Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- عُصْبَةٌ (उस्बा): एक बड़ा समूह, जमात। यहाँ अर्थ है दस भाई जो एक साथ मिलकर एक ताकत थे।
- ضَلَالٍ مُبِينٍ (ज़लालिन मुबीन): स्पष्ट गलती और भटकाव। यहाँ इसका अर्थ धर्म से भटकना नहीं, बल्कि निर्णय में स्पष्ट त्रुटि है।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उस समय का वर्णन करती है जब यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के सौतेले भाइयों ने आपस में साज़िश की। उन्होंने कहा: "क़सम है, यूसुफ़ और उसका सगा भाई (बिन्यामीन) हमारे पिता (याक़ूब) को हमसे ज़्यादा प्यारे हैं, जबकि हम एक मज़बूत जमात हैं और हममें ताकत और काबिलियत है। हमारे पिता साफ़ तौर पर गलत रास्ते पर हैं कि उन्होंने हम पर इन दोनों को तरजीह दी, बिना किसी ऐसे कारण के जो हमें दिखाई दे।"
भाइयों की यह बात उनकी ईर्ष्या और जलन से निकली थी, क्योंकि याक़ूब (अलैहिस्सलाम) का झुकाव यूसुफ़ की ओर अधिक था, जो एक नबी की स्वाभाविक मोहब्बत थी। लेकिन भाइयों ने इसे अपने लिए अपमान समझा और अपने पिता पर आरोप लगाया कि वे निर्णय में भटक गए हैं। यह उनकी नासमझी और शैतानी वसवसा का नतीजा था, क्योंकि पिता का अपने बेटे के प्रति अधिक प्रेम कोई गलती नहीं, बल्कि एक स्वाभाविक जज़्बा है, और याक़ूब (अलैहिस्सलाम) नबी होते हुए धर्म से भटकने से पाक थे।
फ़ायदे (सीख):
- ईर्ष्या और जलन इंसान को इतना अंधा कर सकती है कि वह अपने बड़ों और अच्छे लोगों पर भी गलत आरोप लगा दे। इसलिए हमें अपने दिल को ईर्ष्या से पाक रखना चाहिए।
- माता-पिता का अपने बच्चों के प्रति अलग-अलग स्तर का प्रेम स्वाभाविक है और इसे बुरा नहीं समझना चाहिए, बल्कि इस पर आपत्ति करना नासमझी है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि किसी के बारे में जल्दबाज़ी में राय क़ायम न करें, खासकर अपने बड़ों के बारे में, क्योंकि उनके फ़ैसलों में हिकमत होती है जो हमें दिखाई नहीं देती।
- अल्लाह की रहमत देखिए कि उसने भाइयों की इस साज़िश को यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के लिए बड़े अज़ीम मरतबे का ज़रिया बनाया, जो बताता है कि मुसीबतों के पीछे भी अल्लाह की योजनाएँ खूबसूरत होती हैं।
📜 आयत 6-10 — सूरा यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 8
सूरा यूसुफ आयत 8 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कि जब (यूसूफ के भाइयों ने) कहा कि बावजूद कि…सूरा आयत 8/111 — सूरा यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूसुफ सुनें, सूरा यूसुफ अनुवाद, सूरा यूसुफ mp3, सूरा यूसुफ pdf. आयत 6–10. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


