फिर जब यूसुफ ने उन का साज़ो सामान सफर ग़ल्ला (वग़ैरह) दुरुस्त करा दिया तो अपने भाई के असबाब में पानी पीने का कटोरा (यूसुफ के इशारे) से रखवा दिया फिर एक मुनादी ललकार के बोला कि ऐ क़ाफ़िले वालों (हो न हो) यक़ीनन तुम्ही लोग ज़रुर चोर हो
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جب ان کا اسباب تیار کر دیا تو اپنے بھائی کے شلیتے میں گلاس رکھ دیا اور پھر (جب وہ آبادی سے باہر نکل گئے تو) ایک پکارنے والے نے آواز دی کہ قافلے والو تم تو چور ہو
السِّقَايَةَ: वह पात्र या प्याला जिससे राजा पानी पीता था और जिससे लोगों को अनाज नापा जाता था।
رَحْلِ: सामान, असबाब या काठी का वह हिस्सा जिसमें यात्री अपना सामान रखते हैं।
أَذَّنَ مُؤَذِّنٌ: एक पुकारने वाले ने ऊँची आवाज़ से पुकारा।
الْعِيرُ: क़ाफ़िला, यात्रियों का समूह जो ऊँटों पर सवार होकर चलता है।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब हज़रत यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने अपने भाइयों का पूरा सामान तैयार किया और उनके ऊँटों पर अनाज लाद दिया, तो उन्होंने अपने ख़ादिमों को आदेश दिया कि वह प्याला जिससे राजा पानी पीता था और जिससे अनाज नापा जाता था, उसे चुपचाप उनके सगे भाई बिन्यामीन के सामान में रख दें। यह काम इस तरह किया गया कि किसी को पता न चले। यह यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) की चतुराई थी कि वे अपने भाई बिन्यामीन को अपने पास रोकना चाहते थे, क्योंकि वह उनके पिता याक़ूब (अलैहिस्सलाम) के सबसे प्यारे बेटे थे और उनके सगे भाई थे।
जब भाई लोग मिस्र से रवाना होकर कुछ दूर निकल गए, तो यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने एक पुकारने वाले को भेजा जिसने ऊँची आवाज़ से पुकारा: "ऐ क़ाफ़िले वालो! तुम लोग चोर हो!" यह पुकार इसलिए लगाई गई ताकि उन्हें रोका जा सके और उनके सामान की तलाशी ली जा सके। इस तरह यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने अपनी योजना को अंजाम दिया, जिससे बिन्यामीन उनके पास रुक सके।
फ़ायदे (सीख):
इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि किसी भी काम को करने के लिए सही तदबीर (योजना) और हिकमत (समझदारी) का उपयोग करना चाहिए। यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने अपने भाई को रोकने के लिए एक समझदारी भरा तरीक़ा अपनाया।
इस्लाम में भाई-भाई का रिश्ता बहुत अहम है। यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) अपने सगे भाई से मिलने के लिए इतनी लंबी योजना बनाई, यह दर्शाता है कि रिश्तों की अहमियत कितनी बड़ी है।
यह आयत हमें सिखाती है कि मुसीबतों और परेशानियों में भी अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने कई सालों की कठिनाइयों के बाद भी अपने भाईयों को माफ़ किया और उनके साथ अच्छा व्यवहार किया।
इस क़िस्से से यह भी पता चलता है कि अल्लाह अपने नेक बंदों की मदद करता है और उन्हें ऐसे हालात से गुज़ारता है जो उनके लिए बेहतर होते हैं, भले ही वे शुरू में कठिन लगें।
फिर जब यूसुफ ने उन का साज़ो सामान सफर ग़ल्ला (वग़ैरह) दुरुस्त करा दिया तो अपने भाई के असबाब में पानी पीने का कटोरा (यूसुफ के इशारे) से रखवा दिया फिर एक मुनादी ललकार के बोला कि ऐ क़ाफ़िले वालों (हो न हो) यक़ीनन तुम्ही लोग ज़रुर चोर हो
और जब ये सब भाई जिस तरह उनके वालिद ने हुक्म दिया था उसी तरह (मिस्र में) दाख़िल हुए मगर जो हुक्म ख़ुदा की तरफ से आने को था उसे याक़ूब कुछ भी टाल नहीं सकते थे मगर (हाँ) याक़ूब के दिल में एक तमन्ना थी जिसे उन्होंने भी युं पूरा कर लिया क्योंकि इसमे तो शक़ नहीं कि उसे चूंकि हमने तालीम दी थी साहिबे इल्म ज़रुर था मगर बहुतेरे लोग (उससे भी) वाक़िफ नहीं
और जब ये लोग यूसुफ के पास पहुँचे तो यूसुफ ने अपने हक़ीक़ी (सगे) भाई को अपने पास (बग़ल में) जगह दी और (चुपके से) उस (इब्ने यामीन) से कह दिया कि मै तुम्हारा भाई (यूसुफ) हूँ तो जो कुछ (बदसुलूकियाँ) ये लोग तुम्हारे साथ करते रहे हैं उसका रंज न करो
फिर जब यूसुफ ने उन का साज़ो सामान सफर ग़ल्ला (वग़ैरह) दुरुस्त करा दिया तो अपने भाई के असबाब में पानी पीने का कटोरा (यूसुफ के इशारे) से रखवा दिया फिर एक मुनादी ललकार के बोला कि ऐ क़ाफ़िले वालों (हो न हो) यक़ीनन तुम्ही लोग ज़रुर चोर हो
उन लोगों ने जवाब दिया कि हमें बादशाह का प्याला नहीं मिलता है और मै उसका ज़ामिन हूँ कि जो शख़्श उसको ला हाज़िर करेगा उसको एक ऊँट के बोझ बराबर (ग़ल्ला इनाम) मिलेगा
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