Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَاللَّهِ: अल्लाह की क़सम!
- لَقَدْ عَلِمْتُمْ: तुमने निश्चित रूप से जान लिया है।
- لِنُفْسِدَ فِي الْأَرْضِ: धरती में बिगाड़ पैदा करने के लिए।
- وَمَا كُنَّا سَارِقِينَ: और हम चोर नहीं थे।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के भाइयों पर चोरी का आरोप लगाया गया और उनके सामान की तलाशी ली गई, तो उन्होंने अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए अल्लाह की क़सम खाकर कहा: "अल्लाह की क़सम! तुम लोगों ने हमारे बारे में जो कुछ देखा और जाना है, उससे यह बात अच्छी तरह मालूम हो चुकी है कि हम इस धरती पर फसाद फैलाने के लिए नहीं आए थे। हमारा मक़सद तो केवल अनाज लेना था, और न ही हमारी आदतों में चोरी शामिल है। हमने कभी चोरी नहीं की और न ही हम चोर हैं।"
उन्होंने अपनी पिछली अच्छी स्थिति और अमानतदारी का हवाला दिया, जो उनके व्यवहार से मिस्र वालों पर ज़ाहिर हो चुकी थी। वे इस बात पर अल्लाह को गवाह बना रहे थे कि वे इस अपराध से बिल्कुल पाक हैं।
फ़ायदे (सबक):
- सच्चाई का सहारा: मुसीबत के समय सच्चाई और अपनी बेगुनाही पर भरोसा रखना चाहिए, और अल्लाह को गवाह बनाकर सच बोलना चाहिए। यह इंसान की पवित्रता की निशानी है।
- अच्छे चरित्र की अहमियत: इंसान की अच्छी साख और अमानतदारी उसके बचाव का ज़रिया बनती है। जब उसका चरित्र साफ होता है, तो लोग उसकी बात पर यक़ीन करते हैं।
- आरोप से बचाव की शिष्टता: इस्लाम सिखाता है कि जब किसी पर झूठा आरोप लगे, तो उसे सभ्य तरीके से, बिना गुस्से के, अपनी सफाई देनी चाहिए और अल्लाह की क़सम खाकर सच बोलना चाहिए।
- फसाद से दूरी: मोमिन की पहचान यह है कि वह धरती पर फसाद फैलाने वाला नहीं होता, बल्कि वह सुधार और भलाई का काम करता है। यह आयत हमें सिखाती है कि हमें हमेशा अमन और सुलह की तरफ बढ़ना चाहिए।
- अल्लाह की क़सम की अहमियत: क़सम सिर्फ सच्चाई के लिए उठानी चाहिए, और जब इंसान सच्चा होता है, तो अल्लाह उसकी मदद करता है और उसकी बेगुनाही ज़ाहिर करता है, जैसा कि यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के भाइयों के मामले में हुआ।
📜 आयत 71-75 — सूरा यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 73
सूरा यूसुफ आयत 73 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तब ये लोग कहने लगे ख़ुदा की क़सम तुम तो…सूरा आयत 73/111 — सूरा यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूसुफ सुनें, सूरा यूसुफ अनुवाद, सूरा यूसुफ mp3, सूरा यूसुफ pdf. आयत 71–75. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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