Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَضْلَلْنَ: गुमराह किया, पथभ्रष्ट किया।
- تَبِعَنِي: मेरा अनुसरण किया, मेरी पैरवी की।
- عَصَانِي: मेरी अवज्ञा की, मेरे विरुद्ध गया।
- غَفُورٌ رَّحِيمٌ: अत्यंत क्षमाशील, अत्यंत दयावान।
तफ़सीर (व्याख्या):
हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपने रब से दुआ करते हुए कहा: "ऐ मेरे रब! इन मूर्तियों ने बहुत से लोगों को गुमराह कर दिया, क्योंकि लोगों ने इन्हें पूजना शुरू कर दिया और ये उनके लिए सच्चे रास्ते से भटकने का कारण बनीं। ये मूर्तियाँ स्वयं कुछ नहीं कर सकतीं, लेकिन इनके कारण लोग शिर्क में पड़ गए और सीधे मार्ग से दूर हो गए।"
फिर उन्होंने कहा: "तो जिसने मेरा अनुसरण किया—यानी एकेश्वरवाद (तौहीद) और तेरी इबादत पर कायम रहा—वह मुझसे है, यानी मेरे दीन और मेरे मार्ग पर चलने वाला है। और जिसने मेरी अवज्ञा की—यानी मेरे तरीके पर नहीं चला और शिर्क या अन्य पापों में लिप्त रहा—तो ऐ मेरे रब! तू क्षमाशील और दयावान है। तू जिसे चाहे क्षमा कर दे, और तेरी रहमत उन लोगों को भी ढक लेती है जो तौबा करके तेरी ओर लौट आते हैं।"
यह दुआ हज़रत इब्राहीम की उम्मत के लिए रहमत और शफ़क़त का प्रतीक है, क्योंकि उन्होंने अपने रब से यह नहीं माँगा कि अवज्ञा करने वालों को सज़ा दी जाए, बल्कि उनके लिए क्षमा और रहमत की दुआ की।
फ़ायदे (सबक):
- इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि गुमराही का असली कारण शिर्क और अल्लाह के सिवा किसी और की इबादत है। मूर्तियाँ या कोई भी माख़लूक़ (प्राणी) किसी को गुमराह नहीं कर सकता, बल्कि लोग स्वयं अपनी गलतफहमी और अज्ञानता के कारण भटक जाते हैं।
- हज़रत इब्राहीम का यह व्यवहार हमें सिखाता है कि नबी और अल्लाह के प्यारे बंदे अपनी उम्मत के लिए नरमी और रहमत का रास्ता अपनाते हैं, और गुनाहगारों के लिए भी क्षमा की दुआ करते हैं।
- यह आयत हमें अल्लाह की असीम क्षमा और रहमत की याद दिलाती है—चाहे इंसान कितना ही बड़ा गुनाहगार क्यों न हो, अगर वह सच्चे दिल से तौबा कर ले तो अल्लाह उसे माफ कर सकता है।
- इस्लाम सिखाता है कि अल्लाह के रास्ते पर चलने वालों को एक-दूसरे से जोड़ने वाला रिश्ता सिर्फ ईमान और अच्छे कर्म हैं, न कि खून या जाति का रिश्ता। जो कोई भी अल्लाह की इबादत करता है, वह इब्राहीम अलैहिस्सलाम की उम्मत का हिस्सा है।
- यह दुआ हमें सिखाती है कि हमें अपने बच्चों और आने वाली पीढ़ियों के लिए दुआ करनी चाहिए कि वे सीधे रास्ते पर चलें, और अगर वे भटक जाएँ तो उनके लिए रहमत और हिदायत की दुआ करें, न कि उन्हें ठुकरा दें।
📜 आयत 34-38 — सूरा इब्राहीम
अनुवाद — इब्राहीम 36
सूरा इब्राहीम आयत 36 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ मेरे पालने वाले इसमें शक़ नहीं कि इन बुतों…सूरा आयत 36/52 — सूरा इब्राहीम إبراهيم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा इब्राहीम सुनें, सूरा इब्राहीम अनुवाद, सूरा इब्राहीम mp3, सूरा इब्राहीम pdf. आयत 34–38. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा इब्राहीम
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


