यूसुफ · 26/111
अनुवाद उच्चारण — यूसुफ
قَالَ هِيَ رَاوَدَتْنِي عَن نَّفْسِي ۚ وَشَهِدَ شَاهِدٌ مِّنْ أَهْلِهَا إِن كَانَ قَمِيصُهُ قُدَّ مِن قُبُلٍ فَصَدَقَتْ وَهُوَ مِنَ الْكَاذِبِينَ ۝٢٦
Qaala hiya raawadatnee `an nafsee wa shahida shaahidum min ahlihaa in kaana qameesuhoo qudda min qubulin fasadaqat wa huwa minal kaazibeen
📖 हिंदी अर्थ
या दर्दनाक अज़ाब में मुब्तिला कर दिया जाए यूसुफ ने कहा उसने ख़ुद (मुझसे मेरी आरज़ू की थी और ज़ुलेख़ा) के कुन्बे वालों में से एक गवाही देने वाले (दूध पीते बच्चे) ने गवाही दी कि अगर उनका कुर्ता आगे से फटा हुआ हो तो ये सच्ची और वह झूठे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رَاوَدَتْنِي: उसने मुझसे बुरे इरादे से मेरी इच्छा पूरी करने को कहा, यानी मुझे अपनी ओर आकर्षित करना चाहा।
  • قُدَّ: फाड़ा गया, चीरा गया।
  • مِن قُبُلٍ: सामने की तरफ से, आगे से।

तफसीर (व्याख्या):

जब यूसुफ (अलैहिस्सलाम) ने देखा कि उस महिला ने उन पर झूठा आरोप लगाकर उन्हें मुसीबत में डाल दिया है, तो उन्होंने अपनी पवित्रता और बेगुनाही की रक्षा करते हुए स्पष्ट रूप से कहा: "नहीं, यह सच नहीं है, बल्कि उसी (अज़ीज़ की पत्नी) ने मुझे अपनी तरफ बुलाया और मुझसे बुरे काम का आग्रह किया, और मैंने उसे ठुकरा दिया।" यूसुफ का यह उत्तर सीधा और सच्चा था, क्योंकि वह निर्दोष थे।

इसके बाद अल्लाह ने उनकी बेगुनाही साबित करने के लिए एक गवाह खड़ा किया, जो उसी घर (अज़ीज़ के परिवार) में से था—वह एक छोटा बच्चा था जो पालने में था। अल्लाह की कुदरत से उस बच्चे ने बोलना शुरू कर दिया और कहा: "अगर यूसुफ का कमीज़ सामने की तरफ से फटा हुआ है, तो यह महिला सच्ची है और यूसुफ झूठा है।" उसने यह शर्त इसलिए रखी क्योंकि अगर यूसुफ ने उस महिला पर ज़ोर डाला होता और वह उन्हें रोकती, तो वह उन्हें सामने से धक्का देती और कमीज़ सामने से फटता। लेकिन अगर यूसुफ उससे भाग रहे होते और वह उनका पीछा करती, तो कमीज़ पीछे से फटता। यह एक न्यायपूर्ण और स्पष्ट परीक्षण था।

फ़ायदे (सबक):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई और पवित्रता पर अल्लाह की मदद हमेशा आती है। यूसुफ (अलैहिस्सलाम) ने अल्लाह का डर रखा और बुराई से बचे, तो अल्लाह ने उनकी बेगुनाही साबित करने का रास्ता निकाला—यहाँ तक कि एक मासूम बच्चे को बोलने की ताकत दी।
  2. इससे हमें यह सबक मिलता है कि जब इंसान पर झूठा आरोप लगे, तो उसे सब्र और सच्चाई के साथ अपना बचाव करना चाहिए, और अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि अल्लाह सच्चे लोगों की मदद करता है और उनकी इज़्ज़त बचाता है।
  3. यह आयत इस बात की तरफ इशारा करती है कि बुराई से बचने के लिए इंसान को हर हाल में अल्लाह की नज़र का ख्याल रखना चाहिए, और यह कि अल्लाह के नबी भी जब मुश्किल में पड़ते हैं, तो अल्लाह उन्हें राहत देता है—यह हमारे लिए एक बड़ी तसल्ली है कि हम अगर सच्चाई पर क़ायम रहें, तो अल्लाह हमें कभी अकेला नहीं छोड़ता।
  4. इस क़िस्से से यह भी पता चलता है कि इस्लाम में इज़्ज़त और पवित्रता की रक्षा कितनी अहम है, और झूठे आरोप लगाना कितना बड़ा गुनाह है, क्योंकि इससे बेगुनाहों को तकलीफ़ पहुँचती है।


📜 आयत 24-28 — यूसुफ

24وَلَقَدْ هَمَّتْ بِهِ ۖ وَهَمَّ بِهَا لَوْلَا أَن رَّأَىٰ بُرْهَانَ رَبِّهِ ۚ كَذَٰلِكَ لِنَصْرِفَ عَنْهُ السُّوءَ وَالْفَحْشَاءَ ۚ إِنَّهُ مِنْ عِبَادِنَا الْمُخْلَصِينَ
ज़ुलेखा ने तो उनके साथ (बुरा) इरादा कर ही लिया था और अगर ये भी अपने परवरदिगार की दलीन न देख चुके होते तो क़स्द कर बैठते (हमने उसको यूँ बचाया) ताकि हम उससे बुराई और बदकारी को दूर रखे बेशक वह हमारे ख़ालिस बन्दों में से था
25وَاسْتَبَقَا الْبَابَ وَقَدَّتْ قَمِيصَهُ مِن دُبُرٍ وَأَلْفَيَا سَيِّدَهَا لَدَى الْبَابِ ۚ قَالَتْ مَا جَزَاءُ مَنْ أَرَادَ بِأَهْلِكَ سُوءًا إِلَّا أَن يُسْجَنَ أَوْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
और दोनों दरवाजे क़ी तरफ झपट पड़े और ज़ुलेख़ा (ने पीछे से उनका कुर्ता पकड़ कर खीचा और) फाड़ डाला और दोनों ने ज़ुलेखा के ख़ाविन्द को दरवाज़े के पास खड़ा पाया ज़ुलेख़ा झट (अपने शौहर से) कहने लगी कि जो तुम्हारी बीबी के साथ बदकारी का इरादा करे उसकी सज़ा इसके सिवा और कुछ नहीं कि या तो कैद कर दिया जाए
26قَالَ هِيَ رَاوَدَتْنِي عَن نَّفْسِي ۚ وَشَهِدَ شَاهِدٌ مِّنْ أَهْلِهَا إِن كَانَ قَمِيصُهُ قُدَّ مِن قُبُلٍ فَصَدَقَتْ وَهُوَ مِنَ الْكَاذِبِينَ
या दर्दनाक अज़ाब में मुब्तिला कर दिया जाए यूसुफ ने कहा उसने ख़ुद (मुझसे मेरी आरज़ू की थी और ज़ुलेख़ा) के कुन्बे वालों में से एक गवाही देने वाले (दूध पीते बच्चे) ने गवाही दी कि अगर उनका कुर्ता आगे से फटा हुआ हो तो ये सच्ची और वह झूठे
27وَإِن كَانَ قَمِيصُهُ قُدَّ مِن دُبُرٍ فَكَذَبَتْ وَهُوَ مِنَ الصَّادِقِينَ
और अगर उनका कुर्ता पींछे से फटा हुआ हो तो ये झूठी और वह सच्चे
28فَلَمَّا رَأَىٰ قَمِيصَهُ قُدَّ مِن دُبُرٍ قَالَ إِنَّهُ مِن كَيْدِكُنَّ ۖ إِنَّ كَيْدَكُنَّ عَظِيمٌ
फिर जब अज़ीजे मिस्र ने उनका कुर्ता पीछे से फटा हुआ देखा तो (अपनी औरत से) कहने लगा ये तुम ही लोगों के चलत्तर है उसमें शक़ नहीं कि तुम लोगों के चलत्तर बड़े (ग़ज़ब के) होते हैं
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अनुवाद — यूसुफ 26

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Tuesday, August 18, 2026

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