हूद · 96/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مُوسَىٰ بِآيَاتِنَا وَسُلْطَانٍ مُّبِينٍ ۝٩٦
Wa laqad arsalnaa Moosaa bi Aayaatinaa wa sultaanim mubeen
📖 हिंदी अर्थ
और बेशक हमने मूसा को अपनी निशानियाँ और रौशन दलील देकर

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مُوسَىٰ (मूसा): अल्लाह के महान पैगंबर, जिन्हें तौरात दी गई।
  • بِآيَاتِنَا (हमारी निशानियों के साथ): वे चमत्कार और प्रमाण जो अल्लाह की ओर से मूसा (अलैहिस्सलाम) को दिए गए, जैसे लाठी का साँप बनना, हाथ का चमकना आदि।
  • سُلْطَانٍ مُّبِينٍ (स्पष्ट प्रमाण/अधिकार): स्पष्ट और खुला हुआ तर्क या दलील जो सत्य को प्रकट करे और झूठ को मिटा दे।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हमने मूसा (अलैहिस्सलाम) को अपनी स्पष्ट निशानियों और चमत्कारों के साथ भेजा। ये निशानियाँ अल्लाह की वह दलीलें थीं जो उसकी वहदानियत (एकता) और उसकी कुदरत पर गवाही देती थीं। साथ ही, उन्हें एक ऐसा सुल्तान-ए-मुबीन (स्पष्ट प्रमाण) दिया गया जो हर उस शख्स के लिए रौशन और वाज़ेह था जो सच्चे दिल से देखता और समझता। यह प्रमाण फ़िरऔन और उसकी क़ौम के सामने पेश किया गया ताकि वे जान लें कि मूसा (अलैहिस्सलाम) जो कुछ लेकर आए हैं, वह अल्लाह की तरफ से है और उसमें कोई शक नहीं। ये निशानियाँ और प्रमाण उन लोगों के लिए काफ़ी थे जो हक़ की तलाश में थे, लेकिन जिन्होंने अंधकार और हठधर्मिता को अपनाया, उनके लिए ये भी मुफ़ीद न हुईं।

फ़ायदे (उपदेश):

  1. अल्लाह तआला अपने पैगंबरों को हमेशा स्पष्ट प्रमाणों और निशानियों के साथ भेजता है, ताकि लोगों के पास कोई बहाना न बचे। यह अल्लाह की रहमत और इंसाफ़ की दलील है।
  2. सच्चाई हमेशा स्पष्ट और रौशन होती है; उसे छिपाने की ज़रूरत नहीं होती। जो लोग सच्चे दिल से तलाश करते हैं, वे उसे पा लेते हैं।
  3. अल्लाह के पैगंबरों के साथ चमत्कार और प्रमाण इसलिए होते हैं ताकि लोगों का ईमान मज़बूत हो और वे दुनिया की मोहताजी से बचें।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि हमें भी अपने जीवन में सच्चाई और स्पष्टता को अपनाना चाहिए, और अल्लाह की निशानियों पर ग़ौर करके अपने ईमान को मज़बूत करना चाहिए।
  5. अल्लाह का हर काम हिकमत (बुद्धिमत्ता) पर आधारित है; वह जिसे चाहता है हिदायत देता है और जो हठधर्मी करता है उसे उसकी हालत पर छोड़ देता है।


📜 आयत 94-98 — हूद

94وَلَمَّا جَاءَ أَمْرُنَا نَجَّيْنَا شُعَيْبًا وَالَّذِينَ آمَنُوا مَعَهُ بِرَحْمَةٍ مِّنَّا وَأَخَذَتِ الَّذِينَ ظَلَمُوا الصَّيْحَةُ فَأَصْبَحُوا فِي دِيَارِهِمْ جَاثِمِينَ
और जब हमारा (अज़ाब का) हुक्म आ पहुँचा तो हमने शुएब और उन लोगों को जो उसके साथ ईमान लाए थे अपनी मेहरबानी से बचा लिया और जिन लोगों ने ज़ुल्म किया था उनको एक चिंघाड़ ने ले डाला फिर तो वह सबके सब अपने घरों में औंधे पड़े रह गए
95كَأَن لَّمْ يَغْنَوْا فِيهَا ۗ أَلَا بُعْدًا لِّمَدْيَنَ كَمَا بَعِدَتْ ثَمُودُ
(और वह ऐसे मर मिटे) कि गोया उन बस्तियों में कभी बसे ही न थे सुन रखो कि जिस तरह समूद (ख़ुदा की बारगाह से) धुत्कारे गए उसी तरह अहले मदियन की भी धुत्कारी हुई
96وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مُوسَىٰ بِآيَاتِنَا وَسُلْطَانٍ مُّبِينٍ
और बेशक हमने मूसा को अपनी निशानियाँ और रौशन दलील देकर
97إِلَىٰ فِرْعَوْنَ وَمَلَئِهِ فَاتَّبَعُوا أَمْرَ فِرْعَوْنَ ۖ وَمَا أَمْرُ فِرْعَوْنَ بِرَشِيدٍ
फिरऔन और उसके अम्र (सरदारों) के पास (पैग़म्बर बना कर) भेजा तो लोगों ने फिरऔन ही का हुक्म मान लिया (और मूसा की एक न सुनी) हालॉकि फिरऔन का हुक्म कुछ जॅचा समझा हुआ न था
98يَقْدُمُ قَوْمَهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ فَأَوْرَدَهُمُ النَّارَ ۖ وَبِئْسَ الْوِرْدُ الْمَوْرُودُ
क़यामत के दिन वह अपनी क़ौम के आगे आगे चलेगा और उनको दोज़ख़ में ले जाकर झोंक देगा और ये लोग किस क़दर बड़े घाट उतारे गए
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अनुवाद — हूद 96

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Tuesday, August 18, 2026

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