अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- حَاسِدٍ: ईर्ष्यालु व्यक्ति, जो दूसरों की नेमतों (उपहारों) को सहन न कर सके।
- إِذَا حَسَدَ: जब वह अपनी ईर्ष्या को प्रकट करे और उसके अनुसार कार्य करे।
तफसीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला हमें सिखा रहे हैं कि हम उन लोगों की बुराई से उनकी पनाह माँगें जो ईर्ष्या (हसद) रखते हैं। ईर्ष्या का अर्थ है कि किसी व्यक्ति को अल्लाह की दी हुई नेमत (जैसे धन, संतान, ज्ञान, सम्मान, या कोई अच्छाई) देखकर उसके मन में यह इच्छा पैदा हो कि यह नेमत उससे छीन जाए। यह एक बहुत ही बुरी आदत है, जो इंसान के दिल को अंधकारमय कर देती है और उसे अल्लाह की रहमत से दूर कर देती है।
जब ईर्ष्यालु व्यक्ति अपनी इस बुरी भावना पर अमल करता है, यानी वह अपनी ज़ुबान से बुराई करता है, या आँख से नुकसान पहुँचाता है (नज़र-ए-बद), या किसी और तरीके से दूसरे को तकलीफ़ पहुँचाने की कोशिश करता है, तो उसका नुकसान बहुत गंभीर हो सकता है। इसलिए अल्लाह तआला हमें यह सिखा रहे हैं कि हम उनकी पनाह माँगें, क्योंकि वही सबसे बड़ा रक्षक है।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हमें खुद को ईर्ष्या से बचाना चाहिए, क्योंकि ईर्ष्या अल्लाह की नेमतों को नष्ट करने वाली है। रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने भी उम्मत को ईर्ष्या से बचने की ताकीद की है। साथ ही, हमें दूसरों की नेमतों पर खुश होना चाहिए और अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए, क्योंकि यही ईमान की निशानी है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें अल्लाह की असीम दया और सुरक्षा की याद दिलाती है। वह हमें उन सभी बुराइयों से बचाना चाहता है जो हमारे जीवन को तकलीफ़ में डाल सकती हैं। जब हम सुबह-शाम यह सूरह पढ़ते हैं, तो हम अल्लाह की पनाह में आ जाते हैं, और यह हमारे लिए एक ढाल बन जाती है। यह हमें सिखाती है कि हमें अपने दिल को पाक रखना चाहिए, दूसरों के लिए भलाई चाहनी चाहिए, और अल्लाह पर पूरा भरोसा रखना चाहिए। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देता है।
📜 आयत 3-5 — अल-फलक
अनुवाद — अल-फलक 5
सूरा अल-फलक आयत 5 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (जब फूँके) और हसद करने वाले की बुराई सेसूरा आयत 5/5 — अल-फलक الفلق (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-फलक सुनें, अल-फलक अनुवाद, अल-फलक mp3, अल-फलक pdf. आयत 3–5. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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