Yaa saahibayis sijni ammaaa ahadukumaa fa yasqee rabbahoo khamranw wa ammal aakharu fa yuslabu fataakulut tairu mir raasih; qudiyal amrul lazee feehi tastaftiyaan
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
ऐ मेरे क़ैद ख़ाने के दोनो रफीक़ो (अच्छा अब ताबीर सुनो तुममें से एक (जिसने अंगूर देखा रिहा होकर) अपने मालिक को शराब पिलाने का काम करेगा और (दूसरा) जिसने रोटियाँ सर पर (देखी हैं) तो सूली दिया जाएगा और चिड़िया उसके सर से (नोच नोच) कर खाएगी जिस अम्र को तुम दोनों दरयाफ्त करते थे (वह ये है और) फैसला हो चुका है
🌐 Additional reference in اردو
🌐 اردو
میرے جیل خانے کے رفیقو! تم میں سے ایک (جو پہلا خواب بیان کرنے والا ہے وہ) تو اپنے آقا کو شراب پلایا کرے گا اور جو دوسرا ہے وہ سولی دیا جائے گا اور جانور اس کا سر کھا جائیں گے۔ جو امر تم مجھ سے پوچھتے تھے وہ فیصلہ ہوچکا ہے
ऐ मेरे क़ैद ख़ाने के दोनो रफीक़ो (अच्छा अब ताबीर सुनो तुममें से एक (जिसने अंगूर देखा रिहा होकर) अपने मालिक को शराब पिलाने का काम करेगा और (दूसरा) जिसने रोटियाँ सर पर (देखी हैं) तो सूली दिया जाएगा और चिड़िया उसके सर से (नोच नोच) कर खाएगी जिस अम्र को तुम दोनों दरयाफ्त करते थे (वह ये है और) फैसला हो चुका है
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अनुवाद — Tafsir
يا जेल के दोनों साथियों! तुम दोनों के सपनों की ताबीर यह है कि तुममें से एक (जो शराब निचोड़ता देखा गया था) जेल से निकलेगा और अपने मालिक (बादशाह) को शराब पिलाएगा। दूसरा (जो सिर पर रोटियाँ लिए हुए था) सूली पर चढ़ाया जाएगा और पक्षी उसके सिर से कौरें उठाएँगे। यह वह फ़ैसला है जो पहले ही लिखा जा चुका है, और जिसके बारे में तुम दोनों ने मुझसे पूछा था — वह अब पूरा होकर रहेगा।
शब्दों के अर्थ:
साहिबे सिज्न: जेल के साथी या हमक़ैदी।
रब्बेहु: उसका स्वामी, यहाँ अर्थ है बादशाह।
फ़युस्लब: उसे सूली पर चढ़ाया जाएगा, यानी मारकर लटकाया जाएगा।
तस्तफ़तियान: तुम दोनों फ़तवा (ताबीर) माँग रहे हो।
विस्तृत तफ़सीर:
हज़रत यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने जेल के दोनों साथियों के सपनों की ताबीर बयान करते हुए फ़रमाया कि तुममें से एक — जिसने सपने में देखा था कि वह अंगूर निचोड़ रहा है — वह जेल से रिहा होकर बादशाह का शराब पिलाने वाला (साक़ी) बनेगा। दूसरा — जिसने सपने में सिर पर रोटियाँ उठाई थीं और पक्षी उन्हें खा रहे थे — वह सूली पर चढ़ाया जाएगा, और उसके सिर से पक्षी खाएँगे। यह ताबीर सुनकर दोनों ने कहा कि हमने तो सिर्फ़ खेल-खेल में सपने देखे थे, कोई सच्चा सपना नहीं था। इस पर हज़रत यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने फ़रमाया: "जिस अम्र (मामले) के बारे में तुम पूछ रहे हो, वह फ़ैसला हो चुका है और अब इसे टाला नहीं जा सकता।" यानी चाहे तुम सपने को मज़ाक़ समझो या सच, यह ताबीर अटल है और जो कुछ मैंने कहा है वह ज़रूर वाक़े होगा।
फ़ायदे और सबक़:
सपनों की ताबीर का इल्म: यह आयत साबित करती है कि अल्लाह अपने नबियों को ग़ैब की ख़बरें और सपनों की सही ताबीर का इल्म देता है। यह नबुव्वत की निशानी है और अल्लाह के इल्म की असीमता को दर्शाती है।
सब्र और भरोसे का इनाम: हज़रत यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने जेल में रहते हुए भी लोगों की मदद की और उनके सपनों की ताबीर बताई। यह हमें सिखाता है कि मुसीबत में भी दूसरों के काम आना चाहिए और अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए।
अल्लाह का फ़ैसला अटल होता है: जब अल्लाह किसी मामले का फ़ैसला कर देता है, तो उसे कोई टाल नहीं सकता। इसलिए इंसान को चाहिए कि वह अल्लाह के फ़ैसलों पर राज़ी रहे और उसकी रज़ा पर भरोसा करे।
सच्चाई और स्पष्टता: हज़रत यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने बिना किसी लाग-लपेट के सच्चाई बयान की, भले ही वह कड़वी हो। यह हमें सिखाता है कि सच बोलना चाहिए, चाहे उसमें कितनी ही तल्ख़ी क्यों न हो।
दुनिया की बेहक़ीक़त: यह आयत दिखाती है कि दुनिया की चीज़ें (जैसे शराब पिलाना या सूली पर चढ़ना) कितनी बेहक़ीक़त हैं। असल कामयाबी अल्लाह की रज़ा और आख़िरत की कामयाबी है।
यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि अल्लाह अपने नेक बंदों को हर हालत में हिमायत देता है और उनके ज़रिए लोगों को हिदायत देता है। हमें भी चाहिए कि हर मुसीबत में अल्लाह पर भरोसा रखें और उसके दीन की ख़िदमत करते रहें।
तुम लोग तो ख़ुदा को छोड़कर बस उन चन्द नामों ही को परसतिश करते हो जिन को तुमने और तुम्हारे बाप दादाओं ने गढ़ लिया है ख़ुदा ने उनके लिए कोई दलील नहीं नाज़िल की हुकूमत तो बस ख़ुदा ही के वास्ते ख़ास है उसने तो हुक्म दिया है कि उसके सिवा किसी की इबादत न करो यही साीधा दीन है मगर (अफसोस) बहुतेरे लोग नहीं जानते हैं
ऐ मेरे क़ैद ख़ाने के दोनो रफीक़ो (अच्छा अब ताबीर सुनो तुममें से एक (जिसने अंगूर देखा रिहा होकर) अपने मालिक को शराब पिलाने का काम करेगा और (दूसरा) जिसने रोटियाँ सर पर (देखी हैं) तो सूली दिया जाएगा और चिड़िया उसके सर से (नोच नोच) कर खाएगी जिस अम्र को तुम दोनों दरयाफ्त करते थे (वह ये है और) फैसला हो चुका है
और उन दोनों में से जिसकी निस्बत यूसुफ ने समझा था वह रिहा हो जाएगा उससे कहा कि अपने मालिक के पास मेरा भी तज़किरा करना (कि मैं बेजुर्म क़ैद हूँ) तो शैतान ने उसे अपने आक़ा से ज़िक्र करना भुला दिया तो यूसुफ क़ैद ख़ाने में कई बरस रहे
और (इसी असना (बीच) में) बादशाह ने (भी ख्वाब देखा और) कहा मैने देखा है कि सात मोटी ताज़ी गाए हैं उनको सात दुबली पतली गाय खाए जाती हैं और सात ताज़ी सब्ज़ बालियॉ (देखीं) और फिर (सात) सूखी बालियॉ ऐ (मेरे दरबार के) सरदारों अगर तुम लोगों को ख्वाब की ताबीर देनी आती हो तो मेरे (इस) ख्वाब के बारे में हुक्म लगाओ
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