इब्राहीम · 36/52
अनुवाद उच्चारण — इब्राहीम
رَبِّ إِنَّهُنَّ أَضْلَلْنَ كَثِيرًا مِّنَ النَّاسِ ۖ فَمَن تَبِعَنِي فَإِنَّهُ مِنِّي ۖ وَمَنْ عَصَانِي فَإِنَّكَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ ۝٣٦
Rabbi innahunna adlalna kaseeram minan naasi faman tabi`anee fa innahoo minnee wa man `asaanee fa innaka Ghafoorur Raheem
📖 हिंदी अर्थ
ऐ मेरे पालने वाले इसमें शक़ नहीं कि इन बुतों ने बहुतेरे लोगों को गुमराह बना छोड़ा तो जो शख़्श मेरी पैरवी करे तो वह मुझ से है और जिसने मेरी नाफ़रमानी की (तो तुझे एख्तेयार है) तू तो बड़ा बख्शने वपला मेहरबान है)
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَضْلَلْنَ: गुमराह किया, पथभ्रष्ट किया।
  • تَبِعَنِي: मेरा अनुसरण किया, मेरी पैरवी की।
  • عَصَانِي: मेरी अवज्ञा की, मेरे विरुद्ध गया।
  • غَفُورٌ رَّحِيمٌ: अत्यंत क्षमाशील, अत्यंत दयावान।

तफ़सीर (व्याख्या):

हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपने रब से दुआ करते हुए कहा: "ऐ मेरे रब! इन मूर्तियों ने बहुत से लोगों को गुमराह कर दिया, क्योंकि लोगों ने इन्हें पूजना शुरू कर दिया और ये उनके लिए सच्चे रास्ते से भटकने का कारण बनीं। ये मूर्तियाँ स्वयं कुछ नहीं कर सकतीं, लेकिन इनके कारण लोग शिर्क में पड़ गए और सीधे मार्ग से दूर हो गए।"

फिर उन्होंने कहा: "तो जिसने मेरा अनुसरण किया—यानी एकेश्वरवाद (तौहीद) और तेरी इबादत पर कायम रहा—वह मुझसे है, यानी मेरे दीन और मेरे मार्ग पर चलने वाला है। और जिसने मेरी अवज्ञा की—यानी मेरे तरीके पर नहीं चला और शिर्क या अन्य पापों में लिप्त रहा—तो ऐ मेरे रब! तू क्षमाशील और दयावान है। तू जिसे चाहे क्षमा कर दे, और तेरी रहमत उन लोगों को भी ढक लेती है जो तौबा करके तेरी ओर लौट आते हैं।"

यह दुआ हज़रत इब्राहीम की उम्मत के लिए रहमत और शफ़क़त का प्रतीक है, क्योंकि उन्होंने अपने रब से यह नहीं माँगा कि अवज्ञा करने वालों को सज़ा दी जाए, बल्कि उनके लिए क्षमा और रहमत की दुआ की।

फ़ायदे (सबक):

  1. इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि गुमराही का असली कारण शिर्क और अल्लाह के सिवा किसी और की इबादत है। मूर्तियाँ या कोई भी माख़लूक़ (प्राणी) किसी को गुमराह नहीं कर सकता, बल्कि लोग स्वयं अपनी गलतफहमी और अज्ञानता के कारण भटक जाते हैं।
  2. हज़रत इब्राहीम का यह व्यवहार हमें सिखाता है कि नबी और अल्लाह के प्यारे बंदे अपनी उम्मत के लिए नरमी और रहमत का रास्ता अपनाते हैं, और गुनाहगारों के लिए भी क्षमा की दुआ करते हैं।
  3. यह आयत हमें अल्लाह की असीम क्षमा और रहमत की याद दिलाती है—चाहे इंसान कितना ही बड़ा गुनाहगार क्यों न हो, अगर वह सच्चे दिल से तौबा कर ले तो अल्लाह उसे माफ कर सकता है।
  4. इस्लाम सिखाता है कि अल्लाह के रास्ते पर चलने वालों को एक-दूसरे से जोड़ने वाला रिश्ता सिर्फ ईमान और अच्छे कर्म हैं, न कि खून या जाति का रिश्ता। जो कोई भी अल्लाह की इबादत करता है, वह इब्राहीम अलैहिस्सलाम की उम्मत का हिस्सा है।
  5. यह दुआ हमें सिखाती है कि हमें अपने बच्चों और आने वाली पीढ़ियों के लिए दुआ करनी चाहिए कि वे सीधे रास्ते पर चलें, और अगर वे भटक जाएँ तो उनके लिए रहमत और हिदायत की दुआ करें, न कि उन्हें ठुकरा दें।
🎧 सुनें

📜 आयत 34-38 — इब्राहीम

34وَآتَاكُم مِّن كُلِّ مَا سَأَلْتُمُوهُ ۚ وَإِن تَعُدُّوا نِعْمَتَ اللَّهِ لَا تُحْصُوهَا ۗ إِنَّ الْإِنسَانَ لَظَلُومٌ كَفَّارٌ
(और अपनी ज़रुरत के मुवाफिक) जो कुछ तुमने उससे माँगा उसमें से (तुम्हारी ज़रूरत भर) तुम्हे दिया और तुम ख़ुदा की नेमतो गिनती करना चाहते हो तो गिन नहीं सकते हो तू बड़ा बे इन्साफ नाशुक्रा है
35وَإِذْ قَالَ إِبْرَاهِيمُ رَبِّ اجْعَلْ هَٰذَا الْبَلَدَ آمِنًا وَاجْنُبْنِي وَبَنِيَّ أَن نَّعْبُدَ الْأَصْنَامَ
और (वह वक्त याद करो) जब इबराहीम ने (ख़ुदा से) अर्ज़ की थी कि परवरदिगार इस शहर (मक्के) को अमन व अमान की जगह बना दे और मुझे और मेरी औलाद को इस बात को बचा ले कि बुतों की परसतिश करने लगे
36رَبِّ إِنَّهُنَّ أَضْلَلْنَ كَثِيرًا مِّنَ النَّاسِ ۖ فَمَن تَبِعَنِي فَإِنَّهُ مِنِّي ۖ وَمَنْ عَصَانِي فَإِنَّكَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
ऐ मेरे पालने वाले इसमें शक़ नहीं कि इन बुतों ने बहुतेरे लोगों को गुमराह बना छोड़ा तो जो शख़्श मेरी पैरवी करे तो वह मुझ से है और जिसने मेरी नाफ़रमानी की (तो तुझे एख्तेयार है) तू तो बड़ा बख्शने वपला मेहरबान है)
37رَّبَّنَا إِنِّي أَسْكَنتُ مِن ذُرِّيَّتِي بِوَادٍ غَيْرِ ذِي زَرْعٍ عِندَ بَيْتِكَ الْمُحَرَّمِ رَبَّنَا لِيُقِيمُوا الصَّلَاةَ فَاجْعَلْ أَفْئِدَةً مِّنَ النَّاسِ تَهْوِي إِلَيْهِمْ وَارْزُقْهُم مِّنَ الثَّمَرَاتِ لَعَلَّهُمْ يَشْكُرُونَ
ऐ हमारे पालने वाले मैने तेरे मुअज़िज़ (इज्ज़त वाले) घर (काबे) के पास एक बेखेती के (वीरान) बियाबान (मक्का) में अपनी कुछ औलाद को (लाकर) बसाया है ताकि ऐ हमारे पालने वाले ये लोग बराबर यहाँ नमाज़ पढ़ा करें तो तू कुछ लोगों के दिलों को उनकी तरफ माएल कर (ताकि वह यहाँ आकर आबाद हों) और उन्हें तरह तरह के फलों से रोज़ी अता कर ताकि ये लोग (तेरा) शुक्र करें
38رَبَّنَا إِنَّكَ تَعْلَمُ مَا نُخْفِي وَمَا نُعْلِنُ ۗ وَمَا يَخْفَىٰ عَلَى اللَّهِ مِن شَيْءٍ فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي السَّمَاءِ
ऐ हमारे पालने वाले जो कुछ हम छिपाते हैं और जो कुछ ज़ाहिर करते हैं तू (सबसे) खूब वाक़िफ है और ख़ुदा से तो कोई चीज़ छिपी नहीं (न) ज़मीन में और न आसमान में उस ख़ुदा का (लाख लाख) शुक्र है
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अनुवाद — इब्राहीम 36

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Tuesday, August 18, 2026

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