यूसुफ · 40/111
अनुवाद उच्चारण — यूसुफ
مَا تَعْبُدُونَ مِن دُونِهِ إِلَّا أَسْمَاءً سَمَّيْتُمُوهَا أَنتُمْ وَآبَاؤُكُم مَّا أَنزَلَ اللَّهُ بِهَا مِن سُلْطَانٍ ۚ إِنِ الْحُكْمُ إِلَّا لِلَّهِ ۚ أَمَرَ أَلَّا تَعْبُدُوا إِلَّا إِيَّاهُ ۚ ذَٰلِكَ الدِّينُ الْقَيِّمُ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ ۝٤٠
Maa ta`budoona min doonihee illaaa asmaaa`an sam maitumoohaaa antum wa aabaaa`ukum maaa anzalal laahu bihaa min sultan; inilhukmu illaa lillaah; amara allaa ta`budooo illaaa iyyaah; zaalikad deenul qaiyimu wa laakinna aksaran naasi laa ya`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
तुम लोग तो ख़ुदा को छोड़कर बस उन चन्द नामों ही को परसतिश करते हो जिन को तुमने और तुम्हारे बाप दादाओं ने गढ़ लिया है ख़ुदा ने उनके लिए कोई दलील नहीं नाज़िल की हुकूमत तो बस ख़ुदा ही के वास्ते ख़ास है उसने तो हुक्म दिया है कि उसके सिवा किसी की इबादत न करो यही साीधा दीन है मगर (अफसोस) बहुतेरे लोग नहीं जानते हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَسْمَاءً: केवल नाम, जिनका कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं।
  • سَمَّيْتُمُوهَا: तुमने उन्हें (देवता) नाम दे दिए हैं।
  • سُلْطَانٍ: प्रमाण, तर्क या आधिकारिक साक्ष्य।
  • الْحُكْمُ: निर्णय, आदेश, शासन।
  • الدِّينُ الْقَيِّمُ: सीधा, स्थिर और सत्य धर्म।

तफ़सीर (व्याख्या):

हज़रत यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने अपने साथी क़ैदियों से कहा कि तुम लोग अल्लाह को छोड़कर जिन चीज़ों की पूजा करते हो, वे दरअसल केवल नाम हैं — जिन्हें तुमने और तुम्हारे बाप-दादों ने मन-घड़ंत "देवता" के नाम दे रखे हैं। इन नामों के पीछे कोई हक़ीक़त नहीं है, न इनमें कोई शक्ति है और न ही ये किसी काम आ सकते हैं। अल्लाह ने इनके पूज्य होने पर कोई प्रमाण या सबूत नाज़िल नहीं किया।

सच्चाई यह है कि सृष्टि में निर्णय और आदेश का अधिकार केवल अल्लाह को है। उसी ने आदेश दिया है कि तुम उसी की इबादत करो और उसके सिवा किसी और की पूजा न करो। यही एकमात्र सीधा और स्थिर धर्म है — जिसमें कोई टेढ़ापन या कमी नहीं। लेकिन अधिकतर लोग इस सच्चाई को नहीं जानते, इसलिए वे अल्लाह के सिवा दूसरी चीज़ों की पूजा करते हुए अपने आप को धोखे में डालते हैं।


फ़ायदे (उपदेश):

  1. तौहीद (एकेश्वरवाद) ही सच्चा धर्म है — यह आयत सिखाती है कि अल्लाह की इबादत ही वह सीधा रास्ता है जो इंसान को सच्ची कामयाबी तक पहुँचाता है। जो लोग इस रास्ते पर चलते हैं, वे कभी गुमराह नहीं होते।
  2. झूठे देवताओं की पूजा बेकार है — जो चीज़ें इंसान खुद बना लेता है या अपने पूर्वजों से सीख लेता है, वे उसे कभी फ़ायदा नहीं पहुँचा सकतीं। सच्ची पनाह और मदद सिर्फ़ अल्लाह से मिलती है।
  3. अक़्ल और दिल की प्यास सिर्फ़ अल्लाह से शांत होती है — इंसान फ़ितरतन अल्लाह को पहचानने और उसकी इबादत करने के लिए बना है। जब वह इस फ़ितरत पर चलता है, तो उसे सुकून और इत्मिनान मिलता है।
  4. अल्लाह का फ़ैसला ही अंतिम है — हर मामले में अल्लाह का हुक्म ही मानना चाहिए। उसके हुक्म के आगे किसी और की राय या परंपरा नहीं चलती। यही इंसान को सही राह पर चलाता है।
  5. ज्ञान की कमी इंसान को गुमराह करती है — आयत के अंत में बताया गया कि अधिकतर लोग इसलिए गुमराह हैं क्योंकि वे जानते नहीं। इससे सीख मिलती है कि हमें दीन की सच्ची समझ हासिल करने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि हम अल्लाह की राह पर चल सकें।
🎧 सुनें

📜 आयत 38-42 — यूसुफ

38وَاتَّبَعْتُ مِلَّةَ آبَائِي إِبْرَاهِيمَ وَإِسْحَاقَ وَيَعْقُوبَ ۚ مَا كَانَ لَنَا أَن نُّشْرِكَ بِاللَّهِ مِن شَيْءٍ ۚ ذَٰلِكَ مِن فَضْلِ اللَّهِ عَلَيْنَا وَعَلَى النَّاسِ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَشْكُرُونَ
और मैं तो अपने बाप दादा इबराहीम व इसहाक़ व याक़ूब के मज़हब पर चलने वाला हूँ मुनासिब नहीं कि हम ख़ुदा के साथ किसी चीज़ को (उसका) शरीक बनाएँ ये भी ख़ुदा की एक बड़ी मेहरबानी है हम पर भी और तमाम लोगों पर मगर बहुतेरे लोग उसका शुक्रिया (भी) अदा नहीं करते
39يَا صَاحِبَيِ السِّجْنِ أَأَرْبَابٌ مُّتَفَرِّقُونَ خَيْرٌ أَمِ اللَّهُ الْوَاحِدُ الْقَهَّارُ
ऐ मेरे कैद ख़ाने के दोनो रफीक़ों (साथियों) (ज़रा ग़ौर तो करो कि) भला जुदा जुदा माबूद अच्छे या ख़ुदाए यकता ज़बरदस्त (अफसोस)
40مَا تَعْبُدُونَ مِن دُونِهِ إِلَّا أَسْمَاءً سَمَّيْتُمُوهَا أَنتُمْ وَآبَاؤُكُم مَّا أَنزَلَ اللَّهُ بِهَا مِن سُلْطَانٍ ۚ إِنِ الْحُكْمُ إِلَّا لِلَّهِ ۚ أَمَرَ أَلَّا تَعْبُدُوا إِلَّا إِيَّاهُ ۚ ذَٰلِكَ الدِّينُ الْقَيِّمُ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ
तुम लोग तो ख़ुदा को छोड़कर बस उन चन्द नामों ही को परसतिश करते हो जिन को तुमने और तुम्हारे बाप दादाओं ने गढ़ लिया है ख़ुदा ने उनके लिए कोई दलील नहीं नाज़िल की हुकूमत तो बस ख़ुदा ही के वास्ते ख़ास है उसने तो हुक्म दिया है कि उसके सिवा किसी की इबादत न करो यही साीधा दीन है मगर (अफसोस) बहुतेरे लोग नहीं जानते हैं
41يَا صَاحِبَيِ السِّجْنِ أَمَّا أَحَدُكُمَا فَيَسْقِي رَبَّهُ خَمْرًا ۖ وَأَمَّا الْآخَرُ فَيُصْلَبُ فَتَأْكُلُ الطَّيْرُ مِن رَّأْسِهِ ۚ قُضِيَ الْأَمْرُ الَّذِي فِيهِ تَسْتَفْتِيَانِ
ऐ मेरे क़ैद ख़ाने के दोनो रफीक़ो (अच्छा अब ताबीर सुनो तुममें से एक (जिसने अंगूर देखा रिहा होकर) अपने मालिक को शराब पिलाने का काम करेगा और (दूसरा) जिसने रोटियाँ सर पर (देखी हैं) तो सूली दिया जाएगा और चिड़िया उसके सर से (नोच नोच) कर खाएगी जिस अम्र को तुम दोनों दरयाफ्त करते थे (वह ये है और) फैसला हो चुका है
42وَقَالَ لِلَّذِي ظَنَّ أَنَّهُ نَاجٍ مِّنْهُمَا اذْكُرْنِي عِندَ رَبِّكَ فَأَنسَاهُ الشَّيْطَانُ ذِكْرَ رَبِّهِ فَلَبِثَ فِي السِّجْنِ بِضْعَ سِنِينَ
और उन दोनों में से जिसकी निस्बत यूसुफ ने समझा था वह रिहा हो जाएगा उससे कहा कि अपने मालिक के पास मेरा भी तज़किरा करना (कि मैं बेजुर्म क़ैद हूँ) तो शैतान ने उसे अपने आक़ा से ज़िक्र करना भुला दिया तो यूसुफ क़ैद ख़ाने में कई बरस रहे
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अनुवाद — यूसुफ 40

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Tuesday, August 18, 2026

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