और ख़ुदा ही ने तुमको पैदा किया फिर वही तुमको (दुनिया से) उठा लेगा और तुममें से बाज़ ऐसे भी हैं जो ज़लील ज़िन्दगी (सख्त बुढ़ापे) की तरफ लौटाए जाते हैं (बहुत कुछ) जानने के बाद (ऐसे सड़ीले हो गए कि) कुछ नहीं जान सके बेशक ख़ुदा (सब कुछ) जानता और (हर तरह की) कुदरत रखता है
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اور خدا ہی نے تم کو پیدا کیا۔ پھر وہی تم کو موت دیتا ہے اور تم میں بعض ایسے ہوتے ہیں کہ نہایت خراب عمر کو پہنچ جاتے ہیں اور (بہت کچھ) جاننے کے بعد ہر چیز سے بےعلم ہوجاتے ہیں۔ بےشک خدا (سب کچھ) جاننے والا (اور) قدرت والا ہے
يَتَوَفَّاكُمْ — वह तुम्हें मृत्यु देता है, तुम्हारी आत्मा को वापस ले लेता है।
أَرْذَلِ الْعُمُرِ — सबसे निकृष्ट (बुरे) उम्र का चरण, अर्थात अत्यधिक वृद्धावस्था (बुढ़ापा) जब इंसान कमज़ोर और नासमझ हो जाता है।
لِكَيْ لَا يَعْلَمَ — ताकि वह न जान सके।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ही है जिसने तुम्हें पैदा किया, और वही तुम्हें मृत्यु देता है जब तुम्हारी उम्र पूरी होती है। तुममें से कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें अत्यधिक बुढ़ापे की ओर लौटा दिया जाता है — यानी वह दौर जब इंसान की ताकत जवाब दे जाती है, उसका दिमाग कमज़ोर पड़ जाता है और वह बचपन की तरह हो जाता है — ताकि वह उस ज्ञान के बाद भी कुछ न जान सके जो वह पहले जानता था। वह पहले जानता था, लेकिन अब भूल जाता है और किसी चीज़ का ज्ञान उसे नहीं रहता। यह अल्लाह की क़ुदरत का एक अज़ीम नमूना है कि वह इंसान को ज्ञान और ताकत देता है, फिर उसे कमज़ोरी और नासमझी की हालत में ला खड़ा करता है। बेशक अल्लाह सब कुछ जानने वाला है, उसके इल्म से कोई चीज़ छिपी नहीं है, और वह हर चीज़ पर पूरी क़ुदरत रखता है। जिसने इंसान को इस हालत में बदला, वह उसे मौत देने और फिर दोबारा जीवित करने पर भी पूरी तरह क़ादिर है।
फ़ायदे (सबक):
अल्लाह की क़ुदरत पर ईमान: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की ताकत असीमित है। वह इंसान को जवानी, बुढ़ापा और मौत देता है, और यही अल्लाह क़यामत के दिन मुर्दों को दोबारा ज़िंदा करने पर भी क़ादिर है। इसलिए हमें मौत के बाद की ज़िंदगी पर यक़ीन रखना चाहिए और उसके लिए तैयारी करनी चाहिए।
दुनिया की ज़िंदगी की कमज़ोरी: जब इंसान बुढ़ापे में अपने ज्ञान और ताकत को खोता देखता है, तो उसे समझना चाहिए कि यह दुनिया की ज़िंदगी कितनी कमज़ोर और फ़ानी है। असली ज़िंदगी आख़िरत की ज़िंदगी है, जो हमेशा रहने वाली है।
अल्लाह के इल्म पर भरोसा: अल्लाह हर चीज़ जानता है — हमारे अमल, हमारी नीयतें और हमारी हालतें। यह जानना हमें अच्छे काम करने और गुनाहों से बचने की तरफ़ राह दिखाता है, क्योंकि अल्लाह सब कुछ देख रहा है।
वृद्धों के प्रति सम्मान: यह आयत हमें सिखाती है कि बुज़ुर्गों की कमज़ोरी पर रहम करना चाहिए और उनकी इज़्ज़त करनी चाहिए, क्योंकि यह अल्लाह की तरफ़ से एक इम्तिहान है। जो उनके साथ अच्छा सलूक करेगा, अल्लाह उसे अच्छा बदला देगा।
नम्रता और अकड़ से बचाव: जब इंसान देखता है कि उसका ज्ञान और ताकत एक दिन खत्म हो जाएगी, तो उसे अपने इल्म और ताकत पर घमंड नहीं करना चाहिए। उसे हमेशा अल्लाह के सामने नम्र रहना चाहिए और उसकी नेमतों का शुक्र अदा करना चाहिए।
और ख़ुदा ही ने तुमको पैदा किया फिर वही तुमको (दुनिया से) उठा लेगा और तुममें से बाज़ ऐसे भी हैं जो ज़लील ज़िन्दगी (सख्त बुढ़ापे) की तरफ लौटाए जाते हैं (बहुत कुछ) जानने के बाद (ऐसे सड़ीले हो गए कि) कुछ नहीं जान सके बेशक ख़ुदा (सब कुछ) जानता और (हर तरह की) कुदरत रखता है
उनमें अपने छत्ते बना फिर हर तरह के फलों (के पूर से) (उनका अर्क़) चूस कर फिर अपने परवरदिगार की राहों में ताबेदारी के साथ चली मक्खियों के पेट से पीने की एक चीज़ निकलती है (शहद) जिसके मुख्तलिफ रंग होते हैं इसमें लोगों (के बीमारियों) की शिफ़ा (भी) है इसमें शक़ नहीं कि इसमें ग़ौर व फ़िक्र करने वालों के वास्ते (क़ुदरते ख़ुदा की बहुत बड़ी निशानी है)
और ख़ुदा ही ने तुमको पैदा किया फिर वही तुमको (दुनिया से) उठा लेगा और तुममें से बाज़ ऐसे भी हैं जो ज़लील ज़िन्दगी (सख्त बुढ़ापे) की तरफ लौटाए जाते हैं (बहुत कुछ) जानने के बाद (ऐसे सड़ीले हो गए कि) कुछ नहीं जान सके बेशक ख़ुदा (सब कुछ) जानता और (हर तरह की) कुदरत रखता है
और ख़ुदा ही ने तुममें से बाज़ को बाज़ पर रिज़क (दौलत में) तरजीह दी है फिर जिन लोगों को रोज़ी ज्यादा दी गई है वह लोग अपनी रोज़ी में से उन लोगों को जिन पर उनका दस्तरस (इख्तेयार) है (लौन्डी ग़ुलाम वग़ैरह) देने वाला नहीं (हालॉकि इस माल में तो सब के सब मालिक गुलाम वग़ैरह) बराबर हैं तो क्या ये लोग ख़ुदा की नेअमत के मुन्किर हैं
और ख़ुदा ही ने तुम्हारे लिए बीबियाँ तुम ही में से बनाई और उसी ने तुम्हारे वास्ते तुम्हारी बीवियों से बेटे और पोते पैदा किए और तुम्हें पाक व पाकीज़ा रोज़ी खाने को दी तो क्या ये लोग बिल्कुल बातिल (सुल्तान बुत वग़ैरह) पर ईमान रखते हैं और ख़ुदा की नेअमत (वहदानियत वग़ैरह से) इन्कार करते हैं
सूराकुरान वेबसाइट की स्थापना पवित्र किताब और पाक सुन्नत की सेवा, अल्लाह की ओर बुलावा, और कुरान व सुन्नत के मार्ग पर धार्मिक विज्ञान को सुगम बनाने के एक विनम्र प्रयास के रूप में की गई थी। हम अल्लाह की प्रशंसा और उसके अनुग्रह के लिए धन्यवाद करते हैं, और उससे प्रार्थना करते हैं कि वह हमारे कार्यों को स्वीकार करे और उन्हें केवल उसके महान चेहरे के लिए विशुद्ध बनाए।