगा और ये लोग किस क़दर बड़े घाट उतारे गए
99وَأُتْبِعُوا فِي هَٰذِهِ لَعْنَةً وَيَوْمَ الْقِيَامَةِ ۚ بِئْسَ الرِّفْدُ الْمَرْفُودُ
और (इस दुनिया) में भी लानत उनके पीछे पीछे लगा दी गई और क़यामत के दिन भी (लगी रहेगी) क्या बुरा इनाम है जो उन्हें मिला
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अनुवाद — हूद 97

सूरा हूद आयत 97 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिरऔन और उसके अम्र (सरदारों) के पास (पैग़म्बर बना कर)…

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Tuesday, August 18, 2026

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