Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ظَنَّ (ज़न्ना): यहाँ इसका अर्थ 'जाना' या 'यक़ीन करना' है, क्योंकि यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) को उसके सपने की ताबीर से यह मालूम हो गया था कि यह व्यक्ति बच जाएगा।
- نَاجٍ (नाजिन): बच निकलने वाला, मुक्त होने वाला।
- اذْكُرْنِي (उज़्कुरनी): मेरा ज़िक्र करना, मेरी बात करना।
- رَبِّكَ (रब्बिक): तुम्हारे स्वामी (यहाँ अर्थ: बादशाह)।
- فَأَنسَاهُ (फ़ा-अंसाहु): तो उसे भुला दिया।
- الشَّيْطَانُ (शैतान): शैतान।
- فَلَبِثَ (फ़लबिसा): तो वह रुका रहा / ठहरा रहा।
- بِضْعَ سِنِينَ (बिद्आ सिनीन): कई वर्ष (सात वर्ष, जैसा कि अधिकांश उलमा का कहना है)।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने जेल में अपने दोनों साथियों के सपनों की ताबीर बताई, तो उन्होंने उस व्यक्ति (शराबी/साक़ी) से, जिसके बारे में उन्हें यक़ीन था कि वह जेल से बचकर निकलेगा और बादशाह की सेवा में लौट जाएगा, कहा: "जब तुम अपने स्वामी (बादशाह) के पास पहुँचो, तो मेरा ज़िक्र करना — उसे बताना कि जेल में एक बेगुनाह व्यक्ति है जिसे ज़ुल्म से क़ैद किया गया है, और उसकी तरफ़ ध्यान दिलाना ताकि वह मेरी रिहाई का हुक्म दे।"
लेकिन शैतान ने उस साक़ी को यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) का ज़िक्र बादशाह के सामने करना भुला दिया। शैतान ने उसके दिल से यह बात निकाल दी, और वह यूसुफ़ की बात को भूल गया। इस कारण यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) को जेल में कई और वर्ष (सात वर्ष) बिताने पड़े। यह अल्लाह की ओर से एक इम्तिहान (परीक्षा) थी, और यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने इस पर सब्र किया।
फ़ायदे (सबक):
- अल्लाह पर भरोसा: यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने इंसान से मदद माँगी, लेकिन जब वह वसीला (साधन) ख़त्म हो गया, तो उन्होंने अल्लाह पर ही भरोसा किया। यह हमें सिखाता है कि इंसानी वसीले अपनी जगह हैं, लेकिन असली कामयाबी अल्लाह ही के हाथ में है। हमें हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए।
- सब्र की अज़ीमत: जेल में कई साल बिताने के बावजूद यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने सब्र नहीं खोया। यह हमें सिखाता है कि मुसीबतों में सब्र करने वालों को अल्लाह बेहतर बदला देता है। जब अल्लाह की मदद आती है, तो वह इतनी शानदार होती है कि पिछली तकलीफ़ें भूल जाती हैं।
- शैतान का दुश्मन होना: शैतान इंसान का खुला दुश्मन है। वह भलाई के कामों में रुकावट डालता है, जैसे उसने साक़ी को यूसुफ़ का ज़िक्र भुला दिया। इसलिए हमें हमेशा अल्लाह से दुआ करनी चाहिए कि वह हमें शैतान के वसवसों (बुरे ख़यालात) से बचाए।
- भलाई में जल्दी करना: यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने मौका पाते ही भलाई का काम किया और अपनी बेगुनाही ज़ाहिर करने की कोशिश की। हमें भी भलाई के कामों में देरी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि मौका हाथ से निकल सकता है।
- अल्लाह की हिकमत (समझदारी): यूसुफ़ की जेल में लंबी क़ैद अल्लाह की हिकमत से थी, क्योंकि इसी दौरान उन्होंने बादशाह के सपने की ताबीर बताई और आख़िरकार अल्लाह ने उन्हें बड़ा मर्तबा दिया। यह सिखाता है कि अल्लाह जो करता है, उसमें भलाई ही होती है, चाहे हमें वह बुरा ही क्यों न लगे।
📜 आयत 40-44 — सूरा यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 42
सूरा यूसुफ आयत 42 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उन दोनों में से जिसकी निस्बत यूसुफ ने समझा…सूरा आयत 42/111 — सूरा यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूसुफ सुनें, सूरा यूसुफ अनुवाद, सूरा यूसुफ mp3, सूरा यूसुफ pdf. आयत 40–44. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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