अन-नहल · 23/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
لَا جَرَمَ أَنَّ اللَّهَ يَعْلَمُ مَا يُسِرُّونَ وَمَا يُعْلِنُونَ ۚ إِنَّهُ لَا يُحِبُّ الْمُسْتَكْبِرِينَ ۝٢٣
Laa jarama annal laaha ya`lamu maa yusirrona wa ma yu`linoon; innahoo laa yuhibbul mustakbireen
📖 हिंदी अर्थ
ये लोग जो कुछ छिपा कर करते हैं और जो कुछ ज़ाहिर बज़ाहिर करते हैं (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ज़रुर जानता है वह हरगिज़ तकब्बुर करने वालों को पसन्द नहीं करता

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَا جَرَمَ: निस्संदेह, सत्य रूप में, इसमें कोई संदेह नहीं।
  • يُسِرُّونَ: जो वे छिपाते हैं (अपने दिलों में, अपने विचारों में, अपने कर्मों में)।
  • يُعْلِنُونَ: जो वे प्रकट करते हैं (अपनी ज़ुबान से, अपने कर्मों से)।
  • الْمُسْتَكْبِرِينَ: अभिमानी, घमंडी, जो अल्लाह की इबादत और उसके आगे झुकने से सिर उठाते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह निस्संदेह और सत्य है कि अल्लाह तआला उन सब चीज़ों को पूरी तरह जानता है जो ये लोग छिपाते हैं—चाहे वह उनके दिलों में बुरे विचार हों, या वे बुरी बातें जो वे अपनी ज़ुबान से नहीं निकालते, या वे बुरे कर्म जो वे चुपके से अंजाम देते हैं। और वह उन सब चीज़ों को भी जानता है जो वे प्रकट करते हैं—चाहे वह उनके द्वारा कहे गए शब्द हों या वे कर्म जो वे खुले तौर पर करते हैं। अल्लाह के ज्ञान से कोई चीज़ छिपी नहीं है, न छोटी और न बड़ी। वह उनके इन सब कार्यों का हिसाब लेगा और उन्हें उनका पूरा बदला देगा।

फिर अल्लाह तआला अपने बारे में बताता है कि वह उन अभिमानी लोगों को पसंद नहीं करता जो उसकी इबादत से सिर उठाते हैं, उसके आगे झुकने और उसके हुक्म के आगे सरेंडर करने से इनकार करते हैं। यह नापसंदगी सामान्य है—यह काफ़िरों और मुसलमानों दोनों को शामिल करती है। जो कोई भी अल्लाह के सामने झुकने से अभिमान करता है, वह अल्लाह की नज़र में नापसंद है, और अल्लाह उससे सख्त नाराज़गी रखता है। यह अभिमान ही वह चीज़ है जो इंसान को सच्चाई क़बूल करने, अल्लाह की इबादत करने और उसके दीन पर चलने से रोकता है।


फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. अल्लाह का ज्ञान सब कुछ घेरे हुए है — यह आयत हमें यक़ीन दिलाती है कि अल्लाह हमारे छिपे और खुले हर काम को जानता है। यह एहसास इंसान को अच्छे कर्मों पर मजबूत करता है और बुरे कर्मों से रोकता है, क्योंकि हम जानते हैं कि हमारा रब हमेशा हमें देख रहा है।
  2. अभिमान अल्लाह की नापसंदगी का कारण है — यह आयत हमें सिखाती है कि अभिमान और घमंड अल्लाह के सबसे नापसंद गुणों में से है। इंसान को चाहिए कि वह अल्लाह के आगे विनम्र हो, अपने अहंकार को तोड़े, और याद रखे कि सारी बड़ाई और कमाल सिर्फ अल्लाह का है।
  3. इबादत में विनम्रता ही सफलता की कुंजी है — जो लोग अल्लाह के आगे झुकते हैं, उसकी इबादत में सजदा करते हैं, और उसके हुक्म के आगे सिर झुकाते हैं, वही अल्लाह के प्यारे बंदे हैं। इस्लाम हमें सिखाता है कि सच्ची इज़्ज़त अल्लाह के आगे झुकने में है, न कि लोगों के आगे सिर उठाने में।
  4. हर कर्म का हिसाब होगा — यह आयत हमें याद दिलाती है कि हमारे छिपे और खुले हर कर्म का हिसाब अल्लाह के यहाँ होगा। यह हमें ज़िम्मेदारी का एहसास कराता है और हमें सच्चाई और ईमानदारी की राह पर चलने की तरग़ीब देता है।


📜 आयत 21-25 — अन-नहल

21أَمْوَاتٌ غَيْرُ أَحْيَاءٍ ۖ وَمَا يَشْعُرُونَ أَيَّانَ يُبْعَثُونَ
(बल्कि) वह ख़ुद दूसरों के बनाए हुए मुर्दे बेजान हैं और इतनी भी ख़बर नहीं कि कब (क़यामत) होगी और कब मुर्दे उठाए जाएगें
22إِلَٰهُكُمْ إِلَٰهٌ وَاحِدٌ ۚ فَالَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ قُلُوبُهُم مُّنكِرَةٌ وَهُم مُّسْتَكْبِرُونَ
(फिर क्या काम आएंगीं)तुम्हारा परवरदिगार यकता खुदा है तो जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते उनके दिल ही (इस वजह के हैं कि हर बात का) इन्कार करते हैं और वह बड़े मग़रुर हैं
23لَا جَرَمَ أَنَّ اللَّهَ يَعْلَمُ مَا يُسِرُّونَ وَمَا يُعْلِنُونَ ۚ إِنَّهُ لَا يُحِبُّ الْمُسْتَكْبِرِينَ
ये लोग जो कुछ छिपा कर करते हैं और जो कुछ ज़ाहिर बज़ाहिर करते हैं (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ज़रुर जानता है वह हरगिज़ तकब्बुर करने वालों को पसन्द नहीं करता
24وَإِذَا قِيلَ لَهُم مَّاذَا أَنزَلَ رَبُّكُمْ ۙ قَالُوا أَسَاطِيرُ الْأَوَّلِينَ
और जब उनसे कहा जाता है कि तुम्हारे परवरदिगार ने क्या नाज़िल किया है तो वह कहते हैं कि (अजी कुछ भी नहीं बस) अगलो के किस्से हैं
25لِيَحْمِلُوا أَوْزَارَهُمْ كَامِلَةً يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۙ وَمِنْ أَوْزَارِ الَّذِينَ يُضِلُّونَهُم بِغَيْرِ عِلْمٍ ۗ أَلَا سَاءَ مَا يَزِرُونَ
(उनको बकने दो ताकि क़यामत के दिन) अपने (गुनाहों) के पूरे बोझ और जिन लोगों को उन्होंने बे समझे बूझे गुमराह किया है उनके (गुनाहों के) बोझ भी उन्हीं को उठाने पड़ेगें ज़रा देखो तो कि ये लोग कैसा बुरा बोझ अपने ऊपर लादे चले जा रहें हैं
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अनुवाद — अन-नहल 23

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Tuesday, August 18, 2026

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