Wa yaqoolul lazeena kafaroo law laaa unzila `alaihi Aayatum mir Rabbih; qul innal laaha yudillu mai yashaa`u wa yahdeee ilaihi man anaab
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
और जिन लोगों ने कुफ्र एख़तियार किया वह कहते हैं कि उस (शख्स यानि तुम) पर हमारी ख्वाहिश के मुवाफिक़ कोई मौजिज़ा उसके परवरदिगार की तरफ से क्यों नहीं नाज़िल होता तुम उनसे कह दो कि इसमें शक़ नहीं कि ख़ुदा जिसे चाहता है गुमराही में छोड़ देता है
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اور کافر کہتے ہیں کہ اس (پیغمبر) پر اس کے پروردگار کی طرف سے کوئی نشانی کیوں نازل نہیں ہوئی۔ کہہ دو کہ خدا جسے چاہتا ہے گمراہ کرتا ہے اور جو (اس کی طرف) رجوع ہوتا ہے اس کو اپنی طرف کا رستہ دکھاتا ہے
ये आयत उन काफिरों की उस मांग का उत्तर देती है जो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से कहते थे कि "उन पर उनके रब की ओर से कोई निशानी (चमत्कार) क्यों नहीं उतारी गई?" यानी वे जिद और हठधर्मी से मांग करते थे कि मूसा (अलैहिस्सलाम) की लाठी या ईसा (अलैहिस्सलाम) के मुर्दे जिलाने जैसा कोई प्रत्यक्ष चमत्कार दिखाया जाए।
अल्लाह तआला ने अपने नबी को आदेश दिया कि उन्हें जवाब दें: "निश्चय ही अल्लाह जिसे चाहता है गुमराह करता है और जो (उसकी ओर) रुजू होता है उसे अपनी ओर मार्गदर्शन करता है।" यानी हिदायत और गुमराही अल्लाह के हाथ में है, वह जिसे चाहे सीधा रास्ता दिखा दे और जिसे चाहे (उसकी हठधर्मिता और अंधेपन की वजह से) गुमराही में छोड़ दे। जो लोग सच्चे दिल से अल्लाह की ओर लौटते हैं, तौबा करते हैं और उसकी राह चाहते हैं, अल्लाह उन्हें हिदायत देता है। चमत्कारों की मांग करने वाले हठधर्मी लोगों के लिए चमत्कार भी फायदा नहीं देते, क्योंकि उनका दिल सच्चाई को कबूल करने के लिए तैयार नहीं होता। असली जरूरत दिल की रुजू और नीयत की सच्चाई है, न कि चमत्कारों का दिखना।
फायदे और सबक:
हिदायत अल्लाह के हाथ में है, वह जिसे चाहे हिदायत दे और जिसे चाहे गुमराह करे, लेकिन यह उसकी हिकमत और इंसाफ पर आधारित है।
चमत्कारों की मांग अक्सर जिद और हठधर्मिता से होती है, सच्ची तलाश से नहीं। इसलिए इंसान को चाहिए कि वह सच्चे दिल से अल्लाह की ओर रुजू करे।
अल्लाह की रहमत उनके लिए है जो उसकी ओर लौटते हैं, तौबा करते हैं और उसकी राह पर चलने की कोशिश करते हैं।
कुरान और इस्लाम का असली चमत्कार उसकी हिदायत और बदलती जिंदगियाँ हैं — जो कोई भी सच्चे दिल से इसकी ओर आता है, उसकी जिंदगी बदल जाती है।
यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपनी जिद और अहंकार को छोड़कर अल्लाह के सामने झुकें, क्योंकि सच्ची कामयाबी उसी की राह पर चलने में है।
और जिन लोगों ने कुफ्र एख़तियार किया वह कहते हैं कि उस (शख्स यानि तुम) पर हमारी ख्वाहिश के मुवाफिक़ कोई मौजिज़ा उसके परवरदिगार की तरफ से क्यों नहीं नाज़िल होता तुम उनसे कह दो कि इसमें शक़ नहीं कि ख़ुदा जिसे चाहता है गुमराही में छोड़ देता है
और जो लोग ख़ुदा से एहद व पैमान को पक्का करने के बाद तोड़ डालते हैं और जिन (तालुकात बाहमी) के क़ायम रखने का ख़ुदा ने हुक्म दिया है उन्हें क़तआ (तोड़ते) करते हैं और रुए ज़मीन पर फ़साद फैलाते फिरते हैं ऐसे ही लोग हैं जिनके लिए लानत है और ऐसे ही लोगों के वास्ते बड़ा घर (जहन्नुम) है
और ख़ुदा ही जिसके लिए चाहता है रोज़ी को बढ़ा देता है और जिसके लिए चाहता है तंग करता है और ये लोग दुनिया की (चन्द रोज़ा) ज़िन्दगी पर बहुत निहाल हैं हालॉकि दुनियावी ज़िन्दगी (नईम) आख़िरत के मुक़ाबिल में बिल्कुल बेहकीक़त चीज़ है
और जिन लोगों ने कुफ्र एख़तियार किया वह कहते हैं कि उस (शख्स यानि तुम) पर हमारी ख्वाहिश के मुवाफिक़ कोई मौजिज़ा उसके परवरदिगार की तरफ से क्यों नहीं नाज़िल होता तुम उनसे कह दो कि इसमें शक़ नहीं कि ख़ुदा जिसे चाहता है गुमराही में छोड़ देता है
और जिसने उसकी तरफ रुज़ू की उसे अपनी तरफ पहुँचने की राह दिखाता है (ये) वह लोग हैं जिन्होंने ईमान कुबूल किया और उनके दिलों को ख़ुदा की चाह से तसल्ली हुआ करती है
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