यूसुफ · 74/111
अनुवाद उच्चारण — सूरा यूसुफ
قَالُوا فَمَا جَزَاؤُهُ إِن كُنتُمْ كَاذِبِينَ ۝٧٤
Qaaloo famaa jazaaa`u hooo in kuntum kaazibeen
📖 हिंदी अर्थ
तब वह मुलाज़िमीन बोले कि अगर तुम झूठे निकले तो फिर चोर की क्या सज़ा होगी

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • جَزَاؤُهُ: उसकी सज़ा या बदला।
  • كَاذِبِينَ: झूठे (अपनी बेगुनाही का दावा करने वाले)।

व्याख्या:

जब यूसुफ (अलैहिस्सलाम) के भाइयों ने कहा कि हम चोर नहीं हैं, तो पुकारने वाले (मुनादी) और उसके साथियों ने उनसे कहा: "अगर तुम अपने इस दावे में झूठे हो, तो बताओ कि चोर की सज़ा तुम्हारे कानून (धर्म) में क्या है?" यानी उन्होंने भाइयों से पूछा कि उस व्यक्ति की क्या सज़ा है जो शाही प्याला चुराए, अगर वह पकड़ा जाए। यह प्रश्न इसलिए था ताकि भाइयों की सच्चाई या झूठ का पता चल सके, और वे स्वयं अपनी सज़ा के बारे में बताएं, क्योंकि मिस्र के कानून और याक़ूब (अलैहिस्सलाम) के धर्म में चोर की सज़ा अलग-अलग थी। भाइयों ने अपनी बेगुनाही का दावा किया था, इसलिए उनसे कहा गया कि यदि तुम झूठे निकले, तो तुम्हारे नियम के अनुसार चोर की सज़ा क्या होगी?

फ़ायदे:

  1. इस आयत से पता चलता है कि किसी मामले में फ़ैसला करते समय उस समुदाय के अपने नियम और कानून को ही आधार बनाना चाहिए, ताकि इंसाफ़ हो सके।
  2. सच्चाई और झूठ की पहचान के लिए सवाल-जवाब और स्पष्टीकरण एक अच्छा तरीका है, जैसा कि यहाँ किया गया।
  3. इस्लाम सिखाता है कि हर मामले में न्याय और स्पष्टता को अपनाना चाहिए, और किसी पर आरोप लगाने से पहले उसकी सच्चाई जानने की कोशिश करनी चाहिए।
  4. यह घटना बताती है कि अल्लाह अपने नेक बंदों की मदद करता है और सच्चाई को ऊपर उठाता है, चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों।


📜 आयत 72-76 — सूरा यूसुफ

72قَالُوا نَفْقِدُ صُوَاعَ الْمَلِكِ وَلِمَن جَاءَ بِهِ حِمْلُ بَعِيرٍ وَأَنَا بِهِ زَعِيمٌ
उन लोगों ने जवाब दिया कि हमें बादशाह का प्याला नहीं मिलता है और मै उसका ज़ामिन हूँ कि जो शख़्श उसको ला हाज़िर करेगा उसको एक ऊँट के बोझ बराबर (ग़ल्ला इनाम) मिलेगा
73قَالُوا تَاللَّهِ لَقَدْ عَلِمْتُم مَّا جِئْنَا لِنُفْسِدَ فِي الْأَرْضِ وَمَا كُنَّا سَارِقِينَ
तब ये लोग कहने लगे ख़ुदा की क़सम तुम तो जानते हो कि (तुम्हारे) मुल्क में हम फसाद करने की ग़रज़ से नहीं आए थे और हम लोग तो कुछ चोर तो हैं नहीं
74قَالُوا فَمَا جَزَاؤُهُ إِن كُنتُمْ كَاذِبِينَ
तब वह मुलाज़िमीन बोले कि अगर तुम झूठे निकले तो फिर चोर की क्या सज़ा होगी
75قَالُوا جَزَاؤُهُ مَن وُجِدَ فِي رَحْلِهِ فَهُوَ جَزَاؤُهُ ۚ كَذَٰلِكَ نَجْزِي الظَّالِمِينَ
(वे धड़क) बोल उठे कि उसकी सज़ा ये है कि जिसके बोरे में वह (माल) निकले तो वही उसका बदला है (तो वह माल के बदले में ग़ुलाम बना लिया जाए)
76فَبَدَأَ بِأَوْعِيَتِهِمْ قَبْلَ وِعَاءِ أَخِيهِ ثُمَّ اسْتَخْرَجَهَا مِن وِعَاءِ أَخِيهِ ۚ كَذَٰلِكَ كِدْنَا لِيُوسُفَ ۖ مَا كَانَ لِيَأْخُذَ أَخَاهُ فِي دِينِ الْمَلِكِ إِلَّا أَن يَشَاءَ اللَّهُ ۚ نَرْفَعُ دَرَجَاتٍ مَّن نَّشَاءُ ۗ وَفَوْقَ كُلِّ ذِي عِلْمٍ عَلِيمٌ
हम लोग तो (अपने यहाँ) ज़ालिमों (चोरों) को इसी तरह सज़ा दिया करते हैं ग़रज़ यूसुफ ने अपने भाई का थैला खोलने ने से क़ब्ल दूसरे भाइयों के थैलों से (तलाशी) शुरू की उसके बाद (आख़िर में) उस प्याले को यूसुफ ने अपने भाई के थैले से बरामद किया यूसुफ को भाई के रोकने की हमने यू तदबीर बताइ वरना (बादशाह मिस्र) के क़ानून के मुवाफिक़ अपने भाई को रोक नहीं सकते थे मगर हाँ जब ख़ुदा चाहे हम जिसे चाहते हैं उसके दर्जे बुलन्द कर देते हैं और (दुनिया में) हर साहबे इल्म से बढ़कर एक और आलिम है
यूसुफकुरान सूची
111आयत
मक्कीअवतरण स्थान
74आयत

अनुवाद — यूसुफ 74

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Friday, October 2, 2026

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