यूसुफ · 9/111
अनुवाद उच्चारण — सूरा यूसुफ
اقْتُلُوا يُوسُفَ أَوِ اطْرَحُوهُ أَرْضًا يَخْلُ لَكُمْ وَجْهُ أَبِيكُمْ وَتَكُونُوا مِن بَعْدِهِ قَوْمًا صَالِحِينَ ۝٩
Uqtuloo Yoosufa awitra hoohu ardany yakhlu lakum wajhu abeekum wa takoonoo mim ba`dihee qawman saaliheen
📖 हिंदी अर्थ
(ख़ैर तो अब मुनासिब ये है कि या तो) युसूफ को मार डालो या (कम से कम) उसको किसी जगह (चल कर) फेंक आओ तो अलबत्ता तुम्हारे वालिद की तवज्जो सिर्फ तुम्हारी तरफ हो जाएगा और उसके बाद तुम सबके सब (बाप की तवजज्जो से) भले आदमी हो जाओगें

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اقْتُلُوا: क़त्ल करो, मार डालो।
  • اطْرَحُوهُ: उसे फेंक दो, दूर कर दो।
  • أَرْضًا: किसी भूमि पर, यहाँ अर्थ है सुनसान और दूर की जगह।
  • يَخْلُ: ख़ाली हो जाए, सिर्फ़ तुम्हारे लिए रह जाए।
  • وَجْهُ أَبِيكُمْ: तुम्हारे पिता का चेहरा, यानी पिता का ध्यान और मुहब्बत।
  • مِن بَعْدِهِ: उसके (यूसुफ़ के) बाद, उस मामले से फ़ारिग़ होकर।
  • قَوْمًا صَالِحِينَ: नेक लोग, यहाँ अर्थ है तौबा करने वाले और सुधर जाने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हज़रत यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के सौतेले भाइयों ने देखा कि उनके पिता हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) यूसुफ़ से बेहद मुहब्बत करते हैं और उन्हें सबसे ज़्यादा अहमियत देते हैं, तो उनके दिलों में ईर्ष्या और हसद ने जड़ पकड़ ली। उन्होंने आपस में साज़िश करते हुए कहा: "यूसुफ़ को क़त्ल कर दो या उसे किसी दूर और सुनसान ज़मीन पर फेंक आओ, ताकि तुम्हारे पिता का चेहरा (ध्यान और मुहब्बत) सिर्फ़ तुम्हारे लिए ख़ाली हो जाए — यानी पिता की सारी तवज्जोह और शफ़्क़त तुम्हारी तरफ़ मुड़ जाए। और उसके बाद, यानी यूसुफ़ के मामले से फ़ारिग़ होकर, तुम नेक लोग बन जाना — यानी अपने इस गुनाह के बाद तौबा कर लेना और अल्लाह से माफ़ी माँग लेना, ताकि तुम फिर से अच्छे बन जाओ।"

यह साज़िश शैतानी वसवसों का नतीजा थी। उन्होंने यह समझा कि यूसुफ़ को रास्ते से हटाने से पिता की मुहब्बत उन्हें मिल जाएगी, लेकिन वे भूल गए कि अल्लाह की मर्ज़ी के बिना कुछ नहीं होता, और अल्लाह का इंतज़ाम उनकी साज़िशों से बिल्कुल अलग था। उन्होंने अपने इस बुरे इरादे को "नेक बनने" की आड़ में पेश किया, जो दिखाता है कि इंसान अपने गुनाहों को सही ठहराने के लिए कितनी बहाने तलाश करता है, लेकिन अल्लाह के नज़दीक यह बहाने क़ाबिले-क़बूल नहीं।

फ़ायदे (सबक़):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि ईर्ष्या और हसद इंसान को इतना अंधा कर सकता है कि वह सबसे बड़े गुनाह — यहाँ तक कि क़त्ल — को भी जायज़ समझने लगता है। इसलिए हमें अपने दिल को हसद से पाक रखना चाहिए और अल्लाह से हिफ़ाज़त माँगनी चाहिए।
  2. यह सबक़ देती है कि अल्लाह की तदबीर इंसान की साज़िशों से बाला-तर है। भाइयों ने यूसुफ़ को मिटाने की कोशिश की, लेकिन अल्लाह ने उन्हें ऊँचा किया और उनकी साज़िश को नाकाम किया। हमें हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए।
  3. आयत में "तौबा" का ज़िक्र है — भाइयों ने गुनाह के बाद नेक बनने की बात कही। यह हमें सिखाता है कि अगर इंसान से कोई गुनाह हो जाए, तो उसे तौबा करके अल्लाह की तरफ़ लौटना चाहिए, क्योंकि अल्लाह तौबा क़बूल करने वाला है। लेकिन तौबा सच्चे दिल से होनी चाहिए, सिर्फ़ ज़ुबानी नहीं।
  4. यह आयत मुसलमानों को यह भी सिखाती है कि परिवार में मुहब्बत और इंसाफ़ के साथ पेश आना चाहिए। माता-पिता को चाहिए कि बच्चों के बीच भेदभाव न करें, और बच्चों को चाहिए कि वे आपसी मुहब्बत और भाईचारे को क़ायम रखें, न कि ईर्ष्या और रक़ाबत को।
  5. अंत में, यह क़िस्सा हमें बताता है कि अल्लाह अपने नेक बंदों की मदद करता है और उन्हें मुसीबतों से निकालकर इज़्ज़त देता है, बशर्ते वे सब्र करें और अल्लाह पर भरोसा रखें।


📜 आयत 7-11 — सूरा यूसुफ

7۞ لَّقَدْ كَانَ فِي يُوسُفَ وَإِخْوَتِهِ آيَاتٌ لِّلسَّائِلِينَ
(ऐ रसूल) यूसुफ और उनके भाइयों के किस्से में पूछने वाले (यहूद) के लिए (तुम्हारी नुबूवत) की यक़ीनन बहुत सी निशानियाँ हैं
8إِذْ قَالُوا لَيُوسُفُ وَأَخُوهُ أَحَبُّ إِلَىٰ أَبِينَا مِنَّا وَنَحْنُ عُصْبَةٌ إِنَّ أَبَانَا لَفِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
कि जब (यूसूफ के भाइयों ने) कहा कि बावजूद कि हमारी बड़ी जमाअत है फिर भी यूसुफ़ और उसका हकीक़ी भाई (इब्ने यामीन) हमारे वालिद के नज़दीक बहुत ज्यादा प्यारे हैं इसमें कुछ शक़ नहीं कि हमारे वालिद यक़ीनन सरीही (खुली हुई) ग़लती में पड़े हैं
9اقْتُلُوا يُوسُفَ أَوِ اطْرَحُوهُ أَرْضًا يَخْلُ لَكُمْ وَجْهُ أَبِيكُمْ وَتَكُونُوا مِن بَعْدِهِ قَوْمًا صَالِحِينَ
(ख़ैर तो अब मुनासिब ये है कि या तो) युसूफ को मार डालो या (कम से कम) उसको किसी जगह (चल कर) फेंक आओ तो अलबत्ता तुम्हारे वालिद की तवज्जो सिर्फ तुम्हारी तरफ हो जाएगा और उसके बाद तुम सबके सब (बाप की तवजज्जो से) भले आदमी हो जाओगें
10قَالَ قَائِلٌ مِّنْهُمْ لَا تَقْتُلُوا يُوسُفَ وَأَلْقُوهُ فِي غَيَابَتِ الْجُبِّ يَلْتَقِطْهُ بَعْضُ السَّيَّارَةِ إِن كُنتُمْ فَاعِلِينَ
उनमें से एक कहने वाला बोल उठा कि यूसुफ को जान से तो न मारो हाँ अगर तुमको ऐसा ही करना है तो उसको किसी अन्धे कुएँ में (ले जाकर) डाल दो कोई राहगीर उसे निकालकर ले जाएगा (और तुम्हारा मतलब हासिल हो जाएगा)
11قَالُوا يَا أَبَانَا مَا لَكَ لَا تَأْمَنَّا عَلَىٰ يُوسُفَ وَإِنَّا لَهُ لَنَاصِحُونَ
सब ने (याक़ूब से) कहा अब्बा जान आख़िर उसकी क्या वजह है कि आप यूसुफ के बारे में हमारा ऐतबार नहीं करते
यूसुफकुरान सूची
111आयत
मक्कीअवतरण स्थान
9आयत

अनुवाद — यूसुफ 9

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Wednesday, September 30, 2026

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