Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- آوَى: गले लगाया, अपने पास जगह दी, प्यार से अपनी ओर खींच लिया।
- فَلَا تَبْتَئِسْ: उदास मत हो, दुखी मत हो, चिंता मत कर।
- بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ: उन (भाइयों) के कर्मों के कारण जो वे पहले कर चुके हैं।
व्याख्या:
जब यूसुफ (अलैहिस्सलाम) के भाई मिस्र पहुँचे और उनके दरबार में हाज़िर हुए, तो उनके साथ उनका सगा भाई (बिन्यामीन) भी था। यूसुफ (अलैहिस्सलाम) ने जब अपने सगे भाई को देखा, तो उन्होंने उसे अपने पास बुलाया, उसे गले लगाया और अपनी ओर खींच लिया। फिर उन्होंने उससे अकेले में, चुपके से कहा: "मैं तुम्हारा भाई यूसुफ हूँ।" उन्होंने उसे सांत्वना देते हुए कहा: "तुम उन कामों पर दुखी और उदास मत होना जो हमारे भाइयों ने पहले किए थे—मुझे अंधेरे कुएँ में फेंकना, मुझसे अलग करना, और हमारे साथ जो भी बुरा व्यवहार किया।" यूसुफ (अलैहिस्सलाम) ने उसे यह भी निर्देश दिया कि वह इस रहस्य को किसी पर प्रकट न करे, ताकि योजना पूरी हो सके और वे अपने पिता को भी मिला सकें। यह यूसुफ (अलैहिस्सलाम) की ओर से अपने भाई के प्रति प्रेम, दया और सांत्वना का क्षण था, और उन्होंने उसे आश्वस्त किया कि अल्लाह ने उन पर कृपा की है और उन्हें फिर से मिला दिया है।
शिक्षाएँ और लाभ:
- भाईचारा और पारिवारिक प्रेम: यह आयत हमें सिखाती है कि रिश्तों में प्रेम और करुणा कितनी महत्वपूर्ण है। यूसुफ (अलैहिस्सलाम) ने वर्षों की जुदाई के बाद भी अपने भाई को गले लगाया और उसे सांत्वना दी, जो दर्शाता है कि सच्चा प्रेम कभी कम नहीं होता।
- क्षमा और दरगुज़र: यूसुफ (अलैहिस्सलाम) ने अपने भाइयों के किए गए बुरे कर्मों का ज़िक्र करके भी उन्हें दोषी नहीं ठहराया, बल्कि अपने भाई को दिलासा दी। यह हमें सिखाता है कि क्षमा करना और बुराई का बुराई से जवाब न देना, बल्कि अच्छाई से जवाब देना, इस्लाम की शान है।
- धैर्य और भरोसा: यूसुफ (अलैहिस्सलाम) की कहानी हमें सिखाती है कि मुसीबतों में धैर्य रखना और अल्लाह पर भरोसा करना ही सच्ची कामयाबी का रास्ता है। उन्होंने कठिनाइयों के बावजूद हार नहीं मानी और अल्लाह ने उन्हें ऊँचा मुकाम दिया।
- रहस्य की रक्षा: यूसुफ (अलैहिस्सलाम) ने अपने भाई को रहस्य छिपाने का निर्देश दिया, जो हमें सिखाता है कि कुछ मामलों में बुद्धिमानी और समझदारी से काम लेना चाहिए और रहस्यों की रक्षा करनी चाहिए, खासकर जब उससे बड़ी भलाई जुड़ी हो।
- अल्लाह की कृपा: यह आयत हमें याद दिलाती है कि अल्लाह की कृपा और मेहरबानी असीम है। जब सब कुछ अंधकारमय लगता है, तब भी अल्लाह अपने बंदों के लिए राहत और खुशी के दरवाज़े खोलता है, जैसे उसने यूसुफ (अलैहिस्सलाम) और उनके भाई को मिलाया।
📜 आयत 67-71 — सूरा यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 69
सूरा यूसुफ आयत 69 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जब ये लोग यूसुफ के पास पहुँचे तो यूसुफ…सूरा आयत 69/111 — सूरा यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूसुफ सुनें, सूरा यूसुफ अनुवाद, सूरा यूसुफ mp3, सूरा यूसुफ pdf. आयत 67–71. हिंदी अर्थ: اردو.
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Friday, October 2, 2026
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