अन-नहल · 21/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
أَمْوَاتٌ غَيْرُ أَحْيَاءٍ ۖ وَمَا يَشْعُرُونَ أَيَّانَ يُبْعَثُونَ ۝٢١
Amwaatun ghairu ahyaaa`inw wa maa yash`uroona aiyaana yub`asoon
📖 हिंदी अर्थ
(बल्कि) वह ख़ुद दूसरों के बनाए हुए मुर्दे बेजान हैं और इतनी भी ख़बर नहीं कि कब (क़यामत) होगी और कब मुर्दे उठाए जाएगें

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَمْوَاتٌ: मुर्दा, बेजान।
  • غَيْرُ أَحْيَاءٍ: जिनमें कोई जीवन नहीं, न कभी जीवित होंगे।
  • يَشْعُرُونَ: जानते हैं, महसूस करते हैं।
  • أَيَّانَ يُبْعَثُونَ: कब उठाए जाएंगे (क़ियामत के दिन)।

तफ़सीर (व्याख्या):

ये मूर्तियाँ और देवता जिन्हें लोग पूजते हैं, वे सब मुर्दा हैं—बेजान हैं। उनमें कोई जान नहीं, न ही उनमें कभी जीवन आएगा। वे न तो सुन सकती हैं, न देख सकती हैं, न किसी की मदद कर सकती हैं। वे तो बस पत्थर और लकड़ी के टुकड़े हैं जिन्हें इंसानों ने खुद बनाया है। इनमें कोई चेतना नहीं है कि वे यह जान सकें कि उन्हें क़ियामत के दिन कब उठाया जाएगा। हालाँकि, क़ियामत के दिन उन्हें भी उनके पूजने वालों के साथ उठाया जाएगा, और सबको जहन्नुम की आग में डाल दिया जाएगा। वे उस वक़्त का एहसास भी नहीं कर सकते कि वह कब आएगा, क्योंकि उनमें कोई ज्ञान या समझ ही नहीं है।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि केवल अल्लाह ही सच्चा और जीवित माबूद है, जो सुनता है, देखता है और हर चीज़ पर क़ादिर है। उसके अलावा कोई भी पूजा के लायक़ नहीं।
  2. बेजान चीज़ों से उम्मीदें बाँधना और उनसे मदद माँगना पूरी तरह बेकार है, क्योंकि वे न तो सुन सकती हैं और न ही कोई फ़ायदा पहुँचा सकती हैं।
  3. क़ियामत का दिन सच है और हर चीज़ को उठाया जाएगा—चाहे वह जीवित हो या निर्जीव। इसलिए हमें अपने आचरण को सही करना चाहिए और अल्लाह की इबादत में लगे रहना चाहिए।
  4. यह आयत हमें अल्लाह की रहमत की याद दिलाती है कि उसने हमें ज़िंदगी, समझ और चेतना दी है, ताकि हम उसे पहचानें और उसकी इबादत करें। यह हमारे लिए बड़ी नेमत है।


📜 आयत 19-23 — अन-नहल

19وَاللَّهُ يَعْلَمُ مَا تُسِرُّونَ وَمَا تُعْلِنُونَ
बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है कि (तुम्हारी नाफरमानी पर भी नेअमत देता है)
20وَالَّذِينَ يَدْعُونَ مِن دُونِ اللَّهِ لَا يَخْلُقُونَ شَيْئًا وَهُمْ يُخْلَقُونَ
और जो कुछ तुम छिपाकर करते हो और जो कुछ ज़ाहिर करते हो (ग़रज़) ख़ुदा (सब कुछ) जानता है और (ये कुफ्फार) ख़ुदा को छोड़कर जिन लोगों को (हाजत के वक्त) पुकारते हैं वह कुछ भी पैदा नहीं कर सकते
21أَمْوَاتٌ غَيْرُ أَحْيَاءٍ ۖ وَمَا يَشْعُرُونَ أَيَّانَ يُبْعَثُونَ
(बल्कि) वह ख़ुद दूसरों के बनाए हुए मुर्दे बेजान हैं और इतनी भी ख़बर नहीं कि कब (क़यामत) होगी और कब मुर्दे उठाए जाएगें
22إِلَٰهُكُمْ إِلَٰهٌ وَاحِدٌ ۚ فَالَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ قُلُوبُهُم مُّنكِرَةٌ وَهُم مُّسْتَكْبِرُونَ
(फिर क्या काम आएंगीं)तुम्हारा परवरदिगार यकता खुदा है तो जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते उनके दिल ही (इस वजह के हैं कि हर बात का) इन्कार करते हैं और वह बड़े मग़रुर हैं
23لَا جَرَمَ أَنَّ اللَّهَ يَعْلَمُ مَا يُسِرُّونَ وَمَا يُعْلِنُونَ ۚ إِنَّهُ لَا يُحِبُّ الْمُسْتَكْبِرِينَ
ये लोग जो कुछ छिपा कर करते हैं और जो कुछ ज़ाहिर बज़ाहिर करते हैं (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ज़रुर जानता है वह हरगिज़ तकब्बुर करने वालों को पसन्द नहीं करता
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अनुवाद — अन-नहल 21

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Tuesday, August 18, 2026

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