अन-नहल · 22/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
إِلَٰهُكُمْ إِلَٰهٌ وَاحِدٌ ۚ فَالَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ قُلُوبُهُم مُّنكِرَةٌ وَهُم مُّسْتَكْبِرُونَ ۝٢٢
Illahukum Ilaahunw Waahid; fallazeena laa yu`minoona bil Aakhirati quloobuhum munkiratunw wa hum mustakbiroon
📖 हिंदी अर्थ
(फिर क्या काम आएंगीं)तुम्हारा परवरदिगार यकता खुदा है तो जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते उनके दिल ही (इस वजह के हैं कि हर बात का) इन्कार करते हैं और वह बड़े मग़रुर हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مُنكِرَةٌ: इनकार करने वाली, जानने के बावजूद न मानने वाली।
  • مُسْتَكْبِرُونَ: अभिमानी, घमंडी, जो सत्य के आगे झुकने से इनकार करें।

तफसीर (व्याख्या):

तुम्हारा सच्चा पूज्य केवल एक ही है—अल्लाह। वह अकेला है, उसका कोई साझीदार नहीं। वही सृष्टि का रचयिता, पालनहार और पूजा का एकमात्र अधिकारी है। जो लोग आख़िरत (परलोक) पर ईमान नहीं रखते, उनके दिल अल्लाह की एकता को जानते हुए भी उसे जानबूझकर झुठलाते हैं, क्योंकि उन्हें न तो किसी हिसाब का डर है और न ही किसी सज़ा का ख़ौफ़। वे सोचते हैं कि मरने के बाद कोई जीवन नहीं, इसलिए वे अपनी मनमानी करते हैं। साथ ही, वे अभिमान और घमंड के कारण सत्य को स्वीकार करने से इनकार करते हैं। वे अपने आपको बड़ा समझते हैं और अल्लाह की इबादत और उसके आगे झुकने को अपनी शान के खिलाफ़ समझते हैं। यही अभिमान उन्हें ईमान और सच्चाई से दूर रखता है।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. अल्लाह की एकता (तौहीद) इस्लाम की सबसे बुनियादी शिक्षा है। यही वह सच्चाई है जो इंसान को सभी झूठे देवताओं और झूठी शक्तियों की गुलामी से आज़ाद करती है।
  2. आख़िरत पर ईमान इंसान को ज़िम्मेदार बनाता है। जब इंसान यक़ीन करता है कि उसके हर अच्छे और बुरे काम का हिसाब होगा, तो वह बुराई से बचता है और अच्छाई की ओर बढ़ता है।
  3. अभिमान (घमंड) इंसान को सत्य स्वीकार करने से रोकता है। यह वह बीमारी है जो इंसान को अल्लाह से दूर करती है और उसे जहन्नम की ओर ले जाती है। इसलिए इंसान को हमेशा नम्रता और विनम्रता अपनानी चाहिए।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चा ईमान वही है जो दिल से हो, न कि सिर्फ़ ज़ुबान से। दिल का इनकार और अभिमान इंसान को अल्लाह की रहमत से महरूम कर देता है।
  5. अल्लाह की एकता और आख़िरत पर ईमान ही वे दो स्तंभ हैं जो इंसान को सही रास्ते पर चलाते हैं और उसे सुकून, शांति और सफलता की ओर ले जाते हैं।


📜 आयत 20-24 — अन-नहल

20وَالَّذِينَ يَدْعُونَ مِن دُونِ اللَّهِ لَا يَخْلُقُونَ شَيْئًا وَهُمْ يُخْلَقُونَ
और जो कुछ तुम छिपाकर करते हो और जो कुछ ज़ाहिर करते हो (ग़रज़) ख़ुदा (सब कुछ) जानता है और (ये कुफ्फार) ख़ुदा को छोड़कर जिन लोगों को (हाजत के वक्त) पुकारते हैं वह कुछ भी पैदा नहीं कर सकते
21أَمْوَاتٌ غَيْرُ أَحْيَاءٍ ۖ وَمَا يَشْعُرُونَ أَيَّانَ يُبْعَثُونَ
(बल्कि) वह ख़ुद दूसरों के बनाए हुए मुर्दे बेजान हैं और इतनी भी ख़बर नहीं कि कब (क़यामत) होगी और कब मुर्दे उठाए जाएगें
22إِلَٰهُكُمْ إِلَٰهٌ وَاحِدٌ ۚ فَالَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ قُلُوبُهُم مُّنكِرَةٌ وَهُم مُّسْتَكْبِرُونَ
(फिर क्या काम आएंगीं)तुम्हारा परवरदिगार यकता खुदा है तो जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते उनके दिल ही (इस वजह के हैं कि हर बात का) इन्कार करते हैं और वह बड़े मग़रुर हैं
23لَا جَرَمَ أَنَّ اللَّهَ يَعْلَمُ مَا يُسِرُّونَ وَمَا يُعْلِنُونَ ۚ إِنَّهُ لَا يُحِبُّ الْمُسْتَكْبِرِينَ
ये लोग जो कुछ छिपा कर करते हैं और जो कुछ ज़ाहिर बज़ाहिर करते हैं (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ज़रुर जानता है वह हरगिज़ तकब्बुर करने वालों को पसन्द नहीं करता
24وَإِذَا قِيلَ لَهُم مَّاذَا أَنزَلَ رَبُّكُمْ ۙ قَالُوا أَسَاطِيرُ الْأَوَّلِينَ
और जब उनसे कहा जाता है कि तुम्हारे परवरदिगार ने क्या नाज़िल किया है तो वह कहते हैं कि (अजी कुछ भी नहीं बस) अगलो के किस्से हैं
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अनुवाद — अन-नहल 22

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Tuesday, August 18, 2026

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