Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَوْلَا: क्यों नहीं / काश।
- آيَةٌ: निशानी, चमत्कार, प्रमाण।
- يُضِلُّ: गुमराह करता है।
- يَهْدِي: मार्गदर्शन करता है।
- أَنَابَ: रुजू हुआ, (अल्लाह की ओर) लौटा, तौबा की।
तफसीर (व्याख्या):
ये आयत उन काफिरों की उस मांग का उत्तर देती है जो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से कहते थे कि "उन पर उनके रब की ओर से कोई निशानी (चमत्कार) क्यों नहीं उतारी गई?" यानी वे जिद और हठधर्मी से मांग करते थे कि मूसा (अलैहिस्सलाम) की लाठी या ईसा (अलैहिस्सलाम) के मुर्दे जिलाने जैसा कोई प्रत्यक्ष चमत्कार दिखाया जाए।
अल्लाह तआला ने अपने नबी को आदेश दिया कि उन्हें जवाब दें: "निश्चय ही अल्लाह जिसे चाहता है गुमराह करता है और जो (उसकी ओर) रुजू होता है उसे अपनी ओर मार्गदर्शन करता है।" यानी हिदायत और गुमराही अल्लाह के हाथ में है, वह जिसे चाहे सीधा रास्ता दिखा दे और जिसे चाहे (उसकी हठधर्मिता और अंधेपन की वजह से) गुमराही में छोड़ दे। जो लोग सच्चे दिल से अल्लाह की ओर लौटते हैं, तौबा करते हैं और उसकी राह चाहते हैं, अल्लाह उन्हें हिदायत देता है। चमत्कारों की मांग करने वाले हठधर्मी लोगों के लिए चमत्कार भी फायदा नहीं देते, क्योंकि उनका दिल सच्चाई को कबूल करने के लिए तैयार नहीं होता। असली जरूरत दिल की रुजू और नीयत की सच्चाई है, न कि चमत्कारों का दिखना।
फायदे और सबक:
- हिदायत अल्लाह के हाथ में है, वह जिसे चाहे हिदायत दे और जिसे चाहे गुमराह करे, लेकिन यह उसकी हिकमत और इंसाफ पर आधारित है।
- चमत्कारों की मांग अक्सर जिद और हठधर्मिता से होती है, सच्ची तलाश से नहीं। इसलिए इंसान को चाहिए कि वह सच्चे दिल से अल्लाह की ओर रुजू करे।
- अल्लाह की रहमत उनके लिए है जो उसकी ओर लौटते हैं, तौबा करते हैं और उसकी राह पर चलने की कोशिश करते हैं।
- कुरान और इस्लाम का असली चमत्कार उसकी हिदायत और बदलती जिंदगियाँ हैं — जो कोई भी सच्चे दिल से इसकी ओर आता है, उसकी जिंदगी बदल जाती है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपनी जिद और अहंकार को छोड़कर अल्लाह के सामने झुकें, क्योंकि सच्ची कामयाबी उसी की राह पर चलने में है।
📜 आयत 25-29 — सूरा अर-राद
अनुवाद — अर-राद 27
सूरा अर-राद आयत 27 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिन लोगों ने कुफ्र एख़तियार किया वह कहते हैं…सूरा आयत 27/43 — सूरा अर-राद الرعد (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अर-राद सुनें, सूरा अर-राद अनुवाद, सूरा अर-राद mp3, सूरा अर-राद pdf. आयत 25–29. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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