यूसुफ · 71/111
अनुवाद उच्चारण — सूरा यूसुफ
قَالُوا وَأَقْبَلُوا عَلَيْهِم مَّاذَا تَفْقِدُونَ ۝٧١
Qaaloo wa aqbaloo `alaihim maazaa tafqidoon
📖 हिंदी अर्थ
ये सुन कर ये लोग पुकारने वालों की तरफ भिड़ पड़े और कहने लगे (आख़िर) तुम्हारी क्या चीज़ गुम हो गई है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَفْقِدُونَ: तुम क्या खो रहे हो? यानी तुम्हारी कौन सी चीज़ गायब हो गई है?
  • أَقْبَلُوا عَلَيْهِمْ: वे उन (पुकारने वाले और उसके साथियों) की ओर मुड़े और उनके सामने आ गए।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के भाइयों ने पुकारने वाले की आवाज़ सुनी, तो वे रुके और उसकी ओर तथा उसके साथियों की ओर मुड़कर बड़ी सहजता और निश्चिंतता से पूछा: "तुम क्या खो रहे हो? हमारे पास से तुम्हारी कौन सी चीज़ गायब हुई है?" उन्होंने यह प्रश्न इसलिए किया क्योंकि वे स्वयं को निर्दोष समझते थे और उन्हें यह अंदाज़ा भी नहीं था कि उन पर चोरी का आरोप लगाया जाएगा। उनका यह प्रश्न उनकी बेगुनाही और स्पष्टता को दर्शाता है, क्योंकि वे जानते थे कि उन्होंने कोई चोरी नहीं की है, इसलिए उन्होंने बिना किसी झिझक के पूछ लिया कि आखिर तुम्हारी क्या चीज़ गुम हुई है?

फ़ायदे (सीख):

  1. इस आयत से हमें सीख मिलती है कि इंसान को हमेशा स्पष्ट और सीधी बात करनी चाहिए। जब कोई व्यक्ति निर्दोष होता है, तो उसे किसी भी आरोप का सामना करने में घबराना नहीं चाहिए, बल्कि पूरे साहस और विनम्रता के साथ सच्चाई सामने रखनी चाहिए।
  2. यह भी सिखाता है कि दूसरों पर आरोप लगाने से पहले उनसे बातचीत करके मामले को समझना चाहिए। भाइयों ने बिना किसी गुस्से या आक्रोश के शांतिपूर्वक प्रश्न किया, जो अच्छे संवाद की मिसाल है।
  3. इससे यह भी पता चलता है कि अल्लाह के नेक बंदे जब किसी परीक्षा में होते हैं, तो उनका व्यवहार सभ्य और स्पष्ट होता है, और वे अपनी बेगुनाही को अच्छे तरीके से प्रस्तुत करते हैं। यह हमें सिखाता है कि मुसीबत के समय भी हमें अपनी ज़ुबान और अंदाज़ को अच्छा रखना चाहिए।


📜 आयत 69-73 — सूरा यूसुफ

69وَلَمَّا دَخَلُوا عَلَىٰ يُوسُفَ آوَىٰ إِلَيْهِ أَخَاهُ ۖ قَالَ إِنِّي أَنَا أَخُوكَ فَلَا تَبْتَئِسْ بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
और जब ये लोग यूसुफ के पास पहुँचे तो यूसुफ ने अपने हक़ीक़ी (सगे) भाई को अपने पास (बग़ल में) जगह दी और (चुपके से) उस (इब्ने यामीन) से कह दिया कि मै तुम्हारा भाई (यूसुफ) हूँ तो जो कुछ (बदसुलूकियाँ) ये लोग तुम्हारे साथ करते रहे हैं उसका रंज न करो
70فَلَمَّا جَهَّزَهُم بِجَهَازِهِمْ جَعَلَ السِّقَايَةَ فِي رَحْلِ أَخِيهِ ثُمَّ أَذَّنَ مُؤَذِّنٌ أَيَّتُهَا الْعِيرُ إِنَّكُمْ لَسَارِقُونَ
फिर जब यूसुफ ने उन का साज़ो सामान सफर ग़ल्ला (वग़ैरह) दुरुस्त करा दिया तो अपने भाई के असबाब में पानी पीने का कटोरा (यूसुफ के इशारे) से रखवा दिया फिर एक मुनादी ललकार के बोला कि ऐ क़ाफ़िले वालों (हो न हो) यक़ीनन तुम्ही लोग ज़रुर चोर हो
71قَالُوا وَأَقْبَلُوا عَلَيْهِم مَّاذَا تَفْقِدُونَ
ये सुन कर ये लोग पुकारने वालों की तरफ भिड़ पड़े और कहने लगे (आख़िर) तुम्हारी क्या चीज़ गुम हो गई है
72قَالُوا نَفْقِدُ صُوَاعَ الْمَلِكِ وَلِمَن جَاءَ بِهِ حِمْلُ بَعِيرٍ وَأَنَا بِهِ زَعِيمٌ
उन लोगों ने जवाब दिया कि हमें बादशाह का प्याला नहीं मिलता है और मै उसका ज़ामिन हूँ कि जो शख़्श उसको ला हाज़िर करेगा उसको एक ऊँट के बोझ बराबर (ग़ल्ला इनाम) मिलेगा
73قَالُوا تَاللَّهِ لَقَدْ عَلِمْتُم مَّا جِئْنَا لِنُفْسِدَ فِي الْأَرْضِ وَمَا كُنَّا سَارِقِينَ
तब ये लोग कहने लगे ख़ुदा की क़सम तुम तो जानते हो कि (तुम्हारे) मुल्क में हम फसाद करने की ग़रज़ से नहीं आए थे और हम लोग तो कुछ चोर तो हैं नहीं
यूसुफकुरान सूची
111आयत
मक्कीअवतरण स्थान
71आयत

अनुवाद — यूसुफ 71

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Thursday, October 1, 2026

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