अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَخَوُّفٍ: डर की हालत में, या धीरे-धीरे कम करते हुए (नुक़्सान पहुँचाते हुए)।
- لَرَءُوفٌ: बहुत ही दयालु और मेहरबान।
- رَّحِيمٌ: अत्यंत दयावान, जो अपने बंदों पर रहम फ़रमाता है।
तफ़सीर (व्याख्या):
क्या ये काफ़िर, जो अल्लाह के ख़िलाफ़ साज़िशें करते हैं और उसकी आयतों को झुठलाते हैं, इस बात से बेख़ौफ़ हो गए हैं कि अल्लाह उन्हें उस वक़्त पकड़ ले जब वे डर और ख़ौफ़ की हालत में हों? यानी अल्लाह उन्हें धीरे-धीरे नुक़्सान पहुँचाता है — उनके माल, जान, और फलों में कमी करता है — यहाँ तक कि वे हलाक हो जाएँ। या वह उन्हें उस हालत में अज़ाब दे जब वे उसके अज़ाब से डर रहे हों और उम्मीद कर रहे हों कि शायद अज़ाब न आए, लेकिन अचानक अज़ाब आ जाए। अल्लाह हर हाल में उन्हें पकड़ने पर पूरी तरह क़ादिर है, और वे उससे बचकर नहीं निकल सकते।
लेकिन अल्लाह तआला अपने बंदों पर बड़ा मेहरबान और रहम करने वाला है, इसलिए वह जल्दी अज़ाब नहीं भेजता और उन्हें मोहलत देता है, ताकि वे तौबा कर लें और अपनी ग़लतियों से बाज़ आ जाएँ। अगर वह चाहता तो उन्हें फ़ौरन पकड़ लेता, लेकिन उसकी रहमत और शफ़्क़त उन्हें मोहलत देने पर मजबूर करती है।
फ़ायदे (सबक़):
- अल्लाह तआला की रहमत बेहद वसीअ है — वह गुनाहगारों को भी मोहलत देता है ताकि वे पलट आएँ, और यह उसकी मेहरबानी की निशानी है।
- अल्लाह की पकड़ कभी भी और किसी भी हालत में आ सकती है, इसलिए इंसान को हर वक़्त उससे डरते रहना चाहिए और उसकी नाफ़रमानी से बचना चाहिए।
- अल्लाह का डर और उसकी रहमत की उम्मीद — दोनों एक साथ होने चाहिए। डर इसलिए कि वह क़ादिर है, और उम्मीद इसलिए कि वह रहीम है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की पनाह में रहना ही सबसे बड़ी नेमत है, और उसकी रहमत से मायूस होना गुनाह है।
📜 आयत 45-49 — अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 47
सूरा अन-नहल आयत 47 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : या वह अज़ाब से डरते हो तो (उसी हालत में)…सूरा आयत 47/128 — अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नहल सुनें, अन-नहल अनुवाद, अन-नहल mp3, अन-नहल pdf. आयत 45–49. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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