Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- بَدَّلْنَا آيَةً مَكَانَ آيَةٍ: हम एक आयत को दूसरी आयत से बदल दें, अर्थात किसी आयत के हुक्म को दूसरी आयत के हुक्म से मंसूख (रद्द) कर दें।
- مُفْتَرٍ: झूठा, जो अपनी तरफ से बात गढ़कर अल्लाह पर थोपता हो।
तफसीर (व्याख्या):
जब हम (अल्लाह) किसी आयत के हुक्म को बदलकर उसकी जगह दूसरी आयत उतारते हैं — और यह बदलाव हमारी ओर से होता है, जो बंदों की भलाई और उनकी परिस्थितियों के अनुसार होता है — और अल्लाह को पूरा ज्ञान है कि वह कौन सी आयत उतार रहा है, कब उतार रहा है, और किस हुक्म को बदलकर कौन सा नया हुक्म देना बेहतर है, तो काफिर लोग (नबी ﷺ पर) आरोप लगाते हैं कि "तुम तो झूठे हो, यह कुरआन तुमने खुद गढ़ लिया है और अल्लाह की तरफ बड़ा रहा है।" हालाँकि यह आरोप बिल्कुल झूठा है। नबी ﷺ ऐसे नहीं हैं जैसा वे कहते हैं। सच यह है कि उनमें से अधिकतर लोग अल्लाह की हिकमत (बुद्धिमत्ता) और उसकी शरिया के राज़ को नहीं समझते। वे नहीं जानते कि किसी हुक्म को बदलना या मंसूख करना अल्लाह की अपार हिकमत से होता है, और यह उसकी रहमत और बंदों की मसलहत के लिए है। अगर वे जानते होते, तो इसे नबी ﷺ पर आरोप नहीं लगाते। उनमें से कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इस हकीकत को जानते हैं, लेकिन जिद और हठ के कारण इसे मानने से इनकार करते हैं।
फायदे और सबक:
- इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह अपने बंदों की भलाई के लिए हुक्मों में जो बदलाव करता है, वह उसकी हिकमत और रहमत का हिस्सा है। यह कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी बेपनाह दानाई का सबूत है।
- नबी ﷺ पर लगाए गए आरोपों का जवाब यह है कि कुरआन अल्लाह का कलाम है, और नबी ﷺ सिर्फ उसका पैगाम पहुँचाने वाले हैं। उन पर भरोसा करना और उनकी पैरवी करना ही हमारी कामयाबी है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि जब हमें कोई बात समझ न आए, तो उसे जल्दबाजी में झूठ या बुराई न कहें, बल्कि अल्लाह की हिकमत पर भरोसा करें और इल्म हासिल करें।
- अल्लाह का इल्म हर चीज़ पर छाया हुआ है — वह जानता है कि कब कौन सा हुक्म उतारना बंदों के लिए बेहतर है। यह हमारे लिए तसल्ली का बाइस है कि हमारे दीन के हर हुक्म में हमारी ही भलाई है।
- इस आयत से यह भी पता चलता है कि कुरआन और शरिया में नस्ख (किसी हुक्म को बदलना) एक हकीकत है, और यह अल्लाह की तरफ से है, जो उसकी हिकमत को दर्शाता है।
📜 आयत 99-103 — सूरा अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 101
सूरा अन-नहल आयत 101 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) हम जब एक आयत के बदले दूसरी…सूरा आयत 101/128 — सूरा अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नहल सुनें, सूरा अन-नहल अनुवाद, सूरा अन-नहल mp3, सूरा अन-नहल pdf. आयत 99–103. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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