अन-नहल · 69/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
ثُمَّ كُلِي مِن كُلِّ الثَّمَرَاتِ فَاسْلُكِي سُبُلَ رَبِّكِ ذُلُلًا ۚ يَخْرُجُ مِن بُطُونِهَا شَرَابٌ مُّخْتَلِفٌ أَلْوَانُهُ فِيهِ شِفَاءٌ لِّلنَّاسِ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لِّقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ ۝٦٩
Summma kulee min kullis samaraati faslukee subula Rabbiki zululaa; yakhruju mim butoonihaa sharaabum mukh talifun alwaanuhoo feehi shifaaa`ul linnaas, innna fee zaalika la Aayatal liqawminy yatafakkaroon
📖 हिंदी अर्थ
उनमें अपने छत्ते बना फिर हर तरह के फलों (के पूर से) (उनका अर्क़) चूस कर फिर अपने परवरदिगार की राहों में ताबेदारी के साथ चली मक्खियों के पेट से पीने की एक चीज़ निकलती है (शहद) जिसके मुख्तलिफ रंग होते हैं इसमें लोगों (के बीमारियों) की शिफ़ा (भी) है इसमें शक़ नहीं कि इसमें ग़ौर व फ़िक्र करने वालों के वास्ते (क़ुदरते ख़ुदा की बहुत बड़ी निशानी है)
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَاسْلُكِي: रास्ता अपनाओ, चलो।
  • سُبُلَ: रास्ते, मार्ग (बहुवचन)।
  • ذُلُلًا: विनम्र, आज्ञाकारी, आसान बनाए गए रास्ते।
  • شَرَابٌ: पेय, यहाँ अर्थ है शहद।
  • مُخْتَلِفٌ أَلْوَانُهُ: जिसके रंग अलग-अलग हों (सफेद, पीला, लाल, काला आदि)।
  • شِفَاءٌ: रोगों से उपचार, आरोग्य।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने शहद की मक्खी को विशेष प्रेरणा दी कि वह हर प्रकार के फलों से खाए—मीठे, खट्टे, कड़वे—और फिर अपने रब के बताए हुए रास्तों पर चले, जो उसके लिए आसान और विनम्र बना दिए गए हैं। वह पहाड़ों, पेड़ों और ऊँची जगहों पर अपने छत्ते बनाती है, और इन्हीं रास्तों से वह दूर-दूर तक जाकर भोजन इकट्ठा करती है, फिर भी रास्ता नहीं भूलती। यह सब अल्लाह की ओर से उसे सिखाया हुआ है।

फिर अल्लाह ने बताया कि इन मक्खियों के पेट से एक ऐसा पेय (शहद) निकलता है जिसके रंग अलग-अलग होते हैं—सफेद, पीला, लाल, काला आदि। यह शहद लोगों के लिए शिफा (उपचार) है। यानी इसमें कई बीमारियों से ठीक होने की ताकत रखी गई है। यह ज़रूरी नहीं कि यह हर बीमारी और हर इंसान के लिए एक जैसा फायदेमंद हो, बल्कि यह एक ऐसी दवा है जो कई रोगों में, कई लोगों के लिए, अल्लाह की इच्छा से लाभदायक साबित होती है, जैसे अन्य दवाएँ होती हैं।

इस पूरे इंतज़ाम में—मक्खी का भोजन करना, उसका रास्ते ढूँढना, उसके पेट से अलग-अलग रंगों का शहद निकलना, और उसमें शिफा रखना—उन लोगों के लिए बड़ी निशानी है जो गहराई से सोचते और विचार करते हैं। वे इससे अल्लाह की कुदरत, उसकी हिकमत और उसकी रहमत को समझते हैं।


फायदे (सबक):

  1. अल्लाह की कुदरत की निशानी: शहद की मक्खी जैसा छोटा जीव, इतनी बड़ी और बारीक व्यवस्था के साथ काम करता है—यह साबित करता है कि इस कायनात का निर्माता अत्यंत बुद्धिमान और शक्तिशाली है।
  2. इलाज और सुन्नत: शहद को कुरआन में शिफा बताया गया है, इसलिए इसे दवा के रूप में इस्तेमाल करना न केवल वैज्ञानिक रूप से लाभदायक है, बल्कि एक इबादत और नबी की सुन्नत का पालन भी है।
  3. प्रकृति में गहराई से सोचने की प्रेरणा: यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपने आस-पास की चीज़ों—पेड़-पौधों, जानवरों, कीड़ों—को आँखें बंद करके न देखें, बल्कि उनमें छिपी अल्लाह की निशानियों पर विचार करें। यही सोच इंसान को ईमान और यक़ीन की तरफ ले जाती है।
  4. हर चीज़ में भलाई: अल्लाह ने छोटी से छोटी मखलूक में भी इंसानों के लिए फायदा रखा है। यह हमें सिखाता है कि अल्लाह की बनाई हर चीज़ में कुछ न कुछ भलाई है, और हमें उसकी नेमतों का शुक्र अदा करना चाहिए।
  5. तफक्कुर (चिंतन) की अहमियत: आयत के अंत में "जो सोचते हैं" के लिए खास ज़िक्र किया गया है। इससे पता चलता है कि अल्लाह उन लोगों को पसंद करता है जो उसकी आयतों पर गौर करते हैं और उनसे सबक लेते हैं।
🎧 सुनें

📜 आयत 67-71 — अन-नहल

67وَمِن ثَمَرَاتِ النَّخِيلِ وَالْأَعْنَابِ تَتَّخِذُونَ مِنْهُ سَكَرًا وَرِزْقًا حَسَنًا ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لِّقَوْمٍ يَعْقِلُونَ
और इसी तरह खुरमें और अंगूर के फल से (हम तुमको शीरा पिलाते हैं) जिसकी (कभी तो) तुम शराब बना लिया करते हो और कभी अच्छी रोज़ी (सिरका वगैरह) इसमें शक नहीं कि इसमें भी समझदार लोगों के लिए (क़ुदरत ख़ुदा की) बड़ी निशानी है
68وَأَوْحَىٰ رَبُّكَ إِلَى النَّحْلِ أَنِ اتَّخِذِي مِنَ الْجِبَالِ بُيُوتًا وَمِنَ الشَّجَرِ وَمِمَّا يَعْرِشُونَ
और (ऐ रसूल) तुम्हारे परवरदिगार ने शहद की मक्खियों के दिल में ये बात डाली कि तू पहाड़ों और दरख्तों और ऊँची ऊँची ट्ट्टियाँ (और मकानात पाट कर) बनाते हैं
69ثُمَّ كُلِي مِن كُلِّ الثَّمَرَاتِ فَاسْلُكِي سُبُلَ رَبِّكِ ذُلُلًا ۚ يَخْرُجُ مِن بُطُونِهَا شَرَابٌ مُّخْتَلِفٌ أَلْوَانُهُ فِيهِ شِفَاءٌ لِّلنَّاسِ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لِّقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ
उनमें अपने छत्ते बना फिर हर तरह के फलों (के पूर से) (उनका अर्क़) चूस कर फिर अपने परवरदिगार की राहों में ताबेदारी के साथ चली मक्खियों के पेट से पीने की एक चीज़ निकलती है (शहद) जिसके मुख्तलिफ रंग होते हैं इसमें लोगों (के बीमारियों) की शिफ़ा (भी) है इसमें शक़ नहीं कि इसमें ग़ौर व फ़िक्र करने वालों के वास्ते (क़ुदरते ख़ुदा की बहुत बड़ी निशानी है)
70وَاللَّهُ خَلَقَكُمْ ثُمَّ يَتَوَفَّاكُمْ ۚ وَمِنكُم مَّن يُرَدُّ إِلَىٰ أَرْذَلِ الْعُمُرِ لِكَيْ لَا يَعْلَمَ بَعْدَ عِلْمٍ شَيْئًا ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلِيمٌ قَدِيرٌ
और ख़ुदा ही ने तुमको पैदा किया फिर वही तुमको (दुनिया से) उठा लेगा और तुममें से बाज़ ऐसे भी हैं जो ज़लील ज़िन्दगी (सख्त बुढ़ापे) की तरफ लौटाए जाते हैं (बहुत कुछ) जानने के बाद (ऐसे सड़ीले हो गए कि) कुछ नहीं जान सके बेशक ख़ुदा (सब कुछ) जानता और (हर तरह की) कुदरत रखता है
71وَاللَّهُ فَضَّلَ بَعْضَكُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ فِي الرِّزْقِ ۚ فَمَا الَّذِينَ فُضِّلُوا بِرَادِّي رِزْقِهِمْ عَلَىٰ مَا مَلَكَتْ أَيْمَانُهُمْ فَهُمْ فِيهِ سَوَاءٌ ۚ أَفَبِنِعْمَةِ اللَّهِ يَجْحَدُونَ
और ख़ुदा ही ने तुममें से बाज़ को बाज़ पर रिज़क (दौलत में) तरजीह दी है फिर जिन लोगों को रोज़ी ज्यादा दी गई है वह लोग अपनी रोज़ी में से उन लोगों को जिन पर उनका दस्तरस (इख्तेयार) है (लौन्डी ग़ुलाम वग़ैरह) देने वाला नहीं (हालॉकि इस माल में तो सब के सब मालिक गुलाम वग़ैरह) बराबर हैं तो क्या ये लोग ख़ुदा की नेअमत के मुन्किर हैं
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Tuesday, August 18, 2026

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