इब्राहीम · 47/52
अनुवाद उच्चारण — इब्राहीम
فَلَا تَحْسَبَنَّ اللَّهَ مُخْلِفَ وَعْدِهِ رُسُلَهُ ۗ إِنَّ اللَّهَ عَزِيزٌ ذُو انتِقَامٍ ۝٤٧
Falaa tahsabannal laaha mukhlifa wa`dihee Rusulah; innal laaha `azeezun zuntiqaam
📖 हिंदी अर्थ
तो तुम ये ख्याल (भी) न करना कि ख़ुदा अपने रसूलों से ख़िलाफ वायदा करेगा इसमें शक़ नहीं कि ख़ुदा (सबसे) ज़बरदस्त बदला लेने वाला है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مُخْلِفَ: वचन भंग करने वाला, वादे के विपरीत करने वाला।
  • عَزِيزٌ: प्रभुत्वशाली, जो हर चीज़ पर ग़ालिब हो, जिसे कोई पराजित न कर सके।
  • ذُو انتِقَامٍ: बदला लेने वाला, अपने दुश्मनों से कठोर पलटा लेने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप यह कभी न समझें कि अल्लाह अपने रसूलों से किए गए वादे के ख़िलाफ़ करेगा। उसने अपने पैग़म्बरों से वादा किया है कि वह उन्हें विजय प्रदान करेगा, उनके दीन (धर्म) को सर्वोपरि करेगा, और उनके झुठलाने वालों को विनष्ट करेगा। यह वादा अटल है और इसमें कोई संदेह नहीं। यद्यपि यह पता सीधे नबी ﷺ को संबोधित है, लेकिन इसका उद्देश्य पूरी उम्मत को सिखाना है कि वे भी अल्लाह के वादे पर पूरा भरोसा रखें और कभी निराश न हों।

यह आयत नबी ﷺ और उनके अनुयायियों के दिलों को मज़बूती प्रदान करती है, ख़ासकर उन कठिन परिस्थितियों में जब दुश्मनों के अत्याचार बढ़ जाते हैं और सच्चाई का साथ देने वाले कमज़ोर महसूस करते हैं। अल्लाह ने स्पष्ट किया है कि वह عَزِيزٌ है—अर्थात उसकी शक्ति के आगे कोई नहीं टिक सकता, कोई उसे विवश नहीं कर सकता, और वह ذُو انتِقَامٍ है—अर्थात वह अपने दुश्मनों से ऐसा बदला लेगा जो अत्यंत कठोर और पूर्ण होगा, और उसके बदले से कोई बच नहीं सकता। यह उन लोगों के लिए चेतावनी है जो अल्लाह के रसूलों का मज़ाक उड़ाते हैं और उन्हें रोकने की कोशिश करते हैं, और उन लोगों के लिए खुशखबरी है जो सच्चाई पर डटे रहते हैं।

फ़ायदे (लाभ):

  1. अल्लाह के वादे पर भरोसा: यह आयत मुसलमान को सिखाती है कि अल्लाह का वादा सत्य है और उसमें कभी अंतर नहीं आता। चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी विपरीत हों, अल्लाह की मदद ज़रूर आती है।
  2. धैर्य और स्थिरता: जब इंसान को यक़ीन हो कि अल्लाह अपने वादे पर कायम है, तो उसके दिल में धैर्य और सब्र पैदा होता है, और वह मुश्किलों के आगे नहीं झुकता।
  3. दुश्मनों से न डरना: यह आयत मोमिन को साहस देती है कि वह किसी इंसानी ताक़त से न डरे, क्योंकि असली ताक़त अल्लाह के हाथ में है, और वही अपने दुश्मनों से बदला लेने वाला है।
  4. इस्लाम की सच्चाई पर विश्वास: यह आयत इस बात की गवाही देती है कि इस्लाम का दीन सच्चा है, क्योंकि अल्लाह ने अपने रसूलों की मदद का वादा किया है और यह वादा पूरा होता रहा है—हर युग में सच्चाई की जीत हुई है।
  5. अल्लाह की शक्ति की पहचान: यह आयत हमें अल्लाह की महानता और उसकी अटूट शक्ति का एहसास कराती है, जिससे दिल में उसका खौफ़ और उसकी मुहब्बत दोनों बढ़ते हैं।


📜 आयत 45-49 — इब्राहीम

45وَسَكَنتُمْ فِي مَسَاكِنِ الَّذِينَ ظَلَمُوا أَنفُسَهُمْ وَتَبَيَّنَ لَكُمْ كَيْفَ فَعَلْنَا بِهِمْ وَضَرَبْنَا لَكُمُ الْأَمْثَالَ
(और क्या तुम वह लोग नहीं कि) जिन लोगों ने (हमारी नाफ़रमानी करके) आप अपने ऊपर जुल्म किया उन्हीं के घरों में तुम भी रहे हालॉकि तुम पर ये भी ज़ाहिर हो चुका था कि हमने उनके साथ क्या (बरताओ) किया और हमने (तुम्हारे समझाने के वास्ते) मसले भी बयान कर दी थीं
46وَقَدْ مَكَرُوا مَكْرَهُمْ وَعِندَ اللَّهِ مَكْرُهُمْ وَإِن كَانَ مَكْرُهُمْ لِتَزُولَ مِنْهُ الْجِبَالُ
और वह लोग अपनी चालें चलते हैं (और कभी बाज़ न आए) हालॉकि उनकी सब हालतें खुदा की नज़र में थी और अगरचे उनकी मक्कारियाँ (उस गज़ब की) थीं कि उन से पहाड़ (अपनी जगह से) हट जाये
47فَلَا تَحْسَبَنَّ اللَّهَ مُخْلِفَ وَعْدِهِ رُسُلَهُ ۗ إِنَّ اللَّهَ عَزِيزٌ ذُو انتِقَامٍ
तो तुम ये ख्याल (भी) न करना कि ख़ुदा अपने रसूलों से ख़िलाफ वायदा करेगा इसमें शक़ नहीं कि ख़ुदा (सबसे) ज़बरदस्त बदला लेने वाला है
48يَوْمَ تُبَدَّلُ الْأَرْضُ غَيْرَ الْأَرْضِ وَالسَّمَاوَاتُ ۖ وَبَرَزُوا لِلَّهِ الْوَاحِدِ الْقَهَّارِ
(मगर कब) जिस दिन ये ज़मीन बदलकर दूसरी ज़मीन कर दी जाएगी और (इसी तरह) आसमान (भी बदल दिए जाएँगें) और सब लोग यकता क़हार (ज़बरदस्त) ख़ुदा के रुबरु (अपनी अपनी जगह से) निकल खड़े होगें
49وَتَرَى الْمُجْرِمِينَ يَوْمَئِذٍ مُّقَرَّنِينَ فِي الْأَصْفَادِ
और तुम उस दिन गुनेहगारों को देखोगे कि ज़ज़ीरों मे जकड़े हुए होगें
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अनुवाद — इब्राहीम 47

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Tuesday, August 18, 2026

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