इब्राहीम · 49/52
अनुवाद उच्चारण — इब्राहीम
وَتَرَى الْمُجْرِمِينَ يَوْمَئِذٍ مُّقَرَّنِينَ فِي الْأَصْفَادِ ۝٤٩
Wa taral mujrimeena Yawma `izim muqarraneena filasfaad
📖 हिंदी अर्थ
और तुम उस दिन गुनेहगारों को देखोगे कि ज़ज़ीरों मे जकड़े हुए होगें

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مُقَرَّنِينَ: एक-दूसरे के साथ जोड़ दिए गए, या हाथ-पैर गर्दन से बाँध दिए गए।
  • الأَصْفَادِ: यह 'صَفَد' का बहुवचन है, जिसका अर्थ है बेड़ियाँ, ज़ंजीरें और वे रस्सियाँ जिनसे कैदी को बाँधा जाता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप उस दिन (क़ियामत के दिन) अपराधियों को देखेंगे कि वे ज़ंजीरों और बेड़ियों में जकड़े हुए होंगे। उनके हाथ और पैर उनकी गर्दनों के साथ जोड़ दिए जाएँगे, और उन्हें एक-दूसरे के साथ भी बाँध दिया जाएगा। यह उनकी सज़ा का एक हिस्सा होगा, जो उनके अत्याचार और कुकर्मों का नतीजा होगा। कुछ मुफ़स्सिरों ने कहा है कि उन्हें उनके साथियों (शैतानों) के साथ जोड़ दिया जाएगा, और कुछ ने कहा है कि उनके हाथ-पैर उनकी गर्दनों से बेड़ियों में जकड़ दिए जाएँगे। यह सब उनके अपमान और ज़िल्लत को बढ़ाने के लिए होगा, ताकि वे अपने किए की सज़ा का पूरा अनुभव करें।

यह दृश्य उस दिन होगा जब धरती और आसमान बदल दिए जाएँगे, और सभी लोग अपने-अपने कर्मों के अनुसार हाज़िर होंगे। अपराधी, जिन्होंने दुनिया में अल्लाह के आदेशों की अवहेलना की और अपनी मनमानी की, वे इस दिन बेड़ियों में जकड़े हुए होंगे, और उनके चेहरे आग से ढके होंगे, उनके कपड़े क़तरान (एक ज्वलनशील पदार्थ) के होंगे।

फ़ायदे (सबक़):

  1. यह आयत हमें याद दिलाती है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, और जो लोग उसके हुक्मों की उल्लंघना करते हैं, वे क़ियामत के दिन बेहद ज़िल्लत और अपमान की स्थिति में होंगे।
  2. इससे हमें यह सबक़ मिलता है कि हमें अपने कर्मों पर ध्यान देना चाहिए और अल्लाह के दीन (इस्लाम) पर चलना चाहिए, ताकि उस दिन की सख्ती और रुसवाई से बच सकें।
  3. यह आयत हमें यह भी बताती है कि दुनिया की कामयाबी और ताक़त किसी काम की नहीं, अगर इंसान अल्लाह की नाफ़रमानी करता है, तो उसका अंजाम यही है कि उसे उस दिन बेड़ियों में जकड़ा जाएगा।
  4. इस आयत से हमें अल्लाह के रहम और इंसाफ़ का एहसास होता है कि उसने अपने बंदों को आगाह कर दिया है, ताकि वे इस हालत से बचें और अपनी ज़िंदगी को सुधार लें। यह अल्लाह की महान रहमत है कि उसने हमें क़ुरआन के ज़रिए आगाह किया है, ताकि हम उस दिन की सख्ती से बच सकें।


📜 आयत 47-51 — इब्राहीम

47فَلَا تَحْسَبَنَّ اللَّهَ مُخْلِفَ وَعْدِهِ رُسُلَهُ ۗ إِنَّ اللَّهَ عَزِيزٌ ذُو انتِقَامٍ
तो तुम ये ख्याल (भी) न करना कि ख़ुदा अपने रसूलों से ख़िलाफ वायदा करेगा इसमें शक़ नहीं कि ख़ुदा (सबसे) ज़बरदस्त बदला लेने वाला है
48يَوْمَ تُبَدَّلُ الْأَرْضُ غَيْرَ الْأَرْضِ وَالسَّمَاوَاتُ ۖ وَبَرَزُوا لِلَّهِ الْوَاحِدِ الْقَهَّارِ
(मगर कब) जिस दिन ये ज़मीन बदलकर दूसरी ज़मीन कर दी जाएगी और (इसी तरह) आसमान (भी बदल दिए जाएँगें) और सब लोग यकता क़हार (ज़बरदस्त) ख़ुदा के रुबरु (अपनी अपनी जगह से) निकल खड़े होगें
49وَتَرَى الْمُجْرِمِينَ يَوْمَئِذٍ مُّقَرَّنِينَ فِي الْأَصْفَادِ
और तुम उस दिन गुनेहगारों को देखोगे कि ज़ज़ीरों मे जकड़े हुए होगें
50سَرَابِيلُهُم مِّن قَطِرَانٍ وَتَغْشَىٰ وُجُوهَهُمُ النَّارُ
उनके (बदन के) कपड़े क़तरान (तारकोल) के होगे और उनके चेहरों को आग (हर तरफ से) ढाके होगी
51لِيَجْزِيَ اللَّهُ كُلَّ نَفْسٍ مَّا كَسَبَتْ ۚ إِنَّ اللَّهَ سَرِيعُ الْحِسَابِ
ताकि ख़ुदा हर शख़्श को उसके किए का बदला दे (अच्छा तो अच्छा बुरा तो बुरा) बेशक ख़ुदा बहुत जल्द हिसाब लेने वाला है
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अनुवाद — इब्राहीम 49

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Tuesday, August 18, 2026

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