इब्राहीम · 48/52
अनुवाद उच्चारण — इब्राहीम
يَوْمَ تُبَدَّلُ الْأَرْضُ غَيْرَ الْأَرْضِ وَالسَّمَاوَاتُ ۖ وَبَرَزُوا لِلَّهِ الْوَاحِدِ الْقَهَّارِ ۝٤٨
Yawma tubaddalul ardu ghairal ardi wassamaawaatu wa barazoo lillaahil Waahidil Qahhaar
📖 हिंदी अर्थ
(मगर कब) जिस दिन ये ज़मीन बदलकर दूसरी ज़मीन कर दी जाएगी और (इसी तरह) आसमान (भी बदल दिए जाएँगें) और सब लोग यकता क़हार (ज़बरदस्त) ख़ुदा के रुबरु (अपनी अपनी जगह से) निकल खड़े होगें
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تُبَدَّلُ الْأَرْضُ غَيْرَ الْأَرْضِ: धरती को बदलकर दूसरी धरती बना दिया जाएगा।
  • وَبَرَزُوا: वे (सारे लोग) निकल आएंगे / प्रकट हो जाएंगे।
  • الْوَاحِدِ الْقَهَّارِ: अकेला (जिसका कोई साझी नहीं) और सब पर विजय पाने वाला।

तफ़सीर:

यह आयत उस भयानक दिन का वर्णन कर रही है जब अल्लाह अपने दुश्मनों से बदला लेगा। वह दिन ऐसा होगा जब यह धरती बदल दी जाएगी और उसकी जगह एक दूसरी धरती ला दी जाएगी जो बिल्कुल सफेद और शुद्ध होगी, जैसे चांदी। इसी तरह आसमान भी बदल दिए जाएंगे—उनका सूरज और चाँद समाप्त कर दिए जाएंगे, और वे पिघले हुए तेल या तांबे की तरह हो जाएंगे। फिर सभी लोग अपनी कब्रों से जीवित होकर निकलेंगे और अपने कर्मों के साथ अल्लाह के सामने खड़े होंगे। वह अल्लाह जो अकेला है, जिसका कोई साझी नहीं, और जो हर चीज़ पर पूर्ण विजय रखता है—कोई उसके सामने टिक नहीं सकता, न कोई उसके फैसले को टाल सकता है। वह सब पर ग़ालिब है और उस पर कोई ग़ालिब नहीं। उस दिन सारी मख़लूक़ात (सृष्टि) उसके सामने हाज़िर होगी और हर कोई अपने अच्छे या बुरे कर्मों का हिसाब देगा।

फ़ायदे:

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि यह दुनिया हमेशा नहीं रहेगी, बल्कि एक दिन पूरी कायनात बदल दी जाएगी। यह हमें याद दिलाती है कि हमारा असली घर आख़िरत है, इसलिए हमें इस दुनिया के अस्थायी सुखों में मग्न नहीं हो जाना चाहिए। यह आयत हमें अल्लाह की अज़मत और उसकी कुदरत का एहसास कराती है कि वह जब चाहे पूरी दुनिया को बदल सकता है। साथ ही, यह हमें उस दिन के लिए तैयारी करने की तरग़ीब देती है—नेक काम करने, अल्लाह की इबादत करने और उसके हुक्मों पर चलने की, ताकि उस दिन हमारा हिसाब आसान हो और हम उस अज़ाब से बच जाएं जो काफ़िरों और गुनाहगारों के लिए तैयार है। यह आयत हमें अल्लाह के सामने पेश होने की हक़ीक़त पर ईमान लाने की ताक़त देती है और हमारे दिलों में उसकी महानता का डर और उसकी रहमत की उम्मीद पैदा करती है।

🎧 सुनें

📜 आयत 46-50 — इब्राहीम

46وَقَدْ مَكَرُوا مَكْرَهُمْ وَعِندَ اللَّهِ مَكْرُهُمْ وَإِن كَانَ مَكْرُهُمْ لِتَزُولَ مِنْهُ الْجِبَالُ
और वह लोग अपनी चालें चलते हैं (और कभी बाज़ न आए) हालॉकि उनकी सब हालतें खुदा की नज़र में थी और अगरचे उनकी मक्कारियाँ (उस गज़ब की) थीं कि उन से पहाड़ (अपनी जगह से) हट जाये
47فَلَا تَحْسَبَنَّ اللَّهَ مُخْلِفَ وَعْدِهِ رُسُلَهُ ۗ إِنَّ اللَّهَ عَزِيزٌ ذُو انتِقَامٍ
तो तुम ये ख्याल (भी) न करना कि ख़ुदा अपने रसूलों से ख़िलाफ वायदा करेगा इसमें शक़ नहीं कि ख़ुदा (सबसे) ज़बरदस्त बदला लेने वाला है
48يَوْمَ تُبَدَّلُ الْأَرْضُ غَيْرَ الْأَرْضِ وَالسَّمَاوَاتُ ۖ وَبَرَزُوا لِلَّهِ الْوَاحِدِ الْقَهَّارِ
(मगर कब) जिस दिन ये ज़मीन बदलकर दूसरी ज़मीन कर दी जाएगी और (इसी तरह) आसमान (भी बदल दिए जाएँगें) और सब लोग यकता क़हार (ज़बरदस्त) ख़ुदा के रुबरु (अपनी अपनी जगह से) निकल खड़े होगें
49وَتَرَى الْمُجْرِمِينَ يَوْمَئِذٍ مُّقَرَّنِينَ فِي الْأَصْفَادِ
और तुम उस दिन गुनेहगारों को देखोगे कि ज़ज़ीरों मे जकड़े हुए होगें
50سَرَابِيلُهُم مِّن قَطِرَانٍ وَتَغْشَىٰ وُجُوهَهُمُ النَّارُ
उनके (बदन के) कपड़े क़तरान (तारकोल) के होगे और उनके चेहरों को आग (हर तरफ से) ढाके होगी
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अनुवाद — इब्राहीम 48

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Tuesday, August 18, 2026

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