अर-राद · 27/43
अनुवाद उच्चारण — सूरा अर-राद
وَيَقُولُ الَّذِينَ كَفَرُوا لَوْلَا أُنزِلَ عَلَيْهِ آيَةٌ مِّن رَّبِّهِ ۗ قُلْ إِنَّ اللَّهَ يُضِلُّ مَن يَشَاءُ وَيَهْدِي إِلَيْهِ مَنْ أَنَابَ ۝٢٧
Wa yaqoolul lazeena kafaroo law laaa unzila `alaihi Aayatum mir Rabbih; qul innal laaha yudillu mai yashaa`u wa yahdeee ilaihi man anaab
📖 हिंदी अर्थ
और जिन लोगों ने कुफ्र एख़तियार किया वह कहते हैं कि उस (शख्स यानि तुम) पर हमारी ख्वाहिश के मुवाफिक़ कोई मौजिज़ा उसके परवरदिगार की तरफ से क्यों नहीं नाज़िल होता तुम उनसे कह दो कि इसमें शक़ नहीं कि ख़ुदा जिसे चाहता है गुमराही में छोड़ देता है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَوْلَا: क्यों नहीं / काश।
  • آيَةٌ: निशानी, चमत्कार, प्रमाण।
  • يُضِلُّ: गुमराह करता है।
  • يَهْدِي: मार्गदर्शन करता है।
  • أَنَابَ: रुजू हुआ, (अल्लाह की ओर) लौटा, तौबा की।

तफसीर (व्याख्या):

ये आयत उन काफिरों की उस मांग का उत्तर देती है जो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से कहते थे कि "उन पर उनके रब की ओर से कोई निशानी (चमत्कार) क्यों नहीं उतारी गई?" यानी वे जिद और हठधर्मी से मांग करते थे कि मूसा (अलैहिस्सलाम) की लाठी या ईसा (अलैहिस्सलाम) के मुर्दे जिलाने जैसा कोई प्रत्यक्ष चमत्कार दिखाया जाए।

अल्लाह तआला ने अपने नबी को आदेश दिया कि उन्हें जवाब दें: "निश्चय ही अल्लाह जिसे चाहता है गुमराह करता है और जो (उसकी ओर) रुजू होता है उसे अपनी ओर मार्गदर्शन करता है।" यानी हिदायत और गुमराही अल्लाह के हाथ में है, वह जिसे चाहे सीधा रास्ता दिखा दे और जिसे चाहे (उसकी हठधर्मिता और अंधेपन की वजह से) गुमराही में छोड़ दे। जो लोग सच्चे दिल से अल्लाह की ओर लौटते हैं, तौबा करते हैं और उसकी राह चाहते हैं, अल्लाह उन्हें हिदायत देता है। चमत्कारों की मांग करने वाले हठधर्मी लोगों के लिए चमत्कार भी फायदा नहीं देते, क्योंकि उनका दिल सच्चाई को कबूल करने के लिए तैयार नहीं होता। असली जरूरत दिल की रुजू और नीयत की सच्चाई है, न कि चमत्कारों का दिखना।

फायदे और सबक:

  1. हिदायत अल्लाह के हाथ में है, वह जिसे चाहे हिदायत दे और जिसे चाहे गुमराह करे, लेकिन यह उसकी हिकमत और इंसाफ पर आधारित है।
  2. चमत्कारों की मांग अक्सर जिद और हठधर्मिता से होती है, सच्ची तलाश से नहीं। इसलिए इंसान को चाहिए कि वह सच्चे दिल से अल्लाह की ओर रुजू करे।
  3. अल्लाह की रहमत उनके लिए है जो उसकी ओर लौटते हैं, तौबा करते हैं और उसकी राह पर चलने की कोशिश करते हैं।
  4. कुरान और इस्लाम का असली चमत्कार उसकी हिदायत और बदलती जिंदगियाँ हैं — जो कोई भी सच्चे दिल से इसकी ओर आता है, उसकी जिंदगी बदल जाती है।
  5. यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपनी जिद और अहंकार को छोड़कर अल्लाह के सामने झुकें, क्योंकि सच्ची कामयाबी उसी की राह पर चलने में है।


📜 आयत 25-29 — सूरा अर-राद

25وَالَّذِينَ يَنقُضُونَ عَهْدَ اللَّهِ مِن بَعْدِ مِيثَاقِهِ وَيَقْطَعُونَ مَا أَمَرَ اللَّهُ بِهِ أَن يُوصَلَ وَيُفْسِدُونَ فِي الْأَرْضِ ۙ أُولَٰئِكَ لَهُمُ اللَّعْنَةُ وَلَهُمْ سُوءُ الدَّارِ
और जो लोग ख़ुदा से एहद व पैमान को पक्का करने के बाद तोड़ डालते हैं और जिन (तालुकात बाहमी) के क़ायम रखने का ख़ुदा ने हुक्म दिया है उन्हें क़तआ (तोड़ते) करते हैं और रुए ज़मीन पर फ़साद फैलाते फिरते हैं ऐसे ही लोग हैं जिनके लिए लानत है और ऐसे ही लोगों के वास्ते बड़ा घर (जहन्नुम) है
26اللَّهُ يَبْسُطُ الرِّزْقَ لِمَن يَشَاءُ وَيَقْدِرُ ۚ وَفَرِحُوا بِالْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَمَا الْحَيَاةُ الدُّنْيَا فِي الْآخِرَةِ إِلَّا مَتَاعٌ
और ख़ुदा ही जिसके लिए चाहता है रोज़ी को बढ़ा देता है और जिसके लिए चाहता है तंग करता है और ये लोग दुनिया की (चन्द रोज़ा) ज़िन्दगी पर बहुत निहाल हैं हालॉकि दुनियावी ज़िन्दगी (नईम) आख़िरत के मुक़ाबिल में बिल्कुल बेहकीक़त चीज़ है
27وَيَقُولُ الَّذِينَ كَفَرُوا لَوْلَا أُنزِلَ عَلَيْهِ آيَةٌ مِّن رَّبِّهِ ۗ قُلْ إِنَّ اللَّهَ يُضِلُّ مَن يَشَاءُ وَيَهْدِي إِلَيْهِ مَنْ أَنَابَ
और जिन लोगों ने कुफ्र एख़तियार किया वह कहते हैं कि उस (शख्स यानि तुम) पर हमारी ख्वाहिश के मुवाफिक़ कोई मौजिज़ा उसके परवरदिगार की तरफ से क्यों नहीं नाज़िल होता तुम उनसे कह दो कि इसमें शक़ नहीं कि ख़ुदा जिसे चाहता है गुमराही में छोड़ देता है
28الَّذِينَ آمَنُوا وَتَطْمَئِنُّ قُلُوبُهُم بِذِكْرِ اللَّهِ ۗ أَلَا بِذِكْرِ اللَّهِ تَطْمَئِنُّ الْقُلُوبُ
और जिसने उसकी तरफ रुज़ू की उसे अपनी तरफ पहुँचने की राह दिखाता है (ये) वह लोग हैं जिन्होंने ईमान कुबूल किया और उनके दिलों को ख़ुदा की चाह से तसल्ली हुआ करती है
29الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ طُوبَىٰ لَهُمْ وَحُسْنُ مَآبٍ
जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए उनके वास्ते (बेहश्त में) तूबा (दरख्त) और ख़ुशहाली और अच्छा अन्जाम है
अर-रादकुरान सूची
43आयत
मदनीअवतरण स्थान
27आयत

अनुवाद — अर-राद 27

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Friday, October 2, 2026

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