अर-राद · 28/43
अनुवाद उच्चारण — अर-राद
الَّذِينَ آمَنُوا وَتَطْمَئِنُّ قُلُوبُهُم بِذِكْرِ اللَّهِ ۗ أَلَا بِذِكْرِ اللَّهِ تَطْمَئِنُّ الْقُلُوبُ ۝٢٨
Allazeena aamanoo wa tatma`innu quloobuhum bizikril laah; alaa bizikril laahi tatma`innul quloob
📖 हिंदी अर्थ
और जिसने उसकी तरफ रुज़ू की उसे अपनी तरफ पहुँचने की राह दिखाता है (ये) वह लोग हैं जिन्होंने ईमान कुबूल किया और उनके दिलों को ख़ुदा की चाह से तसल्ली हुआ करती है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • تَطْمَئِنُّ: सुकून और शांति प्राप्त करना, चैन पाना।
  • ذِكْرِ اللَّهِ: अल्लाह की याद, उसका नाम लेना, उसकी तस्बीह-तहलील करना, क़ुरआन पढ़ना और सुनना।

तफ़सीर:

यह आयत उन लोगों का वर्णन करती है जिन्हें अल्लाह सीधा रास्ता दिखाता है। वे वे लोग हैं जो ईमान लाए और उनके दिल अल्लाह की याद से सुकून और शांति पाते हैं। जब वे अल्लाह का ज़िक्र करते हैं, उसकी तस्बीह करते हैं, उसकी हम्द-ओ-सना बयान करते हैं, क़ुरआन की आयतें पढ़ते या सुनते हैं, तो उनके दिलों में एक अजीब सी तसल्ली और इत्मिनान पैदा होता है। उनका दिल अल्लाह की याद में ही चैन पाता है, क्योंकि वे जानते हैं कि अल्लाह ही उनका रब है, उसी पर वे भरोसा करते हैं और उसी की तरफ़ रुजू करते हैं।

फिर अल्लाह तआला एक सामान्य सच्चाई बयान करता है: "सुन लो! अल्लाह की याद से ही दिलों को सुकून मिलता है।" यानी यह कोई ख़ास बात नहीं, बल्कि एक आम हक़ीक़त है। दिलों की बेचैनी, घबराहट और परेशानी का इलाज सिर्फ़ अल्लाह की याद में है। जब इंसान अल्लाह को याद करता है, उसकी क़ुदरत और रहमत पर ग़ौर करता है, तो उसके दिल में यक़ीन पैदा होता है और वह हर हाल में संतुष्ट रहता है। यह सुकून दुनिया की किसी भी चीज़ से हासिल नहीं हो सकता—न माल से, न औलाद से, न ओहदे से। सिर्फ़ अल्लाह की याद ही दिल को असली चैन देती है।

फ़ायदे:

  • इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि असली सुकून और दिल की शांति सिर्फ़ अल्लाह की याद में है। दुनिया की दौलत और चीज़ें कुछ देर का सुकून दे सकती हैं, लेकिन दिल का असली चैन अल्लाह के ज़िक्र में छिपा है।
  • यह आयत हमें तरग़ीब देती है कि हम अपने दिनचर्या में अल्लाह के ज़िक्र को शामिल करें—सुबह-शाम की तस्बीहें, क़ुरआन की तिलावत, और हर हाल में अल्लाह को याद रखना। इससे हमारे दिल मज़बूत होंगे और ज़िंदगी की मुश्किलों में हमें सब्र और इत्मिनान मिलेगा।
  • यह बात हमें इस्लाम की ख़ूबसूरती दिखाती है कि यह धर्म इंसान को सिर्फ़ इबादत का हुक्म नहीं देता, बल्कि उसे दिल का सुकून और ज़िंदगी की राह में रहनुमाई भी देता है। जो लोग अल्लाह से जुड़े रहते हैं, उन्हें कभी अकेलापन या बेचैनी महसूस नहीं होती।
🎧 सुनें

📜 आयत 26-30 — अर-राद

26اللَّهُ يَبْسُطُ الرِّزْقَ لِمَن يَشَاءُ وَيَقْدِرُ ۚ وَفَرِحُوا بِالْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَمَا الْحَيَاةُ الدُّنْيَا فِي الْآخِرَةِ إِلَّا مَتَاعٌ
और ख़ुदा ही जिसके लिए चाहता है रोज़ी को बढ़ा देता है और जिसके लिए चाहता है तंग करता है और ये लोग दुनिया की (चन्द रोज़ा) ज़िन्दगी पर बहुत निहाल हैं हालॉकि दुनियावी ज़िन्दगी (नईम) आख़िरत के मुक़ाबिल में बिल्कुल बेहकीक़त चीज़ है
27وَيَقُولُ الَّذِينَ كَفَرُوا لَوْلَا أُنزِلَ عَلَيْهِ آيَةٌ مِّن رَّبِّهِ ۗ قُلْ إِنَّ اللَّهَ يُضِلُّ مَن يَشَاءُ وَيَهْدِي إِلَيْهِ مَنْ أَنَابَ
और जिन लोगों ने कुफ्र एख़तियार किया वह कहते हैं कि उस (शख्स यानि तुम) पर हमारी ख्वाहिश के मुवाफिक़ कोई मौजिज़ा उसके परवरदिगार की तरफ से क्यों नहीं नाज़िल होता तुम उनसे कह दो कि इसमें शक़ नहीं कि ख़ुदा जिसे चाहता है गुमराही में छोड़ देता है
28الَّذِينَ آمَنُوا وَتَطْمَئِنُّ قُلُوبُهُم بِذِكْرِ اللَّهِ ۗ أَلَا بِذِكْرِ اللَّهِ تَطْمَئِنُّ الْقُلُوبُ
और जिसने उसकी तरफ रुज़ू की उसे अपनी तरफ पहुँचने की राह दिखाता है (ये) वह लोग हैं जिन्होंने ईमान कुबूल किया और उनके दिलों को ख़ुदा की चाह से तसल्ली हुआ करती है
29الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ طُوبَىٰ لَهُمْ وَحُسْنُ مَآبٍ
जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए उनके वास्ते (बेहश्त में) तूबा (दरख्त) और ख़ुशहाली और अच्छा अन्जाम है
30كَذَٰلِكَ أَرْسَلْنَاكَ فِي أُمَّةٍ قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِهَا أُمَمٌ لِّتَتْلُوَ عَلَيْهِمُ الَّذِي أَوْحَيْنَا إِلَيْكَ وَهُمْ يَكْفُرُونَ بِالرَّحْمَٰنِ ۚ قُلْ هُوَ رَبِّي لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ عَلَيْهِ تَوَكَّلْتُ وَإِلَيْهِ مَتَابِ
(ऐ रसूल जिस तरह हमने और पैग़म्बर भेजे थे) उसी तरह हमने तुमको उस उम्मत में भेजा है जिससे पहले और भी बहुत सी उम्मते गुज़र चुकी हैं -ताकि तुम उनके सामने जो क़ुरान हमने वही के ज़रिए से तुम्हारे पास भेजा है उन्हें पढ़ कर सुना दो और ये लोग (कुछ तुम्हारे ही नहीं बल्कि सिरे से) ख़ुदा ही के मुन्किर हैं तुम कह दो कि वही मेरा परवरदिगार है उसके सिवा कोई माबूद नहीं मै उसी पर भरोसा रखता हूँ और उसी तरफ रुज़ू करता हूँ
अर-रादकुरान सूची
43आयत
मदनीRevelation
28आयत

अनुवाद — अर-राद 28

सूरा अर-राद आयत 28 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिसने उसकी तरफ रुज़ू की उसे अपनी तरफ पहुँचने…

सूरा आयत 28/43 — अर-राद الرعد (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-राद सुनें, अर-राद अनुवाद, अर-राद mp3, अर-राद pdf. आयत 26–30. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए