Qul nazzalahoo Roohul Qudusi mir Rabbika bilhaqqi liyusabbital lazeena aamanoo wa hudanw wa bushraa lilmuslimeen
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम (साफ) कह दो कि इस (क़ुरान) को तो रुहलकुदूस (जिबरील) ने तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से हक़ नाज़िल किया है ताकि जो लोग ईमान ला चुके हैं उनको साबित क़दम रखे और मुसलमानों के लिए (अज़सरतापा) खुशखबरी है
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کہہ دو کہ اس کو روح القدس تمہارے پروردگار کی طرف سے سچائی کے ساتھ لے کر نازل ہوئے ہیں تاکہ یہ (قرآن) مومنوں کو ثابت قدم رکھے اور حکم ماننے والوں کے لئے تو (یہ) ہدایت اور بشارت ہے
رُوحُ الْقُدُسِ: पवित्र आत्मा, अर्थात जिब्रील (अलैहिस्सलाम)।
بِالْحَقِّ: सत्य और न्याय के साथ।
لِيُثَبِّتَ: मज़बूत करने के लिए, स्थिर रखने के लिए।
هُدًى: मार्गदर्शन।
بُشْرَىٰ: शुभ सूचना।
तफ़सीर:
ऐ नबी! आप इनकार करने वालों से कह दीजिए कि यह क़ुरआन मेरी ओर से गढ़ा हुआ नहीं है, बल्कि इसे पवित्र आत्मा (जिब्रील अलैहिस्सलाम) ने आपके रब की ओर से सत्य और न्याय के साथ उतारा है। यह क़ुरआन ऐसा सत्य है जिसमें कोई कमी, भूल या परिवर्तन नहीं हो सकता। इसे उतारने का एक उद्देश्य यह है कि जो लोग ईमान लाए हैं, उन्हें हर नए उतरने वाले हिस्से और नस्ख (रद्द) होने वाले आदेशों पर दृढ़ता और स्थिरता मिले, ताकि उनका विश्वास और मज़बूत होता रहे। दूसरा उद्देश्य यह है कि यह क़ुरआन उन लोगों के लिए मार्गदर्शन है जो अंधकार से निकलकर प्रकाश की ओर आना चाहते हैं, और उन मुसलमानों के लिए शुभ सूचना है जो अल्लाह के आदेशों के आगे सिर झुकाते हैं और उसकी इबादत में लगे रहते हैं — उनके लिए इस क़ुरआन में स्वर्ग और अल्लाह की रहमत की खुशखबरी है।
फ़ायदे:
इस आयत से पता चलता है कि क़ुरआन अल्लाह की ओर से उतारा गया पवित्र ग्रंथ है, जो सत्य और न्याय पर आधारित है — इसमें किसी भी प्रकार की कोई त्रुटि या झूठ नहीं है।
जिब्रील (अलैहिस्सलाम) को "रूहुल कुदुस" (पवित्र आत्मा) कहना उनकी उच्च पवित्रता और सम्मान को दर्शाता है, और यह सिखाता है कि अल्लाह के फ़रिश्ते पूर्ण रूप से पवित्र और विश्वसनीय हैं।
क़ुरआन ईमानवालों के दिलों को मज़बूती देता है — जब भी कोई नई आयत उतरती है या कोई आदेश बदलता है, तो मुसलमान उसे अल्लाह की ओर से मानकर अपने ईमान को और दृढ़ करते हैं।
यह आयत मुसलमानों को खुशखबरी देती है कि उनका भविष्य उज्ज्वल है, और उनके धैर्य और आज्ञाकारिता का फल अल्लाह के पास सुरक्षित है।
क़ुरआन सिर्फ़ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में मार्गदर्शन के लिए उतारा गया है — जो इसे अपनाता है, वह सही रास्ते पर चलता है।
(ऐ रसूल) तुम (साफ) कह दो कि इस (क़ुरान) को तो रुहलकुदूस (जिबरील) ने तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से हक़ नाज़िल किया है ताकि जो लोग ईमान ला चुके हैं उनको साबित क़दम रखे और मुसलमानों के लिए (अज़सरतापा) खुशखबरी है
और (ऐ रसूल) हम जब एक आयत के बदले दूसरी आयत नाज़िल करते हैं तो हालॉकि ख़ुदा जो चीज़ नाज़िल करता है उस (की मसलहतों) से खूब वाक़िफ है मगर ये लोग (तुम को) कहने लगते हैं कि तुम बस बिल्कुल मुज़तरी (ग़लत बयान करने वाले) हो बल्कि खुद उनमें के बहुतेरे (मसालेह को) नहीं जानते
(ऐ रसूल) तुम (साफ) कह दो कि इस (क़ुरान) को तो रुहलकुदूस (जिबरील) ने तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से हक़ नाज़िल किया है ताकि जो लोग ईमान ला चुके हैं उनको साबित क़दम रखे और मुसलमानों के लिए (अज़सरतापा) खुशखबरी है
और (ऐ रसूल) हम तहक़ीक़तन जानते हैं कि ये कुफ्फार तुम्हारी निस्बत कहा करते है कि उनको (तुम को) कोई आदमी क़ुरान सिखा दिया करता है हालॉकि बिल्कुल ग़लत है क्योंकि जिस शख्स की तरफ से ये लोग निस्बत देते हैं उसकी ज़बान तो अजमी है और ये तो साफ साफ अरबी ज़बान है
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