अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مُخْلِفَ: वचन भंग करने वाला, वादे के विपरीत करने वाला।
- عَزِيزٌ: प्रभुत्वशाली, जो हर चीज़ पर ग़ालिब हो, जिसे कोई पराजित न कर सके।
- ذُو انتِقَامٍ: बदला लेने वाला, अपने दुश्मनों से कठोर पलटा लेने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप यह कभी न समझें कि अल्लाह अपने रसूलों से किए गए वादे के ख़िलाफ़ करेगा। उसने अपने पैग़म्बरों से वादा किया है कि वह उन्हें विजय प्रदान करेगा, उनके दीन (धर्म) को सर्वोपरि करेगा, और उनके झुठलाने वालों को विनष्ट करेगा। यह वादा अटल है और इसमें कोई संदेह नहीं। यद्यपि यह पता सीधे नबी ﷺ को संबोधित है, लेकिन इसका उद्देश्य पूरी उम्मत को सिखाना है कि वे भी अल्लाह के वादे पर पूरा भरोसा रखें और कभी निराश न हों।
यह आयत नबी ﷺ और उनके अनुयायियों के दिलों को मज़बूती प्रदान करती है, ख़ासकर उन कठिन परिस्थितियों में जब दुश्मनों के अत्याचार बढ़ जाते हैं और सच्चाई का साथ देने वाले कमज़ोर महसूस करते हैं। अल्लाह ने स्पष्ट किया है कि वह عَزِيزٌ है—अर्थात उसकी शक्ति के आगे कोई नहीं टिक सकता, कोई उसे विवश नहीं कर सकता, और वह ذُو انتِقَامٍ है—अर्थात वह अपने दुश्मनों से ऐसा बदला लेगा जो अत्यंत कठोर और पूर्ण होगा, और उसके बदले से कोई बच नहीं सकता। यह उन लोगों के लिए चेतावनी है जो अल्लाह के रसूलों का मज़ाक उड़ाते हैं और उन्हें रोकने की कोशिश करते हैं, और उन लोगों के लिए खुशखबरी है जो सच्चाई पर डटे रहते हैं।
फ़ायदे (लाभ):
- अल्लाह के वादे पर भरोसा: यह आयत मुसलमान को सिखाती है कि अल्लाह का वादा सत्य है और उसमें कभी अंतर नहीं आता। चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी विपरीत हों, अल्लाह की मदद ज़रूर आती है।
- धैर्य और स्थिरता: जब इंसान को यक़ीन हो कि अल्लाह अपने वादे पर कायम है, तो उसके दिल में धैर्य और सब्र पैदा होता है, और वह मुश्किलों के आगे नहीं झुकता।
- दुश्मनों से न डरना: यह आयत मोमिन को साहस देती है कि वह किसी इंसानी ताक़त से न डरे, क्योंकि असली ताक़त अल्लाह के हाथ में है, और वही अपने दुश्मनों से बदला लेने वाला है।
- इस्लाम की सच्चाई पर विश्वास: यह आयत इस बात की गवाही देती है कि इस्लाम का दीन सच्चा है, क्योंकि अल्लाह ने अपने रसूलों की मदद का वादा किया है और यह वादा पूरा होता रहा है—हर युग में सच्चाई की जीत हुई है।
- अल्लाह की शक्ति की पहचान: यह आयत हमें अल्लाह की महानता और उसकी अटूट शक्ति का एहसास कराती है, जिससे दिल में उसका खौफ़ और उसकी मुहब्बत दोनों बढ़ते हैं।
📜 आयत 45-49 — इब्राहीम
अनुवाद — इब्राहीम 47
सूरा इब्राहीम आयत 47 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो तुम ये ख्याल (भी) न करना कि ख़ुदा अपने…सूरा आयत 47/52 — इब्राहीम إبراهيم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: इब्राहीम सुनें, इब्राहीम अनुवाद, इब्राहीम mp3, इब्राहीम pdf. आयत 45–49. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








